पीओके में जेएएसी लॉन्ग मार्च पर पाकिस्तानी बलों की गोलीबारी, 20 से अधिक प्रदर्शनकारी मारे गए
सारांश
मुख्य बातें
पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) में जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (जेएएसी) के लॉन्ग मार्च के दौरान 28 जुलाई 2026 को पाकिस्तानी सुरक्षा बलों की कार्रवाई में कम से कम 20 लोगों की मौत हो गई और दर्जनों गंभीर रूप से घायल हुए। रावलकोट में शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर घातक हथियारों, भारी गोलाबारी और आंसू गैस के इस्तेमाल की खबरें सामने आई हैं, जिससे क्षेत्र में मानवाधिकार संकट और गहरा हो गया है।
मुख्य घटनाक्रम
जेएएसी ने मंगलवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जारी एक पोस्ट में बताया कि लॉन्ग मार्च का काफिला रावलकोट शहर पहुँच गया है। संगठन ने कहा, 19 मृतकों की पहचान की पुष्टि हो चुकी है, जबकि एक व्यक्ति के पास पहचान के कागजात नहीं थे — उसके सिर में गोली लगी थी और उसका शव पलांद्री अस्पताल में रखा गया है, जिससे कुल मौतों की संख्या कम से कम 20 हो गई है।
जेएएसी के अनुसार, प्रदर्शनकारी रावलकोट के चांदनी चौक पर एकत्रित हैं और दिन निकलते ही शहीद चौक पर एक सभा में आगे की रणनीति तय की जाएगी। मरने वालों की संख्या और बढ़ने की आशंका है, क्योंकि कई घायलों की हालत गंभीर बताई जा रही है।
प्रदर्शन की पृष्ठभूमि
यह मार्च तब शुरू हुआ जब जेएएसी और पाकिस्तानी अधिकारियों के बीच बातचीत किसी ठोस नतीजे पर नहीं पहुँची। रविवार को मीरपुर डिवीजन से शुरू हुए इस काफिले ने सोमवार को रावलकोट में धरना दिया, इसके बाद मुजफ्फराबाद की ओर कूच करने की योजना थी। पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने कथित तौर पर सोमवार शाम रावलकोट में शांतिपूर्वक प्रदर्शन कर रहे लोगों पर हिंसक कार्रवाई की।
गौरतलब है कि पीओके में ये प्रदर्शन इस्लामाबाद के दशकों पुराने नियंत्रण को सीधी चुनौती दे रहे हैं। यह इलाका इस समय सख्त नाकाबंदी, कर्फ्यू और संचार ब्लैकआउट की स्थिति में है।
अंतरराष्ट्रीय अपील
यूनाइटेड कश्मीर पीपुल्स नेशनल पार्टी (यूकेपीएनपी) ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान पीओके में बढ़ते मानवाधिकार उल्लंघनों की ओर दिलाया। संगठन ने संयुक्त राष्ट्र, अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संस्थाओं और लोकतांत्रिक सरकारों से अपील की कि वे पाकिस्तानी सेना द्वारा आम नागरिकों पर घातक हथियारों और अत्यधिक बल के इस्तेमाल को तत्काल रुकवाएँ।
यूकेपीएनपी ने चेतावनी दी, 'गोलाबारी और घातक हथियारों का इस्तेमाल जारी है, जिससे आम लोगों की जान जाने का खतरा और बढ़ गया है।'
भारत की प्रतिक्रिया
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने साप्ताहिक मीडिया ब्रीफिंग में कहा कि 'पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में पुलिस की बर्बरता की खबरें हैं, जिसमें कई लोग मारे गए हैं और कई अन्य घायल हुए हैं।' उन्होंने कहा कि भारत को उम्मीद है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय पाकिस्तान को उसके कृत्यों के लिए जवाबदेह ठहराएगा।
उल्लेखनीय है कि पिछले महीने भी भारत ने पाकिस्तान पर पीओके में हो रहे मानवाधिकार उल्लंघनों से ध्यान भटकाने के लिए फर्जी खबरों और वीडियो का सहारा लेने का आरोप लगाया था।
आगे क्या होगा
जेएएसी ने संकेत दिया है कि रावलकोट के शहीद चौक पर होने वाली सभा में आंदोलन की अगली दिशा तय होगी। क्षेत्र में संचार ब्लैकआउट के कारण स्वतंत्र सत्यापन सीमित है, और मृतकों व घायलों की वास्तविक संख्या अभी और सामने आने की संभावना है। अंतरराष्ट्रीय दबाव बढ़ने के साथ पाकिस्तान की शहबाज शरीफ सरकार पर कार्रवाई रोकने और बातचीत फिर शुरू करने का दबाव बनेगा।