पीओके में मानवाधिकार संकट: यूकेपीएनपी ने संयुक्त राष्ट्र से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की, 24 से अधिक नागरिकों की मौत का आरोप
सारांश
मुख्य बातें
यूनाइटेड कश्मीर पीपुल्स नेशनल पार्टी (यूकेपीएनपी) ने पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में कथित तौर पर गहराते मानवाधिकार संकट को लेकर संयुक्त राष्ट्र (यूएन) और वैश्विक समुदाय से तत्काल हस्तक्षेप की माँग की है। संगठन के अनुसार, 5 जून 2026 से जारी कथित कार्रवाई में 24 से अधिक नागरिकों की मौत हो चुकी है और सैकड़ों लोग गंभीर रूप से घायल हैं।
क्या है मामला
यूकेपीएनपी के प्रवक्ता सरदार नासिर अजीज खान ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर जारी बयान में आरोप लगाया कि पाकिस्तानी अर्धसैनिक बलों ने निहत्थे प्रदर्शनकारियों के विरुद्ध उन्नत सामरिक ड्रोन और जीवित गोलियों का इस्तेमाल किया। उन्होंने कहा, 'शांतिपूर्ण प्रदर्शन लोकतांत्रिक अधिकार है और प्रदर्शनकारियों को आतंकवादी या अपराधी नहीं बताया जाना चाहिए।'
यूकेपीएनपी और स्विस कश्मीर ह्यूमन राइट्स कमीशन (एसकेएचआरसी) ने 26 जून 2026 को संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस और संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (यूएनएचआरसी) को एक आपात अपील भेजकर इस कथित कार्रवाई का मुद्दा उठाया।
संचार बंद, नाकेबंदी जारी
संगठन के अनुसार, 5 जून 2026 से पीओके में मोबाइल नेटवर्क और इंटरनेट सेवाएँ पूरी तरह बंद हैं। कथित तौर पर क्षेत्र की सीमाएँ सील कर दी गई हैं, जिससे खाद्यान्न, गेहूँ का आटा, जरूरी दवाएँ और शिशु आहार जैसी आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति बाधित हो गई है। यूकेपीएनपी का दावा है कि इससे लाखों लोगों का जीवन संकट में पड़ गया है।
अस्पतालों में अर्धसैनिक तैनाती, इलाज से वंचित
संगठन ने आरोप लगाया कि स्थानीय अस्पतालों में अर्धसैनिक बलों की भारी तैनाती के कारण कई घायल लोग गिरफ्तारी के भय से चिकित्सा सहायता लेने से बच रहे हैं। गर्भवती महिलाओं और नवजात शिशुओं के लिए आवश्यक स्वास्थ्य सेवाएँ भी कथित तौर पर प्रभावित हुई हैं। बुजुर्गों और गंभीर बीमारियों से पीड़ित लोगों को भी उपचार नहीं मिल पा रहा बताया जा रहा है।
विपक्षी नेताओं को प्रवेश से रोका
यूकेपीएनपी ने पाकिस्तान की संघीय सरकार की आलोचना करते हुए आरोप लगाया कि विपक्षी नेताओं और सीनेटरों को भी पीओके जाने से रोका गया है। संगठन ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस मुद्दे पर चुप नहीं रह सकता।
संयुक्त राष्ट्र से क्या माँगें
यूकेपीएनपी और एसकेएचआरसी ने संयुक्त राष्ट्र से कथित न्यायेतर हत्याओं की जाँच के लिए स्वतंत्र फैक्ट-फाइंडिंग मिशन भेजने की माँग की है। साथ ही, संयुक्त राष्ट्र, अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षकों, मानवाधिकार संगठनों और विदेशी मीडिया को रावलाकोट सहित प्रभावित क्षेत्रों में बिना किसी बाधा के पहुँच देने और कथित अवैध प्रतिबंधों को तत्काल हटाने की भी माँग की गई है। यह मामला अब अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत-पाकिस्तान तनाव के व्यापक संदर्भ में और अधिक ध्यान खींच सकता है।