27 जुलाई 2026
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पीओके में जेएएसी का रावलकोट-मुजफ्फराबाद लॉन्ग मार्च शुरू, बातचीत विफल; 40 से अधिक मौतों पर यूकेपीएनपी की चेतावनी

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पीओके में जेएएसी का रावलकोट-मुजफ्फराबाद लॉन्ग मार्च शुरू, बातचीत विफल; 40 से अधिक मौतों पर यूकेपीएनपी की चेतावनी

सारांश

पाकिस्तानी अधिकारियों से वार्ता बेनतीजा रहने के बाद जेएएसी ने रावलकोट से मुजफ्फराबाद तक लॉन्ग मार्च छेड़ दिया है। यूकेपीएनपी ने 5 जून से अब तक 40 से अधिक मौतों का दावा करते हुए सुरक्षा बलों की बड़ी तैनाती पर गहरी चिंता जताई और संयुक्त राष्ट्र समेत वैश्विक समुदाय से हस्तक्षेप की माँग की है।

मुख्य बातें

जेएएसी ने 27 जुलाई को रावलकोट से मुजफ्फराबाद तक लॉन्ग मार्च शुरू किया, पाकिस्तानी अधिकारियों से वार्ता विफल होने के बाद।
मार्च 26 जुलाई को मीरपुर डिवीजन से आरंभ हुआ; कारवाँ रावलकोट सिट-इन पर एकत्रित हुए।
यूकेपीएनपी ने रिपोर्टों के हवाले से दावा किया कि 5 जून से अब तक पीओके में 40 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है।
रेंजर्स, एफसी और पंजाब कॉन्स्टेबुलरी सहित पाकिस्तानी सुरक्षा बलों की मार्च से पहले बड़े पैमाने पर तैनाती की गई।
यूकेपीएनपी ने संयुक्त राष्ट्र, यूरोपीय संघ, अमेरिका, ब्रिटेन और रूस से सक्रिय हस्तक्षेप और शांतिपूर्ण समाधान की अपील की।

पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) में जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (जेएएसी) ने 27 जुलाई को रावलकोट से मुजफ्फराबाद तक लॉन्ग मार्च शुरू किया, जब पाकिस्तानी अधिकारियों के साथ वार्ता किसी सर्वमान्य नतीजे पर नहीं पहुँच सकी। इस बीच यूनाइटेड कश्मीर पीपुल्स नेशनल पार्टी (यूकेपीएनपी) ने सोमवार को पाकिस्तानी प्रशासन से अपील की कि वह शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर बल प्रयोग से बाज आए।

मार्च की शुरुआत और पृष्ठभूमि

जेएएसी ने शनिवार को अपनी सोशल मीडिया पोस्ट में घोषणा की थी कि लॉन्ग मार्च 26 जुलाई को मीरपुर डिवीजन से आरंभ होगा और कारवाँ रावलकोट सिट-इन पर एकत्रित होने के बाद 27 जुलाई को मुजफ्फराबाद की ओर बढ़ेंगे। यह मार्च तब आयोजित हुआ जब जेएएसी और पाकिस्तानी अधिकारियों के बीच चली वार्ता बेनतीजा रही, जिसके बाद संगठन ने जनता से फिर से लामबंद होने की अपील की।

यूकेपीएनपी की अपील और मौतों का दावा

यूकेपीएनपी ने उपलब्ध रिपोर्टों का हवाला देते हुए दावा किया कि पीओके में जारी अशांति के दौरान 5 जून से अब तक 40 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है। संगठन ने इन सभी मौतों और चोटों की तत्काल, निष्पक्ष और स्वतंत्र जाँच की माँग की। यूकेपीएनपी ने एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा, "हम अधिकारियों से अपील करते हैं कि वे अधिकतम संयम बरतें और शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के विरुद्ध बल का इस्तेमाल न करें। इंसानी जीवन की रक्षा और बुनियादी स्वतंत्रताओं की सुरक्षा हर देश की प्राथमिक जिम्मेदारी है।"

