भारत का स्टील उत्पादन अप्रैल में 5.8% बढ़कर 14.09 मिलियन टन, घरेलू माँग में 8.1% उछाल

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भारत का स्टील उत्पादन अप्रैल में 5.8% बढ़कर 14.09 मिलियन टन, घरेलू माँग में 8.1% उछाल

सारांश

अप्रैल 2026 में भारत के स्टील सेक्टर ने एक साथ कई मोर्चों पर मजबूती दिखाई — कच्चा उत्पादन 5.8% बढ़ा, खपत 8.1% उछली और टाटा स्टील ने पंजाब में पहला ग्रीन स्टील प्लांट शुरू किया। 2030 तक 300 मिलियन टन क्षमता के लक्ष्य की ओर यह सेक्टर तेजी से बढ़ रहा है।

मुख्य बातें

भारत का कच्चा स्टील उत्पादन अप्रैल 2026 में 5.8 प्रतिशत बढ़कर 14.09 मिलियन टन हुआ।
फिनिश्ड स्टील की खपत 8.1 प्रतिशत बढ़कर 12.99 मिलियन टन रही; उत्पादन 3.4 प्रतिशत बढ़कर 13.05 मिलियन टन पहुँचा।
स्टील आयात में 30.8% और निर्यात में 24.9% की वार्षिक वृद्धि; भारत हल्का शुद्ध आयातक बना रहा।
टाटा स्टील ने लुधियाना में ₹3,200 करोड़ की लागत से पंजाब का पहला EAF ग्रीन स्टील प्लांट शुरू किया।
एनआईएसएसटी ने 31 मार्च 2026 तक 15 राज्यों के 90 उत्पादकों को ग्रीन स्टील सर्टिफिकेट जारी किए।
वित्त वर्ष 2025-26 में कुल क्षमता 220 मिलियन टन ; 2030 तक 300 मिलियन टन का लक्ष्य।

भारत के स्टील सेक्टर ने अप्रैल 2026 में मजबूत वृद्धि बनाए रखी, जब कच्चे स्टील का उत्पादन 5.8 प्रतिशत बढ़कर 14.09 मिलियन टन हो गया, जबकि पिछले वर्ष अप्रैल में यह 13.31 मिलियन टन था। नई दिल्ली में 6 मई 2026 को जारी एक आधिकारिक सरकारी बयान के अनुसार, इन्फ्रास्ट्रक्चर और मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्रों में तेजी के चलते घरेलू माँग भी सुदृढ़ बनी रही।

उत्पादन के प्रमुख आँकड़े

हॉट मेटल उत्पादन में सालाना आधार पर 5.4 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई। हालाँकि, पिग आयरन उत्पादन 6 प्रतिशत घटकर 0.69 मिलियन टन रह गया। फिनिश्ड स्टील का उत्पादन 3.4 प्रतिशत बढ़कर 13.05 मिलियन टन पहुँचा, जबकि फिनिश्ड स्टील की खपत 8.1 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 12.99 मिलियन टन रही। यह आँकड़े बताते हैं कि घरेलू बाज़ार में स्टील की माँग लगातार बढ़ रही है।

व्यापार परिदृश्य: भारत हल्का शुद्ध आयातक

अप्रैल 2026 में स्टील का आयात 0.68 मिलियन टन और निर्यात 0.47 मिलियन टन रहा, जिससे भारत इस महीने हल्का शुद्ध आयातक बना रहा। पिछले वर्ष अप्रैल की तुलना में आयात में 30.8 प्रतिशत और निर्यात में 24.9 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई। गौरतलब है कि आयात में यह तेज उछाल वैश्विक स्तर पर स्टील की प्रतिस्पर्धी कीमतों और घरेलू माँग की तीव्रता दोनों को दर्शाता है।

कीमतों में सुधार

मजबूत माँग के कारण लगभग सभी प्रमुख स्टील उत्पादों की कीमतें बढ़ीं। टीएमटी/रीबार की कीमतों में महीने-दर-महीने करीब 2.6 प्रतिशत और सालाना आधार पर 3 प्रतिशत की वृद्धि हुई। फ्लैट स्टील में और अधिक तेजी रही — एचआर कॉइल लगभग 6.3 प्रतिशत और जीपी शीट करीब 7.3 प्रतिशत महँगी हुई। कच्चे माल की बात करें तो घरेलू लौह अयस्क की कीमतों में 10 से 11 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी हुई, जबकि कोकिंग कोल की कीमतों में हल्की वृद्धि जारी रही, जिससे उत्पादन लागत पर दबाव बना हुआ है। अंतरराष्ट्रीय स्क्रैप की कीमतें लगभग स्थिर रहीं, जिससे इलेक्ट्रिक स्टील उत्पादकों को कुछ राहत मिली।

