23 जुलाई 2026
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पीओके में जेएएसी का 9 जून को लॉकडाउन का आह्वान, 38 मांगें अधूरी; शाहजैब हबीब की मौत से तनाव चरम पर

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पीओके में जेएएसी का 9 जून को लॉकडाउन का आह्वान, 38 मांगें अधूरी; शाहजैब हबीब की मौत से तनाव चरम पर

सारांश

पीओके में जेएएसी का 9 जून का लॉकडाउन आह्वान महज़ एक और विरोध नहीं — यह 38 अधूरी मांगों, एक नेता की कथित हत्या और वर्षों के वादाखिलाफी का विस्फोट है। इंटरनेट बंदी और सैन्य तैनाती के बीच पीओके एक बार फिर उबाल पर है।

मुख्य बातें

जेएएसी ने 9 जून 2026 को पीओके में पूर्ण लॉकडाउन विरोध का आह्वान किया है, जो 38 अधूरी मांगों पर केंद्रित है।
रावलकोट में पाकिस्तानी सुरक्षा बलों की कथित गोलीबारी में जेएएसी के कार्यकारी सदस्य शाहजैब हबीब की मौत हो गई और कई घायल हुए।
पाकिस्तानी अधिकारियों ने जेएएसी पर प्रतिबंध लगाया और मुजफ्फराबाद में पाकिस्तान फेडरल पुलिस व रेंजर्स की अतिरिक्त तैनाती की।
पीओके में दूरसंचार और इंटरनेट सेवाएँ बाधित; लाखों नागरिक बाहरी दुनिया से कटे।
38 सूत्रीय चार्टर में आटा सब्सिडी, अवैध कर वापसी, पीओके बैंक विलय रद्द करने और संघीय नौकरियों में आरक्षण जैसी माँगें शामिल।
जेके-जेएएसी ने अंतरराष्ट्रीय मीडिया और मानवाधिकार संगठनों से तत्काल हस्तक्षेप की अपील की।

पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (जेएएसी) ने 9 जून 2026 को पूर्ण लॉकडाउन विरोध प्रदर्शन का आह्वान किया है। यह आह्वान 38 सूत्रीय मांगपत्र के लागू न होने की पृष्ठभूमि में आया है, जिसमें बिजली संकट, महंगाई, बेरोज़गारी और राजनीतिक भेदभाव जैसे मुद्दे शामिल हैं। रावलकोट में पाकिस्तानी सुरक्षा बलों द्वारा कथित तौर पर की गई गोलीबारी में जेएएसी के कार्यकारी सदस्य शाहजैब हबीब की मौत के बाद इलाके में तनाव और गहरा गया है।

मुख्य घटनाक्रम

रिपोर्टों के अनुसार, रावलकोट में खैगला बर्मा ब्रिज के पास पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने कथित तौर पर प्रदर्शनकारियों पर गोलियाँ चलाईं, जिसमें जेएएसी के कार्यकारी सदस्य शाहजैब हबीब की मौत हो गई और कई अन्य घायल हुए। 9 जून के प्रस्तावित बंद से पहले ही पीओके के विभिन्न हिस्सों में विरोध प्रदर्शन शुरू हो चुके हैं।

पाकिस्तानी अधिकारियों ने जेएएसी पर प्रतिबंध लगाते हुए इसे एक प्रतिबंधित संगठन घोषित किया है। सरकार ने इस पर आतंकवाद में संलिप्तता, राज्य की सुरक्षा को नुकसान पहुँचाने और समाज में अराजकता फैलाने के आरोप लगाए हैं। इन आरोपों को जेएएसी नेताओं ने राजनीति से प्रेरित बताते हुए खारिज किया है।

