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पीओके में अशांति: जेएएसी ने 15 जुलाई को मुजफ्फराबाद मार्च का ऐलान किया, दर्जनों की मौत

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पीओके में अशांति: जेएएसी ने 15 जुलाई को मुजफ्फराबाद मार्च का ऐलान किया, दर्जनों की मौत

सारांश

पीओके में दर्जनों मौतों और संचार ब्लैकआउट के बाद जेएएसी ने 15 जुलाई को मुजफ्फराबाद मार्च का ऐलान किया है। पाकिस्तानी सेना पर फायरिंग के आरोप, नेताओं की जबरन गुमशुदगी और ब्रिटिश सांसद की तीखी प्रतिक्रिया — पीओके संकट अब अंतरराष्ट्रीय मंच पर भी गूँज रहा है।

मुख्य बातें

जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (जेएएसी) ने 15 जुलाई को मुजफ्फराबाद की ओर बड़े मार्च की घोषणा की है।
हालिया अशांति में कथित तौर पर दर्जनों लोग मारे गए; जेएएसी के अनुसार पाकिस्तानी सेना की फायरिंग में दो और युवकों की मौत।
यूकेपीएनपी के अनुसार 7 जून से पीओके में संचार ब्लैकआउट , आवाजाही पर रोक और आवश्यक वस्तुओं की कमी जारी है।
जेएएसी नेता शौकत नवाज मीर और अन्य लोगों की जबरन गुमशुदगी पर यूकेपीएनपी ने स्वतंत्र अदालत में पेशी की माँग की।
ब्रिटिश सांसद बॉब ब्लैकमैन ने एक्स पर पोस्ट कर पीओके में जवाबदेही की माँग की।

पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) में गहराते संकट के बीच जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (जेएएसी) ने 15 जुलाई को मुजफ्फराबाद की ओर बड़े मार्च का ऐलान किया है। 10 जुलाई को जारी इस घोषणा में जेएएसी ने पूरे इलाके के निवासियों से भारी संख्या में विरोध प्रदर्शन में भाग लेने की अपील की है। हालिया अशांति में कथित तौर पर दर्जनों लोग मारे जा चुके हैं।

मुख्य घटनाक्रम

जेएएसी ने रिपोर्टों का हवाला देते हुए दावा किया कि पाकिस्तानी सेना की फायरिंग में दो और युवक मारे गए हैं। संगठन ने सोशल मीडिया पर अपनी प्रतिक्रिया में कहा, 'मुजफ्फराबाद असेंबली में बैठा हर शासक इस हत्याकांड के लिए जिम्मेदार है, लोग याद रखेंगे कि हमारे इन नौजवानों के कातिल पाकिस्तानी सेना और मुजफ्फराबाद के शासक हैं।' संगठन ने यह भी आरोप लगाया कि एक महीने पहले मारे गए लोगों के अवशेष अभी भी हिरासत में हैं, जबकि शासक इस हत्याकांड को 'चुनावी जश्न' में बदल रहे हैं।

संचार और आवाजाही पर रोक

यूनाइटेड कश्मीर पीपुल्स नेशनल पार्टी (यूकेपीएनपी) ने दावा किया कि 7 जून से पीओके में लाखों लोग लंबे समय से जारी संचार ब्लैकआउट, आवाजाही पर प्रतिबंध तथा खाने, दवाओं और आवश्यक वस्तुओं की भारी कमी से प्रभावित हैं। पाकिस्तानी अधिकारियों ने इलाके में लगातार जारी अशांति को इन कार्रवाइयों का कारण बताया है। यूकेपीएनपी ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से इस नाकेबंदी को समाप्त कराने और मानवीय सहायता की निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित करने की माँग की है।

नेताओं की गिरफ्तारी और जबरन गुमशुदगी

यूकेपीएनपी ने पाकिस्तानी अधिकारियों से माँग की है कि जेएएसी नेता शौकत नवाज मीर तथा अन्य हिरासत में लिए गए और लापता किए गए लोगों को बिना देरी के स्वतंत्र अदालतों के समक्ष पेश किया जाए। संगठन ने कहा, 'शौकत नवाज मीर और जिन लोगों को जबरदस्ती गायब किया गया है, उनके ठिकाने का तुरंत खुलासा होना चाहिए।' उन्होंने अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार मानकों के अनुसार निष्पक्ष सुनवाई और कानूनी प्रतिनिधित्व की गारंटी की भी माँग की।

अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया

पीओके में बढ़ते मानवाधिकार उल्लंघनों पर चिंता जताते हुए यूनाइटेड किंगडम की कंजर्वेटिव पार्टी के नेता और सांसद बॉब ब्लैकमैन ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा, 'पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में हत्याएं रुकी नहीं हैं। लोगों की जानें गई हैं, कार्रवाई जारी है और अभी भी पीड़ितों को इंसाफ नहीं मिला है। हमें जवाबदेही की मांग करनी चाहिए।' यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब पीओके की स्थिति को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आवाजें उठने लगी हैं।

आगे क्या होगा

15 जुलाई का मार्च इस संकट में एक निर्णायक मोड़ साबित हो सकता है। जेएएसी के आह्वान पर इलाके में व्यापक भागीदारी की संभावना जताई जा रही है। गौरतलब है कि पीओके में यह अशांति केवल ताज़ी नहीं है — बीते कई हफ्तों से तनाव लगातार बढ़ रहा है और अंतरराष्ट्रीय दबाव भी धीरे-धीरे बढ़ता जा रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

संचार ब्लैकआउट और नेताओं की जबरन गुमशुदगी मिलकर एक ऐसी तस्वीर बनाते हैं जिसे अंतरराष्ट्रीय समुदाय लंबे समय तक अनदेखा नहीं कर सकता। ब्रिटिश सांसद का एक्स पोस्ट यह संकेत देता है कि यह मुद्दा अब केवल भारत-पाकिस्तान के द्विपक्षीय विमर्श तक सीमित नहीं रहेगा। असली सवाल यह है कि क्या 15 जुलाई का मार्च पाकिस्तानी प्रशासन को बातचीत की मेज़ पर लाएगा, या दमन का अगला दौर शुरू होगा।
RashtraPress
10 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जेएएसी का 15 जुलाई का मुजफ्फराबाद मार्च क्यों हो रहा है?
जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी ने पीओके में पाकिस्तानी सेना की कथित फायरिंग में दर्जनों लोगों की मौत, नेताओं की जबरन गुमशुदगी और लंबे समय से जारी संचार ब्लैकआउट के विरोध में यह मार्च बुलाया है। संगठन ने पूरे इलाके के लोगों से बड़ी संख्या में शामिल होने की अपील की है।
पीओके में संचार ब्लैकआउट कब से है और इसका असर किस पर पड़ा है?
यूकेपीएनपी के अनुसार 7 जून से पीओके में लाखों लोग संचार ब्लैकआउट, आवाजाही पर पाबंदी और खाने-दवाओं की कमी से प्रभावित हैं। पाकिस्तानी अधिकारियों ने इसे इलाके में जारी अशांति का हवाला देते हुए उचित ठहराया है।
शौकत नवाज मीर कौन हैं और उनकी गिरफ्तारी पर क्या माँग है?
शौकत नवाज मीर जेएएसी के प्रमुख नेता हैं जिन्हें कथित तौर पर हिरासत में लिया गया है। यूकेपीएनपी ने पाकिस्तानी अधिकारियों से माँग की है कि उन्हें और अन्य लापता लोगों को बिना देरी के स्वतंत्र अदालतों के समक्ष पेश किया जाए और उन्हें अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार मानकों के अनुसार कानूनी प्रतिनिधित्व दिया जाए।
पीओके संकट पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की क्या प्रतिक्रिया है?
ब्रिटिश कंजर्वेटिव पार्टी के नेता और सांसद बॉब ब्लैकमैन ने एक्स पर पोस्ट कर पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में जारी हत्याओं और कार्रवाई पर जवाबदेही की माँग की। यूकेपीएनपी ने भी अंतरराष्ट्रीय समुदाय से नाकेबंदी समाप्त कराने और मानवीय सहायता बहाल करने का आग्रह किया है।
पीओके में अशांति का ताज़ा कारण क्या है?
जेएएसी के अनुसार पाकिस्तानी सेना की फायरिंग में हाल ही में दो और युवकों की मौत हुई है, जिससे कुल मृतक संख्या दर्जनों तक पहुँच गई है। इसके अलावा एक महीने पहले मारे गए लोगों के अवशेष अभी भी हिरासत में होने का आरोप भी तनाव को और बढ़ा रहा है।
राष्ट्र प्रेस
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