क्षमता विस्तार और ग्रीन स्टील पहल

वित्त वर्ष 2025-26 में भारत की कुल स्टील उत्पादन क्षमता लगभग 220 मिलियन टन प्रति वर्ष रही, जो 2030 तक 300 मिलियन टन के लक्ष्य की दिशा में आगे बढ़ रही है। एसएआईएल (SAIL), टाटा स्टील, जेएसडब्ल्यू स्टील (JSW Steel), जेएसपीएल (JSPL) और एएमएनएस (AMNS) जैसे प्रमुख उत्पादक क्षमता बढ़ाने में निवेश जारी रखे हुए हैं। इसी क्रम में टाटा स्टील ने हाल ही में लुधियाना में ₹3,200 करोड़ की लागत से एक स्क्रैप-आधारित ईएएफ (EAF) ग्रीन स्टील प्लांट शुरू किया है, जो पंजाब का अपनी तरह का पहला प्लांट है। स्टील मंत्रालय की 'ग्रीन स्टील' पहल के तहत एनआईएसएसटी (NISST) को प्रमाणन एजेंसी बनाया गया है, जिसने 31 मार्च 2026 तक 15 राज्यों के 90 उत्पादकों को ग्रीन स्टील सर्टिफिकेट जारी किए हैं — इनमें टीएमटी बार, कॉइल, वायर रॉड और पाइप शामिल हैं, जिनमें से अधिकतर को 5-स्टार रेटिंग मिली है।

आगे की राह

सरकार का मानना है कि इन्फ्रास्ट्रक्चर निवेश और बढ़ती मैन्युफैक्चरिंग गतिविधियों के चलते भारत का स्टील सेक्टर आगे भी मजबूत बना रहेगा। यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्तर पर स्टील उद्योग अनिश्चितताओं का सामना कर रहा है। हालाँकि, ऊर्जा सुरक्षा, कच्चे माल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और वैश्विक व्यापार से जुड़ी चुनौतियाँ आने वाले समय में इस सेक्टर के लिए अहम बनी रहेंगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन एक अहम विरोधाभास भी उजागर करते हैं — आयात में 30.8% की तेज वृद्धि यह संकेत देती है कि घरेलू उत्पादन अभी पूरी माँग पूरी करने में सक्षम नहीं है। 2030 तक 300 मिलियन टन क्षमता का लक्ष्य महत्वाकांक्षी है, पर क्षमता और वास्तविक उत्पादन के बीच की खाई पर ध्यान देना जरूरी है। ग्रीन स्टील प्रमाणन की दिशा में कदम सराहनीय है, लेकिन 90 उत्पादकों तक सीमित दायरा अभी बहुत छोटा है। कोकिंग कोल पर आयात-निर्भरता और ऊर्जा लागत का दबाव दीर्घकालिक प्रतिस्पर्धात्मकता के लिए असली चुनौती बनी हुई है।
RashtraPress
13 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अप्रैल 2026 में भारत का कच्चा स्टील उत्पादन कितना रहा?
सरकारी बयान के अनुसार, अप्रैल 2026 में भारत का कच्चा स्टील उत्पादन 5.8 प्रतिशत बढ़कर 14.09 मिलियन टन हो गया, जो अप्रैल 2025 में 13.31 मिलियन टन था। इन्फ्रास्ट्रक्चर और मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्रों की बढ़ती माँग इस वृद्धि का प्रमुख कारण बताई गई है।
भारत का 2030 तक स्टील क्षमता लक्ष्य क्या है?
भारत का लक्ष्य 2030 तक अपनी स्टील उत्पादन क्षमता को 300 मिलियन टन प्रति वर्ष तक पहुँचाना है। वित्त वर्ष 2025-26 में यह क्षमता लगभग 220 मिलियन टन प्रति वर्ष रही, और SAIL, टाटा स्टील, JSW Steel, JSPL तथा AMNS जैसी कंपनियाँ विस्तार में निवेश जारी रखे हुए हैं।
टाटा स्टील का लुधियाना ग्रीन स्टील प्लांट क्या है?
टाटा स्टील ने लुधियाना, पंजाब में ₹3,200 करोड़ की लागत से एक स्क्रैप-आधारित EAF (इलेक्ट्रिक आर्क फर्नेस) ग्रीन स्टील प्लांट शुरू किया है, जो पंजाब में अपनी तरह का पहला प्लांट है। यह स्टील मंत्रालय की ग्रीन स्टील पहल के अनुरूप है।
भारत में ग्रीन स्टील सर्टिफिकेशन कौन जारी करता है?
स्टील मंत्रालय की 'ग्रीन स्टील' पहल के तहत एनआईएसएसटी (NISST) को प्रमाणन एजेंसी नियुक्त किया गया है। 31 मार्च 2026 तक एनआईएसएसटी ने 15 राज्यों के 90 उत्पादकों को ग्रीन स्टील सर्टिफिकेट जारी किए हैं, जिनमें अधिकतर को 5-स्टार रेटिंग मिली है।
अप्रैल 2026 में स्टील की कीमतों में कितना बदलाव आया?
अप्रैल 2026 में टीएमटी/रीबार की कीमतें महीने-दर-महीने करीब 2.6 प्रतिशत और सालाना 3 प्रतिशत बढ़ीं। फ्लैट स्टील में अधिक तेजी रही — एचआर कॉइल लगभग 6.3 प्रतिशत और जीपी शीट करीब 7.3 प्रतिशत महँगी हुई।
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