भारत-म्यांमार 8वीं द्विपक्षीय बैठक: ड्रग तस्करी पर साझा रणनीति, इंटेलिजेंस शेयरिंग पर सहमति
सारांश
मुख्य बातें
भारत और म्यांमार के बीच नई दिल्ली में मंगलवार, 2 जून को नशीले पदार्थों के नियंत्रण पर 8वीं द्विपक्षीय बैठक आयोजित हुई, जिसमें दोनों देशों ने सीमा पार ड्रग तस्करी, सिंथेटिक ड्रग्स और डार्कनेट के ज़रिए हो रहे नेटवर्क पर साझा कार्रवाई की रणनीति पर चर्चा की। यह बैठक म्यांमार के राष्ट्रपति यू मिन आंग ह्लाइंग की भारत यात्रा के दौरान हुई, जो दक्षिण-पूर्व एशिया के 'गोल्डन ट्राइएंगल' से जुड़ी चुनौतियों के मद्देनज़र अहम मानी जा रही है।
बैठक का नेतृत्व और एजेंडा
भारतीय प्रतिनिधिमंडल की अगुवाई नार्कोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) के महानिदेशक अनुराग गर्ग ने की, जबकि म्यांमार की ओर से सीसीडीएसी (CCDAC) के संयुक्त सचिव पुलिस ब्रिगेडियर जनरल थांट ल्विन मौंग ने प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व किया। दोनों पक्षों ने क्षेत्र में ड्रग तस्करी के बदलते स्वरूप की समीक्षा की।
सहयोग के मुख्य बिंदु
बातचीत में इंटेलिजेंस शेयरिंग, समन्वित अभियानों, प्रीकर्सर केमिकल नियंत्रण, सिंथेटिक ड्रग्स पर लगाम, डार्कनेट के ज़रिए होने वाली तस्करी, अवैध अफीम की खेती और क्षमता निर्माण जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर ज़ोर दिया गया। दोनों देशों ने अंतरराष्ट्रीय मादक पदार्थ तस्करी और संगठित अपराध के विरुद्ध साझा प्रतिबद्धता दोहराई।
राष्ट्रपति ह्लाइंग की भारत यात्रा
म्यांमार के राष्ट्रपति यू मिन आंग ह्लाइंग 30 मई से 3 जून तक भारत की अपनी पहली आधिकारिक यात्रा पर हैं। उनके साथ राष्ट्रपति कार्यालय, विदेश मंत्रालय, वित्त एवं राजस्व, कृषि-पशुधन-सिंचाई, उद्योग एवं एमएसएमई विकास मंत्रालय के मंत्री और म्यांमार के केंद्रीय बैंक के गवर्नर भी मौजूद हैं। प्रतिनिधिमंडल में कृषि, फार्मा, ऊर्जा, बैंकिंग, निर्माण, आईटी, संचार, व्यापार और लॉजिस्टिक्स क्षेत्रों के व्यापारिक प्रतिनिधि तथा म्यांमार-भारत मैत्री संघ के सदस्य भी शामिल हैं।
शीर्ष स्तर पर बातचीत
प्रधानमंत्री और म्यांमार के राष्ट्रपति ने 1 जून को वार्ता कर द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों की समीक्षा की तथा भविष्य के संबंधों की रूपरेखा तय की। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने उसी दिन म्यांमार के राष्ट्रपति का स्वागत किया, जबकि विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल ने भी अलग-अलग मुलाक़ात की। ह्लाइंग ने प्रधानमंत्री को आपसी सहमति से तय तिथियों पर म्यांमार आने का निमंत्रण भी दिया।
क्यों मायने रखती है यह बैठक
गौरतलब है कि म्यांमार से लगती लगभग 1,643 किलोमीटर लंबी सीमा भारत के पूर्वोत्तर राज्यों — मणिपुर, मिज़ोरम, नागालैंड और अरुणाचल प्रदेश — के लिए हेरोइन और मेथमफेटामीन तस्करी का प्रमुख गलियारा बनी हुई है। ऐसे में यह बैठक केवल औपचारिक संवाद नहीं, बल्कि सीमावर्ती सुरक्षा परिदृश्य के लिहाज़ से रणनीतिक महत्व रखती है।