38 मांगें: क्या चाहता है पीओके

पिछले वर्ष अक्टूबर में जम्मू कश्मीर जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (जेके-जेएएसी) — जो व्यापारियों, वकीलों और नागरिक समाज समूहों का एक गठबंधन है — ने 38 सूत्रीय चार्टर जारी किया था। मिडिल ईस्ट मीडिया रिसर्च इंस्टीट्यूट (एमईएमआरआई) की रिपोर्ट के अनुसार, इस चार्टर में आटे पर सब्सिडी की बहाली, महंगाई पर नियंत्रण, जजों और सरकारी कर्मचारियों के विशेषाधिकारों को समाप्त करना, अवैध कर वापस लेना और पाकिस्तान की संघीय सरकार में कश्मीरियों के लिए नौकरियों में आरक्षण जैसी माँगें शामिल हैं।

इसके अलावा, पीओके बैंक का स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान के साथ विलय रद्द करने, टोल प्लाजा समाप्त करने, लकड़ी की तस्करी रोकने और विभिन्न शहरों में छात्रावास निर्माण की माँगें भी इस चार्टर में शामिल हैं।

सरकारी दमन और संचार ब्लैकआउट

रिपोर्टों के अनुसार, पीओके में दूरसंचार और इंटरनेट सेवाएँ बाधित कर दी गई हैं। मुजफ्फराबाद में पाकिस्तान फेडरल पुलिस और पाकिस्तान रेंजर्स की अतिरिक्त टुकड़ियाँ तैनात की गई हैं। जेके-जेएएसी के एक पूर्व बयान के अनुसार, 28 सितंबर से पाकिस्तान सरकार ने पीओके में संपूर्ण संचार ब्लैकआउट लागू किया था — मोबाइल नेटवर्क, इंटरनेट और लैंडलाइन कनेक्शन निलंबित कर दिए गए थे, जिससे लाखों लोग बाहरी दुनिया से कट गए थे।

गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब पीओके में इस तरह की स्थिति उत्पन्न हुई हो। इससे पहले भी इस क्षेत्र में हिंसक घटनाएँ, इंटरनेट बंदी और सामूहिक विरोध देखे गए हैं, जो इस क्षेत्र में संरचनात्मक असंतोष की गहरी जड़ों को उजागर करते हैं।

विशेषज्ञ क्या कहते हैं

सेंटर फॉर पीस स्टडीज के लिए लिखी अपनी रिपोर्ट में इदरीस आफताब ने कहा, 'पीओके में स्थिति अब और गंभीर होती जा रही है। 9 जून को जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी ने लॉकडाउन विरोध का ऐलान किया है, जिसमें पाकिस्तानी सरकार पर इलाके के लोगों की उम्मीदों के साथ बार-बार धोखा करने का आरोप लगाया गया है।'

आफताब ने आगे लिखा कि जेएएसी ने चेतावनी दी है कि यदि मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया तो बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन, शटर-डाउन स्ट्राइक, चक्का जाम, लंबा मार्च और अनिश्चितकालीन धरना आयोजित किए जाएँगे।

आलोचकों ने मुजफ्फराबाद समझौते — जो पिछले वर्ष अक्टूबर में हुआ था — के अधूरे क्रियान्वयन की ओर भी ध्यान दिलाया है। उन्होंने इस्लामाबाद के नियंत्रण के लिए उपयोग की जाने वाली 12 शरणार्थी सीटों, स्वायत्तता में कटौती करने वाले 13वें संशोधन और पाकिस्तान के आधिकारिक प्रचार तथा पीओके की ज़मीनी हकीकत के बीच के अंतर को रेखांकित किया है।

आगे क्या होगा

जेके-जेएएसी की कोर कमेटी के सदस्य सरदार उमर नजीर कश्मीरी ने अंतरराष्ट्रीय मीडिया और वैश्विक मानवाधिकार संगठनों से अपील की है कि वे पीओके में जारी संकट पर तत्काल ध्यान दें। उन्होंने कहा, '29 सितंबर से एक शांतिपूर्ण जन आंदोलन का सामना सरकारी दमन, मानवाधिकार उल्लंघन, नागरिक स्वतंत्रता पर प्रतिबंध और निर्दोष नागरिकों की हत्या से हुआ है।'

