फरवरी में भारत के इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में 2.3 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि, सीमेंट और स्टील की मांग में वृद्धि
सारांश
Key Takeaways
- फरवरी में इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में 2.3 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि।
- सीमेंट का उत्पादन 9.3 प्रतिशत बढ़ा।
- स्टील उत्पादन में 7.2 प्रतिशत की वृद्धि।
- कच्चे तेल में कमी का कारण पुराने क्षेत्रों का परिपक्व होना।
- कोर उद्योगों का औद्योगिक उत्पादन सूचकांक में 40.27 प्रतिशत योगदान।
नई दिल्ली, 20 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। भारत के आठ प्रमुख इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर (कोर सेक्टर) का समग्र इंडेक्स फरवरी महीने में वर्ष दर वर्ष 2.3 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है।
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय द्वारा शुक्रवार को जारी किए गए आंकड़ों के अनुसार, फरवरी के दौरान सीमेंट, स्टील, उर्वरक, कोयला और बिजली उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई।
स्टील उत्पादन में 7.2 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जबकि सीमेंट क्षेत्र में 9.3 प्रतिशत की मजबूत ग्रोथ सामने आई। यह वृद्धि बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में सरकारी निवेश के बढ़ने का परिणाम है, जिसने इन सामग्री की मांग को बढ़ा दिया है।
कोयला उत्पादन में 2.3 प्रतिशत की वृद्धि हुई, वहीं बिजली उत्पादन में 0.5 प्रतिशत का इजाफा हुआ।
उर्वरक उत्पादन में 3.4 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई, जिसका कारण रबी फसलों की बुवाई में वृद्धि और कृषि क्षेत्र के प्रदर्शन में सुधार बताया गया है, जिससे किसानों की आय में भी सुधार हुआ है।
हालांकि, कच्चे तेल (क्रूड ऑयल), प्राकृतिक गैस और पेट्रोलियम रिफाइनरी उत्पादन में गिरावट देखी गई। कच्चे तेल के उत्पादन में कमी का कारण ओएनजीसी और ऑयल इंडिया के पुराने तेल क्षेत्रों का परिपक्व होना बताया गया है। रिफाइनरी उत्पादन बाजार की मांग और उपलब्ध स्टॉक पर निर्भर करता है।
जनवरी 2026 के लिए आठ कोर उद्योगों की अंतिम ग्रोथ दर 4.7 प्रतिशत रही। वहीं, अप्रैल से फरवरी 2025-26 के बीच कुल वृद्धि दर पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में 2.9 प्रतिशत रही।
आठ कोर उद्योगों के इस इंडेक्स में कोयला, कच्चा तेल, प्राकृतिक गैस, रिफाइनरी उत्पाद, उर्वरक, स्टील, सीमेंट और बिजली शामिल हैं। इनका औद्योगिक उत्पादन सूचकांक यानी आईआईपी में लगभग 40.27 प्रतिशत हिस्सा होता है और ये देश की अर्थव्यवस्था में समग्र औद्योगिक वृद्धि के महत्वपूर्ण संकेतक माने जाते हैं।