सुरक्षा बलों की तैनाती

रिपोर्टों के अनुसार, नियोजित मार्च से पूर्व ही रेंजर्स, फ्रंटियर कॉन्स्टेबुलरी (एफसी) और पंजाब कॉन्स्टेबुलरी (पीसी) सहित पाकिस्तानी सुरक्षा बलों की बड़े पैमाने पर तैनाती की गई। यूकेपीएनपी ने इस तैनाती पर चिंता जताते हुए दोहराया कि शांतिपूर्ण विरोध, सभा की स्वतंत्रता और अभिव्यक्ति की आज़ादी अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार कानून के तहत मान्यता प्राप्त मौलिक अधिकार हैं, जिनका सम्मान हर परिस्थिति में होना चाहिए।

अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील

यूकेपीएनपी ने संयुक्त राष्ट्र, यूरोपीय संघ, अमेरिका, ब्रिटेन, रूस और वृहत्तर अंतरराष्ट्रीय समुदाय से आग्रह किया कि वे नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने, सार्थक वार्ता को बढ़ावा देने और पीओके में बिगड़ती स्थिति के शांतिपूर्ण समाधान के प्रयासों को सक्रिय रूप से समर्थन दें। इसके अतिरिक्त, संगठन ने अंतरराष्ट्रीय मीडिया संस्थाओं और स्वतंत्र मानवाधिकार संगठनों से भी अनुरोध किया कि वे क्षेत्र में घटनाक्रम की स्वतंत्र निगरानी करें और कथित मानवाधिकार उल्लंघनों को दर्ज करें।

आगे की स्थिति

गौरतलब है कि पीओके में यह असंतोष लंबे समय से चली आ रही आर्थिक माँगों और प्रशासनिक शिकायतों की पृष्ठभूमि में उभरा है। वार्ता के विफल होने और सुरक्षा बलों की तैनाती के बीच क्षेत्र में तनाव और गहराने की आशंका है। अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षकों की प्रतिक्रिया और पाकिस्तानी प्रशासन का अगला कदम इस संकट की दिशा तय करेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

जिसे केवल बल से नहीं, बल्कि ठोस नीतिगत बदलाव से ही सुलझाया जा सकता है।
RashtraPress
27 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जेएएसी का लॉन्ग मार्च क्या है और यह क्यों शुरू हुआ?
जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (जेएएसी) ने 27 जुलाई को रावलकोट से मुजफ्फराबाद तक लॉन्ग मार्च निकाला, जब पाकिस्तानी अधिकारियों के साथ वार्ता किसी सर्वमान्य नतीजे पर नहीं पहुँची। मार्च 26 जुलाई को मीरपुर डिवीजन से शुरू हुआ और कारवाँ रावलकोट सिट-इन पर एकत्रित हुए।
पीओके में अब तक कितनी मौतें हुई हैं?
यूकेपीएनपी ने उपलब्ध रिपोर्टों का हवाला देते हुए दावा किया है कि 5 जून से अब तक पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में 40 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है। संगठन ने इन सभी मौतों की तत्काल और स्वतंत्र जाँच की माँग की है।
यूकेपीएनपी ने पाकिस्तानी अधिकारियों से क्या अपील की है?
यूकेपीएनपी ने पाकिस्तानी अधिकारियों से अधिकतम संयम बरतने और शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर बल प्रयोग न करने की अपील की है। संगठन ने यह भी कहा कि शांतिपूर्ण विरोध और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार कानून के तहत मौलिक अधिकार हैं।
पीओके में कौन-कौन से सुरक्षा बल तैनात किए गए हैं?
रिपोर्टों के अनुसार, मार्च से पहले रेंजर्स, फ्रंटियर कॉन्स्टेबुलरी (एफसी) और पंजाब कॉन्स्टेबुलरी (पीसी) सहित पाकिस्तानी सुरक्षा बलों की बड़े पैमाने पर तैनाती की गई। यूकेपीएनपी ने इस तैनाती पर गहरी चिंता व्यक्त की है।
यूकेपीएनपी ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से क्या माँग की है?
यूकेपीएनपी ने संयुक्त राष्ट्र, यूरोपीय संघ, अमेरिका, ब्रिटेन और रूस से अपील की है कि वे पीओके में नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करें, सार्थक वार्ता को बढ़ावा दें और शांतिपूर्ण समाधान के प्रयासों का सक्रिय समर्थन करें। संगठन ने अंतरराष्ट्रीय मीडिया और मानवाधिकार संस्थाओं से भी स्वतंत्र निगरानी की माँग की है।
राष्ट्र प्रेस
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