जेएएसी ने लोगों से लंबे शटडाउन की तैयारी के लिए कम से कम एक महीने का आवश्यक सामान जमा करने की अपील की है। साथ ही यह भी घोषणा की है कि जब तक अधिकारी उनकी मांगें नहीं मानते, तब तक क्षेत्र में किसी भी राजनीतिक चुनावी रैली की अनुमति नहीं दी जाएगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि वर्षों के संरचनात्मक उपेक्षा और टूटे वादों का परिणाम है — मुजफ्फराबाद समझौता अधूरा रहा, 13वाँ संशोधन स्वायत्तता पर कुठाराघात बना, और 38 मांगों का चार्टर महीनों से ठंडे बस्ते में पड़ा है। इस्लामाबाद का जेएएसी पर प्रतिबंध और 'आतंकवाद' का लेबल एक क्लासिक दमन-रणनीति है जो असंतोष को संबोधित करने की बजाय उसे दबाने की कोशिश करती है। शाहजैब हबीब की कथित हत्या और इंटरनेट ब्लैकआउट दिखाते हैं कि पाकिस्तान इस क्षेत्र में जवाबदेही की जगह सूचना-नियंत्रण को प्राथमिकता दे रहा है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चुप्पी इस संकट को और गहरा करने का जोखिम उठाती है।
RashtraPress
23 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पीओके में जेएएसी का 9 जून का लॉकडाउन विरोध प्रदर्शन क्यों हो रहा है?
जेएएसी ने 9 जून 2026 को पूर्ण लॉकडाउन का आह्वान इसलिए किया है क्योंकि पाकिस्तान सरकार ने पिछले वर्ष अक्टूबर में हुए मुजफ्फराबाद समझौते और 38 सूत्रीय मांगपत्र को लागू नहीं किया है। इन मांगों में बिजली संकट, महंगाई, बेरोज़गारी और राजनीतिक भेदभाव जैसे मुद्दे शामिल हैं।
जेएएसी की 38 मांगें क्या हैं?
एमईएमआरआई की रिपोर्ट के अनुसार, 38 सूत्रीय चार्टर में आटे पर सब्सिडी बहाल करना, महंगाई नियंत्रण, जजों के विशेषाधिकार समाप्त करना, अवैध कर वापस लेना, पाकिस्तानी संघीय सरकार में कश्मीरियों के लिए आरक्षण, पीओके बैंक का विलय रद्द करना और टोल प्लाजा समाप्त करना शामिल हैं। यह चार्टर व्यापारियों, वकीलों और नागरिक समाज समूहों के गठबंधन जेके-जेएएसी ने जारी किया था।
शाहजैब हबीब कौन थे और उनकी मौत कैसे हुई?
शाहजैब हबीब जेएएसी के कार्यकारी सदस्य थे। सेंटर फॉर पीस स्टडीज की रिपोर्ट के अनुसार, रावलकोट में खैगला बर्मा ब्रिज के पास पाकिस्तानी सुरक्षा बलों द्वारा कथित तौर पर की गई गोलीबारी में उनकी मौत हो गई और कई अन्य घायल हो गए।
पाकिस्तान ने जेएएसी पर प्रतिबंध क्यों लगाया?
पाकिस्तानी अधिकारियों ने जेएएसी को प्रतिबंधित संगठन घोषित करते हुए उस पर आतंकवाद में संलिप्तता, राज्य की शांति और सुरक्षा को नुकसान पहुँचाने तथा समाज में अराजकता फैलाने के आरोप लगाए हैं। जेएएसी नेताओं ने इन आरोपों को राजनीति से प्रेरित बताते हुए खारिज किया है।
पीओके में इंटरनेट और संचार बंदी का असर क्या है?
रिपोर्टों के अनुसार, पीओके में दूरसंचार और इंटरनेट सेवाएँ बाधित कर दी गई हैं। जेके-जेएएसी के बयान के अनुसार, 28 सितंबर से मोबाइल नेटवर्क, इंटरनेट और लैंडलाइन कनेक्शन निलंबित किए जाने से लाखों लोग बाहरी दुनिया से पूरी तरह कट गए हैं।
राष्ट्र प्रेस
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