पीओके में अशांति: जेएएसी ने 15 जुलाई को मुजफ्फराबाद मार्च का ऐलान किया, दर्जनों की मौत
सारांश
मुख्य बातें
पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) में गहराते संकट के बीच जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (जेएएसी) ने 15 जुलाई को मुजफ्फराबाद की ओर बड़े मार्च का ऐलान किया है। 10 जुलाई को जारी इस घोषणा में जेएएसी ने पूरे इलाके के निवासियों से भारी संख्या में विरोध प्रदर्शन में भाग लेने की अपील की है। हालिया अशांति में कथित तौर पर दर्जनों लोग मारे जा चुके हैं।
मुख्य घटनाक्रम
जेएएसी ने रिपोर्टों का हवाला देते हुए दावा किया कि पाकिस्तानी सेना की फायरिंग में दो और युवक मारे गए हैं। संगठन ने सोशल मीडिया पर अपनी प्रतिक्रिया में कहा, 'मुजफ्फराबाद असेंबली में बैठा हर शासक इस हत्याकांड के लिए जिम्मेदार है, लोग याद रखेंगे कि हमारे इन नौजवानों के कातिल पाकिस्तानी सेना और मुजफ्फराबाद के शासक हैं।' संगठन ने यह भी आरोप लगाया कि एक महीने पहले मारे गए लोगों के अवशेष अभी भी हिरासत में हैं, जबकि शासक इस हत्याकांड को 'चुनावी जश्न' में बदल रहे हैं।
संचार और आवाजाही पर रोक
यूनाइटेड कश्मीर पीपुल्स नेशनल पार्टी (यूकेपीएनपी) ने दावा किया कि 7 जून से पीओके में लाखों लोग लंबे समय से जारी संचार ब्लैकआउट, आवाजाही पर प्रतिबंध तथा खाने, दवाओं और आवश्यक वस्तुओं की भारी कमी से प्रभावित हैं। पाकिस्तानी अधिकारियों ने इलाके में लगातार जारी अशांति को इन कार्रवाइयों का कारण बताया है। यूकेपीएनपी ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से इस नाकेबंदी को समाप्त कराने और मानवीय सहायता की निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित करने की माँग की है।
नेताओं की गिरफ्तारी और जबरन गुमशुदगी
यूकेपीएनपी ने पाकिस्तानी अधिकारियों से माँग की है कि जेएएसी नेता शौकत नवाज मीर तथा अन्य हिरासत में लिए गए और लापता किए गए लोगों को बिना देरी के स्वतंत्र अदालतों के समक्ष पेश किया जाए। संगठन ने कहा, 'शौकत नवाज मीर और जिन लोगों को जबरदस्ती गायब किया गया है, उनके ठिकाने का तुरंत खुलासा होना चाहिए।' उन्होंने अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार मानकों के अनुसार निष्पक्ष सुनवाई और कानूनी प्रतिनिधित्व की गारंटी की भी माँग की।
अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया
पीओके में बढ़ते मानवाधिकार उल्लंघनों पर चिंता जताते हुए यूनाइटेड किंगडम की कंजर्वेटिव पार्टी के नेता और सांसद बॉब ब्लैकमैन ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा, 'पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में हत्याएं रुकी नहीं हैं। लोगों की जानें गई हैं, कार्रवाई जारी है और अभी भी पीड़ितों को इंसाफ नहीं मिला है। हमें जवाबदेही की मांग करनी चाहिए।' यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब पीओके की स्थिति को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आवाजें उठने लगी हैं।
आगे क्या होगा
15 जुलाई का मार्च इस संकट में एक निर्णायक मोड़ साबित हो सकता है। जेएएसी के आह्वान पर इलाके में व्यापक भागीदारी की संभावना जताई जा रही है। गौरतलब है कि पीओके में यह अशांति केवल ताज़ी नहीं है — बीते कई हफ्तों से तनाव लगातार बढ़ रहा है और अंतरराष्ट्रीय दबाव भी धीरे-धीरे बढ़ता जा रहा है।