पीओके में पाकिस्तानी बलों की गोलीबारी: 40 मौतें, OHCHR से तत्काल हस्तक्षेप की मांग
सारांश
मुख्य बातें
पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में 27 जुलाई 2026 को शांतिपूर्ण लॉन्ग मार्च पर पाकिस्तानी सुरक्षा बलों की कथित कार्रवाई में 40 निर्दोष नागरिक मारे गए हैं और बड़ी संख्या में लोग घायल हैं। बिगड़ते हालात के बीच मानवाधिकार दस्तावेज़ीकरण संगठन जम्मू-कश्मीर ह्यूमन राइट्स ऑब्जर्वेटरी (जेकेएचआरओ) ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त कार्यालय (ओएचसीएचआर) से तत्काल हस्तक्षेप की अपील की है।
मुख्य घटनाक्रम
जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (जेएएसी) की अगुवाई में 27 जुलाई को रावलाकोट से मुजफ्फराबाद की ओर लॉन्ग मार्च दोबारा शुरू हुआ था। जेएएसी के हवाले से जेकेएचआरओ ने बताया कि इस मार्च में 1 लाख से अधिक नागरिक शामिल थे। इसी दौरान कथित तौर पर पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने अंधाधुंध गोलीबारी की, जिसमें 40 लोगों की मौत हुई।
प्रारंभिक रिपोर्टों में 80 से अधिक लोगों के घायल होने की बात कही गई है, जबकि कुछ प्रत्यक्षदर्शियों ने इससे भी अधिक संख्या बताई है। संगठन के अनुसार घायलों की अंतिम और विश्वसनीय संख्या अभी तक उपलब्ध नहीं है।
जेकेएचआरओ की मांगें
पीओके स्थित जेकेएचआरओ ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त वोल्कर तुर्क से अपील करते हुए कई तत्काल कदम उठाने की माँग की है। संगठन ने पाकिस्तानी बलों से गोलीबारी रोकने की सार्वजनिक अपील, शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर घातक बल के इस्तेमाल पर रोक, तथा पीओके में आपात चिकित्सा एवं मानवीय सहायता की तत्काल पहुँच सुनिश्चित करने की माँग की है।
जेकेएचआरओ ने कहा, 'बड़े पैमाने पर नागरिकों की मौजूदगी, सुरक्षा बलों की तैनाती, कथित अंधाधुंध गोलीबारी, संचार प्रतिबंध, मीडिया की सीमित पहुँच और आपात समन्वय में बाधाएं — ये सभी हालात आगे और अधिक जनहानि का तत्काल खतरा पैदा कर रहे हैं। यह स्थिति अब केवल चिंता जताने वाले बयानों से नहीं संभाली जा सकती।'
संयुक्त राष्ट्र की पृष्ठभूमि
गौरतलब है कि इससे पहले 17 जुलाई को भी ओएचसीएचआर ने पीओके में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, शांतिपूर्ण सभा और संगठन बनाने के अधिकारों पर कथित पाबंदियों को लेकर गंभीर चिंता जताई थी। ओएचसीएचआर के प्रवक्ता जेरेमी लॉरेंस ने बयान जारी कर कहा था कि नागरिक समाज संगठन को अपराधी घोषित करना और सभाओं पर कड़े प्रतिबंध लगाना मानवाधिकारों के उल्लंघन को लेकर गंभीर चिंताएँ पैदा करता है। उन्होंने यह भी कहा था कि हिरासत में लिए गए जेएएसी नेताओं और उनके परिवार को कानूनी सहायता तथा निष्पक्ष सुनवाई का अधिकार मिलना चाहिए।
यह ऐसे समय में आया है जब पीओके में नागरिक असंतोष लगातार बढ़ रहा है और अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन इस क्षेत्र पर कड़ी नज़र रख रहे हैं।
आम जनता पर असर
संचार सेवाओं पर प्रतिबंध और मीडिया की सीमित पहुँच के कारण पीओके के नागरिकों तक राहत और सूचना दोनों पहुँचना मुश्किल हो गया है। जेकेएचआरओ ने चेतावनी दी है कि यदि तत्काल हस्तक्षेप नहीं हुआ तो जनहानि और बढ़ सकती है।
क्या होगा आगे
जेकेएचआरओ ने संबंधित विशेष प्रतिवेदकों की तत्काल तैनाती या ओएचसीएचआर की जाँच टीम भेजने की माँग की है। साथ ही क्षेत्र में विश्वसनीय बातचीत की प्रक्रिया शुरू कराने का आग्रह किया है। संगठन ने कहा, 'अब मुख्य सवाल यह नहीं है कि तनाव बढ़ने का खतरा है या नहीं, बल्कि यह है कि क्या संयुक्त राष्ट्र व्यवस्था अगली मौत को रोकने के लिए तेजी से पर्याप्त कदम उठा पाएगी।' अंतरराष्ट्रीय समुदाय की प्रतिक्रिया पर अब सबकी नज़रें टिकी हैं।