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गुवाहाटी में ब्रिक्स एंटी-ड्रग सम्मेलन: NCB प्रमुख अनुराग गर्ग बोले — म्यांमार से आ रहा मेथामफेटामाइन और हेरोइन

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गुवाहाटी में ब्रिक्स एंटी-ड्रग सम्मेलन: NCB प्रमुख अनुराग गर्ग बोले — म्यांमार से आ रहा मेथामफेटामाइन और हेरोइन

सारांश

गुवाहाटी में ब्रिक्स का पहला एंटी-ड्रग एजेंसी शिखर सम्मेलन — भारत की मेजबानी, म्यांमार से बढ़ते ड्रग खतरे की स्वीकृति और डार्कनेट-क्रिप्टो के ज़रिए तस्करी पर चिंता। रूस, ब्राजील, इथियोपिया सहित सभी सदस्य देशों ने संयुक्त कार्रवाई का संकल्प जताया।

मुख्य बातें

भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता के तहत 6-7 जुलाई 2025 को गुवाहाटी में ब्रिक्स एंटी-ड्रग एजेंसी प्रमुखों की पहली बैठक आयोजित।
NCB महानिदेशक अनुराग गर्ग ने म्यांमार को भारत में आने वाले मेथामफेटामाइन और हेरोइन का प्रमुख स्रोत बताया।
सम्मेलन में डार्कनेट मार्केट , क्रिप्टोकरेंसी और समुद्री मार्गों से ड्रग तस्करी पर विशेष चर्चा।
NCB ने पिछले दो वर्षों में गुवाहाटी सहित कई स्थानों पर नए जोनल-रीजनल कार्यालय खोले; जब्ती में वृद्धि और ट्रांसनेशनल किंगपिन की पहचान।
ब्राजील, रूस और इथियोपिया के प्रतिनिधियों ने कानून प्रवर्तन और इंटेलिजेंस साझाकरण बढ़ाने पर सहमति जताई।

भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता के तहत 6-7 जुलाई 2025 को गुवाहाटी, असम में ब्रिक्स सदस्य देशों की मादक पदार्थ निरोधक एजेंसियों के प्रमुखों का दो दिवसीय सम्मेलन आरंभ हुआ। यह पहला अवसर है जब भारत ने ब्रिक्स देशों की एंटी-ड्रग एजेंसियों के प्रमुखों की इस स्तर की बैठक की मेजबानी की है। सम्मेलन में रूस, ब्राजील, इथियोपिया और अन्य सदस्य देशों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित हैं।

सम्मेलन की पृष्ठभूमि और उद्देश्य

भारतीय नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) के महानिदेशक अनुराग गर्ग ने बताया कि यह सम्मेलन ड्रग तस्करी की बढ़ती अंतरराष्ट्रीय चुनौती के मद्देनज़र आयोजित किया गया है। उन्होंने कहा, 'ड्रग्स एक अंतरराष्ट्रीय समस्या बन गई है। हमारे युवा ड्रग्स में शामिल हो रहे हैं। यह एक ऐसी समस्या है जिससे हमें मिलकर लड़ना होगा।' गर्ग ने यह भी स्पष्ट किया कि बैठक में डार्कनेट मार्केट, क्रिप्टोकरेंसी के माध्यम से ड्रग भुगतान और समुद्री मार्गों से तस्करी जैसे अहम मुद्दों पर विचार-विमर्श होगा।

म्यांमार से खतरा और भारत की रणनीति

महानिदेशक अनुराग गर्ग ने स्वीकार किया कि म्यांमार भारत में आने वाले मेथामफेटामाइन और हेरोइन दोनों का प्रमुख स्रोत है, जो NCB की हालिया वार्षिक रिपोर्ट में भी दर्ज है। इससे निपटने के लिए NCB राज्यों को उनकी अपनी एंटी-ड्रग टास्क फोर्स बनाने में सहयोग कर रही है। उन्होंने बताया कि पिछले दो वर्षों में गुवाहाटी सहित कई स्थानों पर नए जोनल और रीजनल कार्यालय खोले गए हैं, जिनका नेतृत्व आईजी स्तर के अधिकारी कर रहे हैं। इन कार्यालयों के सक्रिय होने के बाद से ड्रग जब्ती में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है और कई ट्रांसनेशनल किंगपिन की पहचान भी की गई है।

सदस्य देशों की प्रतिक्रिया

ब्राजील के विदेश मंत्रालय के प्रतिनिधि लुकास बारबोसा ने कहा कि ब्रिक्स के एंटी-ड्रग वर्किंग ग्रुप का सहयोग का एक लंबा और पारंपरिक इतिहास रहा है। उन्होंने जोर दिया, 'यह एक ट्रांसनेशनल खतरा है जिससे सभी सदस्यों को मिलकर काम करने की जरूरत है।' उन्होंने कानून प्रवर्तन और इंटेलिजेंस साझाकरण को और मजबूत करने की इच्छा व्यक्त की।

रूस के एंटी-ड्रग प्रमुख इवान गोरबुनोव ने कहा कि अनुभव साझा करना उनकी गतिविधियों का अनिवार्य हिस्सा है। उन्होंने कहा, 'हमें यकीन है कि यह कार्यक्रम हमारे और हमारे साझेदारों के लिए फायदेमंद होगा।' गोरबुनोव ने अपने देश की ड्रग स्थिति पर भी खुलकर चर्चा करने की तैयारी जताई।

