पीओके में जेएएसी का 9 जून को लॉकडाउन का आह्वान, 38 मांगें अधूरी; शाहजैब हबीब की मौत से तनाव चरम पर
सारांश
मुख्य बातें
पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (जेएएसी) ने 9 जून 2026 को पूर्ण लॉकडाउन विरोध प्रदर्शन का आह्वान किया है। यह आह्वान 38 सूत्रीय मांगपत्र के लागू न होने की पृष्ठभूमि में आया है, जिसमें बिजली संकट, महंगाई, बेरोज़गारी और राजनीतिक भेदभाव जैसे मुद्दे शामिल हैं। रावलकोट में पाकिस्तानी सुरक्षा बलों द्वारा कथित तौर पर की गई गोलीबारी में जेएएसी के कार्यकारी सदस्य शाहजैब हबीब की मौत के बाद इलाके में तनाव और गहरा गया है।
मुख्य घटनाक्रम
रिपोर्टों के अनुसार, रावलकोट में खैगला बर्मा ब्रिज के पास पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने कथित तौर पर प्रदर्शनकारियों पर गोलियाँ चलाईं, जिसमें जेएएसी के कार्यकारी सदस्य शाहजैब हबीब की मौत हो गई और कई अन्य घायल हुए। 9 जून के प्रस्तावित बंद से पहले ही पीओके के विभिन्न हिस्सों में विरोध प्रदर्शन शुरू हो चुके हैं।
पाकिस्तानी अधिकारियों ने जेएएसी पर प्रतिबंध लगाते हुए इसे एक प्रतिबंधित संगठन घोषित किया है। सरकार ने इस पर आतंकवाद में संलिप्तता, राज्य की सुरक्षा को नुकसान पहुँचाने और समाज में अराजकता फैलाने के आरोप लगाए हैं। इन आरोपों को जेएएसी नेताओं ने राजनीति से प्रेरित बताते हुए खारिज किया है।
38 मांगें: क्या चाहता है पीओके
पिछले वर्ष अक्टूबर में जम्मू कश्मीर जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (जेके-जेएएसी) — जो व्यापारियों, वकीलों और नागरिक समाज समूहों का एक गठबंधन है — ने 38 सूत्रीय चार्टर जारी किया था। मिडिल ईस्ट मीडिया रिसर्च इंस्टीट्यूट (एमईएमआरआई) की रिपोर्ट के अनुसार, इस चार्टर में आटे पर सब्सिडी की बहाली, महंगाई पर नियंत्रण, जजों और सरकारी कर्मचारियों के विशेषाधिकारों को समाप्त करना, अवैध कर वापस लेना और पाकिस्तान की संघीय सरकार में कश्मीरियों के लिए नौकरियों में आरक्षण जैसी माँगें शामिल हैं।
इसके अलावा, पीओके बैंक का स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान के साथ विलय रद्द करने, टोल प्लाजा समाप्त करने, लकड़ी की तस्करी रोकने और विभिन्न शहरों में छात्रावास निर्माण की माँगें भी इस चार्टर में शामिल हैं।
सरकारी दमन और संचार ब्लैकआउट
रिपोर्टों के अनुसार, पीओके में दूरसंचार और इंटरनेट सेवाएँ बाधित कर दी गई हैं। मुजफ्फराबाद में पाकिस्तान फेडरल पुलिस और पाकिस्तान रेंजर्स की अतिरिक्त टुकड़ियाँ तैनात की गई हैं। जेके-जेएएसी के एक पूर्व बयान के अनुसार, 28 सितंबर से पाकिस्तान सरकार ने पीओके में संपूर्ण संचार ब्लैकआउट लागू किया था — मोबाइल नेटवर्क, इंटरनेट और लैंडलाइन कनेक्शन निलंबित कर दिए गए थे, जिससे लाखों लोग बाहरी दुनिया से कट गए थे।
गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब पीओके में इस तरह की स्थिति उत्पन्न हुई हो। इससे पहले भी इस क्षेत्र में हिंसक घटनाएँ, इंटरनेट बंदी और सामूहिक विरोध देखे गए हैं, जो इस क्षेत्र में संरचनात्मक असंतोष की गहरी जड़ों को उजागर करते हैं।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं
सेंटर फॉर पीस स्टडीज के लिए लिखी अपनी रिपोर्ट में इदरीस आफताब ने कहा, 'पीओके में स्थिति अब और गंभीर होती जा रही है। 9 जून को जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी ने लॉकडाउन विरोध का ऐलान किया है, जिसमें पाकिस्तानी सरकार पर इलाके के लोगों की उम्मीदों के साथ बार-बार धोखा करने का आरोप लगाया गया है।'
आफताब ने आगे लिखा कि जेएएसी ने चेतावनी दी है कि यदि मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया तो बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन, शटर-डाउन स्ट्राइक, चक्का जाम, लंबा मार्च और अनिश्चितकालीन धरना आयोजित किए जाएँगे।
आलोचकों ने मुजफ्फराबाद समझौते — जो पिछले वर्ष अक्टूबर में हुआ था — के अधूरे क्रियान्वयन की ओर भी ध्यान दिलाया है। उन्होंने इस्लामाबाद के नियंत्रण के लिए उपयोग की जाने वाली 12 शरणार्थी सीटों, स्वायत्तता में कटौती करने वाले 13वें संशोधन और पाकिस्तान के आधिकारिक प्रचार तथा पीओके की ज़मीनी हकीकत के बीच के अंतर को रेखांकित किया है।
आगे क्या होगा
जेके-जेएएसी की कोर कमेटी के सदस्य सरदार उमर नजीर कश्मीरी ने अंतरराष्ट्रीय मीडिया और वैश्विक मानवाधिकार संगठनों से अपील की है कि वे पीओके में जारी संकट पर तत्काल ध्यान दें। उन्होंने कहा, '29 सितंबर से एक शांतिपूर्ण जन आंदोलन का सामना सरकारी दमन, मानवाधिकार उल्लंघन, नागरिक स्वतंत्रता पर प्रतिबंध और निर्दोष नागरिकों की हत्या से हुआ है।'
जेएएसी ने लोगों से लंबे शटडाउन की तैयारी के लिए कम से कम एक महीने का आवश्यक सामान जमा करने की अपील की है। साथ ही यह भी घोषणा की है कि जब तक अधिकारी उनकी मांगें नहीं मानते, तब तक क्षेत्र में किसी भी राजनीतिक चुनावी रैली की अनुमति नहीं दी जाएगी।