पीओके में जेएएसी प्रदर्शन के दौरान मीरपुर में हिंसक झड़प, एक दर्जन घायल; 8 जुलाई की अल्टीमेटम
सारांश
मुख्य बातें
पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) में जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (जेएएसी) के आह्वान पर 6 जुलाई को शटर-डाउन हड़ताल और व्यापक विरोध प्रदर्शन हुए, जिनके दौरान मीरपुर जिले के ददयाल शहर में प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच हिंसक झड़पें भड़क उठीं। सूत्रों और प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार इन झड़पों में कुछ पुलिसकर्मियों समेत करीब एक दर्जन लोग घायल हुए। यह अशांति ऐसे समय में सामने आई है जब पाकिस्तानी अधिकारियों ने जेएएसी को 5 जून को ही गैरकानूनी घोषित कर दिया था।
मुख्य घटनाक्रम
झड़पें सबसे पहले ददयाल के अंब गाँव में शुरू हुईं। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक शुरुआती संघर्ष में कम से कम तीन लोग घायल हुए। पाकिस्तानी अखबार डॉन ने बताया कि शाम को एक और झड़प हुई, जिसके बाद एक गंभीर रूप से घायल प्रदर्शनकारी को मीरपुर के अस्पताल में भर्ती कराया गया। मीरपुर डिविजनल हेडक्वार्टर अस्पताल के अधिकारियों ने डॉन को बताया कि उन्हें चार घायल लाए गए, जिनमें से दो की हालत गंभीर बताई गई।
मुजफ्फराबाद में लगभग सभी बाज़ार बंद रहे और सार्वजनिक परिवहन ठप रहने से सड़कें सुनसान रहीं। शहर के एयरपोर्ट चौक पर भी झड़पें हुईं, जहाँ पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए आँसू गैस का इस्तेमाल किया। पुलिस सूत्रों के अनुसार इस दौरान चार पुरुषों और तीन महिलाओं को गिरफ्तार किया गया।
प्रदर्शन का विस्तार
मीरपुर जिले के खलीकाबाद इलाके में महिलाओं ने विरोध प्रदर्शन किया। इस्लामगढ़ और चकसवारी में भी प्रदर्शन हुए, हालाँकि वहाँ किसी हिंसा की खबर नहीं आई। भीमबेर की समाहनी घाटी में तीन अलग-अलग स्थानों पर पुरुषों और महिलाओं के समूहों ने प्रदर्शन किया। बरनाला सबडिवीजन के मोयेल गाँव में बड़ी संख्या में महिलाओं और बच्चों ने शांतिपूर्ण विरोध दर्ज कराया। पीओके के पुंछ डिवीजन में शुजाबाद, हजीरा, मुत्यालमेरा, पनिओला और अब्बासपुर समेत कई स्थानों पर भी प्रदर्शन हुए।
गौरतलब है कि मुजफ्फराबाद के विभिन्न हिस्सों में पुलिस ने फ्लैग मार्च किया। मौके से आए वीडियो में सड़क किनारे एक खाई में करीब एक दर्जन मोटरसाइकिल और कुछ फर्नीचर पड़े दिखे, और झड़प के बाद सड़क पर क्षतिग्रस्त वाहन भी नज़र आए।
जेएएसी की अल्टीमेटम और माँगें
रविवार शाम हुई एक बैठक में जेएएसी कोर कमेटी के सदस्य इम्तियाज असलम ने सरकार को समूह की माँगों के चार्टर को लागू करने और मौजूदा स्थिति सुलझाने के लिए 8 जुलाई तक की अंतिम समयसीमा दी। उन्होंने कहा, "नहीं तो, हम 9 जुलाई को जेएएसी के धरने का एक महीना पूरा होने पर अपने अगले कदम की घोषणा करेंगे।"
जेएएसी की प्रमुख माँगों में पीओके की विधान सभा की वे 12 सीटें समाप्त करना शामिल है जो पाकिस्तान में बसे कश्मीरी शरणार्थियों के लिए आरक्षित हैं। पाकिस्तानी अधिकारियों द्वारा जेएएसी को गैरकानूनी घोषित किए जाने के बाद से क्षेत्र में अशांति और गहरी हुई है।
इंटरनेट बंद और व्यापक असर
रिपोर्टों के अनुसार 6 जुलाई को 30वें दिन भी पीओके में इंटरनेट सेवाएँ बंद रहीं। पुलिस ने तारिकाबाद और लोअर चत्तर इलाकों में कई युवाओं को हिरासत में लिया, जिन पर आसपास की पहाड़ियों से पत्थर फेंकने और सड़क रोकने का कथित आरोप है। बाद में स्थानीय लोगों ने पुलिस के कथित अत्यधिक बल प्रयोग के विरोध में धरना भी दिया।
आगे क्या
यदि 8 जुलाई तक सरकार जेएएसी की माँगें नहीं मानती, तो 9 जुलाई को आंदोलन के एक महीने पूरे होने पर नए कदमों की घोषणा संभावित है। इस घटनाक्रम पर भारत सरकार और अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षकों की नज़र बनी हुई है, क्योंकि पीओके में लगातार बढ़ती अशांति क्षेत्रीय स्थिरता के लिए एक महत्वपूर्ण संकेत मानी जा रही है।