नई दिल्ली में इथियोपिया के कार्यवाहक राजदूत नेबियू टेडला ने भारत की अध्यक्षता की सराहना करते हुए कहा कि ड्रग्स की समस्या केवल राष्ट्रीय नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय चुनौती है। उन्होंने कहा, 'ब्रिक्स जैसे प्लेटफॉर्म मिलकर काम करने, जानकारी साझा करने और समस्या को सुलझाने का मौका देते हैं।' उन्होंने स्वीकार किया कि इथियोपिया भी ड्रग प्रसार की चुनौती से अछूता नहीं है और वह अपने अनुभव साझा करने के साथ-साथ सहयोगियों से सीखने के लिए भी आया है।

भारत की अध्यक्षता पर आम सहमति

सम्मेलन में उपस्थित सभी प्रतिनिधिमंडलों ने भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता की भूरि-भूरि प्रशंसा की। इथियोपिया के राजदूत टेडला ने विशेष रूप से कहा कि भारत हर सत्र को सफल बना रहा है और सर्वत्र आम सहमति का वातावरण निर्मित कर रहा है। यह ऐसे समय में आया है जब ब्रिक्स का विस्तार हुआ है और नए सदस्य देशों के साथ समन्वय की आवश्यकता पहले से अधिक है।

आगे का रास्ता

दो दिवसीय बैठक के समापन पर सदस्य देशों से एक संयुक्त कार्ययोजना या साझा घोषणापत्र की उम्मीद है। गौरतलब है कि ब्रिक्स के विस्तार के बाद यह पहला बड़ा एंटी-ड्रग सहयोग सत्र है, जो भविष्य में इंटेलिजेंस साझाकरण और संयुक्त अभियानों की नींव रख सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो म्यांमार से लगती सीमा के कारण ड्रग तस्करी का सबसे संवेदनशील गलियारा है, वहीं ब्रिक्स देश एकजुटता दिखा रहे हैं। लेकिन असली सवाल यह है कि क्या यह सहयोग बैठकों और घोषणापत्रों से आगे जाकर साझा ऑपरेशनल इंटेलिजेंस में तब्दील होगा। म्यांमार, जो स्वयं ब्रिक्स का सदस्य नहीं है, एक जटिल भू-राजनीतिक समीकरण प्रस्तुत करता है — उस पर दबाव बनाने के लिए किसी एकल सदस्य देश की नहीं, बल्कि समूह की सामूहिक राजनीतिक इच्छाशक्ति की जरूरत होगी।
RashtraPress
6 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गुवाहाटी में ब्रिक्स एंटी-ड्रग सम्मेलन क्या है?
यह भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता के तहत 6-7 जुलाई 2025 को गुवाहाटी में आयोजित ब्रिक्स सदस्य देशों की मादक पदार्थ निरोधक एजेंसियों के प्रमुखों की पहली बैठक है। इसमें रूस, ब्राजील, इथियोपिया सहित कई देशों के वरिष्ठ अधिकारी ड्रग तस्करी के खिलाफ संयुक्त रणनीति पर विचार-विमर्श कर रहे हैं।
NCB प्रमुख ने म्यांमार को लेकर क्या कहा?
NCB महानिदेशक अनुराग गर्ग ने कहा कि म्यांमार भारत में आने वाले मेथामफेटामाइन और हेरोइन दोनों का प्रमुख स्रोत है, जो NCB की वार्षिक रिपोर्ट में भी दर्ज है। इससे निपटने के लिए NCB राज्यों को एंटी-ड्रग टास्क फोर्स बनाने में सहयोग कर रही है और गुवाहाटी में नया रीजनल कार्यालय भी खोला गया है।
सम्मेलन में किन मुद्दों पर चर्चा हो रही है?
सम्मेलन में डार्कनेट मार्केट और क्रिप्टोकरेंसी के जरिए ड्रग तस्करी, समुद्री मार्गों से मादक पदार्थों की आवाजाही, और सदस्य देशों के बीच इंटेलिजेंस साझाकरण जैसे प्रमुख मुद्दों पर विचार-विमर्श हो रहा है।
ब्रिक्स देश ड्रग तस्करी पर मिलकर काम क्यों कर रहे हैं?
ड्रग तस्करी एक ट्रांसनेशनल खतरा है जिसे कोई भी देश अकेले नहीं रोक सकता। ब्राजील, रूस और इथियोपिया सहित सभी प्रतिनिधियों ने माना कि कानून प्रवर्तन और इंटेलिजेंस में साझा सहयोग से ही इस समस्या से प्रभावी ढंग से निपटा जा सकता है।
भारत ने इस सम्मेलन की मेजबानी गुवाहाटी में क्यों की?
गुवाहाटी पूर्वोत्तर भारत का प्रमुख शहर है और म्यांमार से लगती सीमा के कारण ड्रग तस्करी की दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील क्षेत्र में स्थित है। NCB ने यहाँ हाल ही में एक रीजनल कार्यालय भी खोला है, जिससे यह स्थान इस सम्मेलन के लिए सामरिक रूप से उपयुक्त था।
राष्ट्र प्रेस
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