भारत का स्टील उत्पादन अप्रैल-जून 2026 में 5.9% बढ़ा, निर्यात में 38% की उछाल
सारांश
मुख्य बातें
स्टील मंत्रालय द्वारा 6 जुलाई 2026 को जारी आँकड़ों के अनुसार, जून 2026 में भारत का फिनिश्ड स्टील उत्पादन बढ़कर 1.38 करोड़ टन हो गया — जो एक वर्ष पहले जून 2025 के 1.3 करोड़ टन की तुलना में 6% अधिक है। वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) में फिनिश्ड स्टील उत्पादन 3.87 करोड़ टन से बढ़कर 4.10 करोड़ टन पहुँचा, जो 5.9% की वृद्धि दर्शाता है।
उत्पादन के प्रमुख आँकड़े
कच्चे स्टील (क्रूड स्टील) के मोर्चे पर भी तेज़ी जारी रही। जून 2026 में क्रूड स्टील उत्पादन 1.41 करोड़ टन रहा, जबकि पिछले वर्ष इसी महीने यह 1.35 करोड़ टन था। आधिकारिक बयान के अनुसार, जून 2026 तक भारत की कुल क्रूड स्टील उत्पादन क्षमता बढ़कर 221.9 मिलियन टन प्रति वर्ष हो गई है। यह आँकड़ा देश को राष्ट्रीय इस्पात नीति के तहत 2030 तक 300 मिलियन टन प्रति वर्ष की क्षमता के लक्ष्य के करीब ले जाता है।
खपत में भी मज़बूत बढ़त
फिनिश्ड स्टील की खपत में भी उल्लेखनीय उछाल दर्ज किया गया। जून 2026 में खपत 1.42 करोड़ टन रही, जो पिछले वर्ष के 1.32 करोड़ टन से 7.2% अधिक है। पहली तिमाही (अप्रैल-जून) में कुल खपत 3.84 करोड़ टन से बढ़कर 4.16 करोड़ टन हो गई — तिमाही आधार पर 8.3% की वृद्धि। यह ऐसे समय में आया है जब केंद्र सरकार राष्ट्रीय राजमार्ग, रेलवे और बंदरगाहों जैसी बड़े पैमाने की बुनियादी ढाँचा परियोजनाओं में भारी निवेश कर रही है, जिससे स्टील की माँग लगातार मज़बूत बनी हुई है।
निर्यात में ऐतिहासिक उछाल
भारत के स्टील निर्यात में सबसे तेज़ वृद्धि देखने को मिली। जून 2026 में देश ने 6.16 लाख टन स्टील निर्यात किया, जबकि जून 2025 में यह आँकड़ा 4.46 लाख टन था — यानी मात्रा में 38.1% की छलाँग। मूल्य के लिहाज़ से भी निर्यात में तेज़ी रही: जून 2026 में स्टील निर्यात का मूल्य ₹4,674 करोड़ रहा, जबकि जून 2025 में यह ₹3,256.9 करोड़ था। इस तरह निर्यात मूल्य में 43.5% की वृद्धि हुई।
इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश की भूमिका
गौरतलब है कि स्टील खपत में यह बढ़त काफी हद तक सरकार की पूँजीगत व्यय नीति का प्रतिबिंब है। राष्ट्रीय राजमार्ग निर्माण, रेलवे विस्तार और बंदरगाह आधुनिकीकरण — तीनों क्षेत्रों में स्टील की माँग ने घरेलू उत्पादन को गति दी है। यह भी उल्लेखनीय है कि खपत वृद्धि दर (8.3%) उत्पादन वृद्धि दर (5.9%) से अधिक रही, जो यह संकेत देती है कि घरेलू माँग आपूर्ति से तेज़ रफ़्तार से बढ़ रही है।
आगे की राह
भारत की 221.9 मिलियन टन की मौजूदा क्षमता और 2030 के 300 मिलियन टन के लक्ष्य के बीच अभी भी उल्लेखनीय अंतर है। निर्यात में 38% की वृद्धि वैश्विक बाज़ार में भारतीय स्टील की बढ़ती स्वीकार्यता का संकेत देती है। आने वाली तिमाहियों में इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं की गति और वैश्विक स्टील कीमतों की दिशा इस वृद्धि की निरंतरता तय करेगी।