अर्जुन राम मेघवाल ने माउंट आबू में 'सुधार उत्सव 2026' का नेतृत्व किया, नागरिक-केंद्रित कानूनी ढाँचे का रोडमैप तैयार
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय विधि एवं न्याय मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) अर्जुन राम मेघवाल ने 4 जुलाई 2026 को राजस्थान के माउंट आबू स्थित ज्ञान सरोवर में दो दिवसीय 'सुधार उत्सव एवं चिंतन शिविर 2026' का उद्घाटन किया और एक आधुनिक, प्रौद्योगिकी-आधारित एवं नागरिक-केंद्रित कानूनी व्यवस्था के निर्माण के लिए दूरदर्शी विचार-विमर्श का नेतृत्व किया। इस शिविर का उद्देश्य विधि एवं न्याय मंत्रालय के संबंधित विभागों के लिए एक ठोस सुधार एजेंडा और कार्यान्वयन-योग्य रोडमैप तैयार करना था।
मुख्य घटनाक्रम
मेघवाल ने अधिकारियों से मंत्रालय की हालिया उपलब्धियों की समीक्षा करने, प्रमुख कानूनी, विधायी और संस्थागत सुधारों पर गहन विचार-विमर्श करने तथा भारत के कानूनी एवं विधायी ढाँचे को सुदृढ़ करने के लिए एक दूरदर्शी रोडमैप तैयार करने का आग्रह किया। उन्होंने सुधार प्रस्तावों, संस्थागत सुदृढ़ीकरण की सिफारिशों और कार्यान्वयन-योग्य उपायों से युक्त एक विजन दस्तावेज तैयार करने का आह्वान किया।
कार्यक्रम में अलग-अलग सत्रों के तहत कानूनी शासन, विधायी सुधार, डिजिटल परिवर्तन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता को अपनाने, प्रौद्योगिकी-आधारित शासन, संस्थागत सुदृढ़ीकरण और क्षमता निर्माण पर केंद्रित विचार-मंथन किया गया।
संकल्प पत्र: सामूहिक प्रतिबद्धता
विधायी विभाग और विधि मामलों के विभाग के सचिव राजीव मणि ने शिविर के परिणाम को 'संकल्प पत्र' के रूप में जारी किया, जिसमें दो दिवसीय चिंतन शिविर से उभरे सामूहिक संकल्प और सुधार एजेंडा को समाहित किया गया है।
'संकल्प पत्र' में दोनों विभागों के अधिकारियों ने प्रतिबद्धता जताई कि वे विकसित भारत 2047 के लक्ष्यों की दिशा में संविधान, विधि के शासन और सत्यनिष्ठा एवं लोक सेवा के उच्चतम मानकों को बनाए रखेंगे।
मंत्री की टिप्पणी
मेघवाल ने कहा कि यह दो दिवसीय कार्यक्रम विधि एवं न्याय मंत्रालय के नवाचार, पारदर्शिता, संस्थागत उत्कृष्टता और सहयोगात्मक नीति निर्माण पर निरंतर ध्यान केंद्रित करने को दर्शाता है। उन्होंने अधिकारियों की सक्रिय भागीदारी, विचारपूर्वक विचार-विमर्श और सामूहिक प्रयासों की सराहना की।
व्यापक संदर्भ और महत्व
यह शिविर ऐसे समय में आयोजित हुआ है जब केंद्र सरकार न्यायिक प्रक्रियाओं के डिजिटलीकरण और कानूनी सेवाओं को आम नागरिक तक सुलभ बनाने पर विशेष ज़ोर दे रही है। गौरतलब है कि भारतीय न्याय संहिता जैसे बड़े विधायी बदलावों के बाद यह पहली बार है जब मंत्रालय ने इस पैमाने पर संस्थागत चिंतन शिविर का आयोजन किया है।
आगे, शिविर में तैयार किए गए विजन दस्तावेज और संकल्प पत्र के आधार पर मंत्रालय के विभिन्न विभागों में सुधार उपायों के क्रियान्वयन की प्रक्रिया शुरू होने की उम्मीद है।