3 अगस्त 2026
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पीओके के रावलकोट में महिलाएं-बच्चे धरने पर, मुजफ्फराबाद मार्च की तैयारी; 50 से अधिक मौतों का दावा

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पीओके के रावलकोट में महिलाएं-बच्चे धरने पर, मुजफ्फराबाद मार्च की तैयारी; 50 से अधिक मौतों का दावा

सारांश

पीओके के रावलकोट में डी-चौक पर जन-सैलाब उमड़ा — महिलाएं और बच्चे सबसे आगे। जेएएसी ने 4 दिनों में 50 से अधिक मौतों और सैकड़ों घायलों का दावा किया है। मुजफ्फराबाद मार्च की तैयारी के बीच यूकेपीएनपी का प्रतिनिधिमंडल संयुक्त राष्ट्र तक पहुँचा।

मुख्य बातें

पीओके के रावलकोट में 2 अगस्त को डी-चौक पर बड़े पैमाने पर धरना, मुजफ्फराबाद मार्च की तैयारी।
जेएएसी के सदस्य सरदार उमर नजीर कश्मीरी ने पिछले 4 दिनों में 50 से अधिक मौतों और सैकड़ों घायलों का दावा किया — स्वतंत्र पुष्टि नहीं।
ड्रीक में 50 दिनों के धरने के बाद अब महिलाएं और बच्चे आंदोलन की अगुवाई कर रहे हैं।
कोटली में शांतिपूर्ण रैली पर पुलिस कार्रवाई और गोलीबारी के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल, सत्यापन लंबित।
यूकेपीएनपी के चेयरमैन सरदार शौकत अली कश्मीरी के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र अधिकारियों से मुलाकात कर कथित ज्यादतियों की जानकारी दी।

पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) के रावलकोट में 2 अगस्त को डी-चौक पर बड़ी संख्या में लोगों ने धरना दिया और मुजफ्फराबाद की ओर शांतिपूर्ण लंबे मार्च की तैयारी की। जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (जेएएसी) के अनुसार, सुरक्षा बलों की ओर से बीच-बीच में भारी गोलीबारी की जा रही है, हालांकि रावलकोट में अब तक किसी की मौत की पुष्टि नहीं हुई है।

मुख्य घटनाक्रम

प्रदर्शनकारियों ने नारे लगाए — 'आवाज दो हम एक हैं, कश्मीर के पहाड़ों में हम एक हैं।' जेएएसी ने बताया कि ड्रीक में — जहाँ पहले 50 दिनों तक धरना चला था — अब महिलाएं और बच्चे धरना जारी रखे हुए हैं। संगठन ने स्पष्ट किया कि यह आंदोलन तब तक नहीं रुकेगा जब तक उनकी मान्य मांगें स्वीकार नहीं की जातीं।

जेएएसी के एक बयान में कहा गया, 'कश्मीरी लोगों ने एकजुट होकर फैसला किया है कि वे किसी भी हाल में अपने शहीदों के खून के साथ विश्वासघात नहीं करेंगे।'

मौतों और घायलों का दावा

शनिवार को जेएएसी के सदस्य सरदार उमर नजीर कश्मीरी ने दावा किया कि पिछले चार दिनों में पाकिस्तानी बलों की कथित कड़ी कार्रवाई में 50 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है और सैकड़ों लोग घायल हुए हैं। उन्होंने एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा, 'पिछले चार दिनों में सुरक्षा बलों ने क्रूर कार्रवाई के जरिए हमारे 50 से ज्यादा लोगों को मार दिया है और सैकड़ों लोग घायल हुए हैं।' यह दावा स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं किया जा सका है।

गौरतलब है कि कोटली में एक शांतिपूर्ण रैली के दौरान पुलिस की कार्रवाई और गोलीबारी के बाद महिला प्रदर्शनकारियों के भागने के वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आए हैं। हालांकि इन वीडियो की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।

संयुक्त राष्ट्र में पीओके की दस्तक

यूनाइटेड कश्मीर पीपुल्स नेशनल पार्टी (यूकेपीएनपी) के चेयरमैन सरदार शौकत अली कश्मीरी के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में कई बैठकें कीं। इन बैठकों में प्रतिनिधिमंडल ने पीओके में पाकिस्तानी बलों की ओर से की गई कथित ज्यादतियों की जानकारी संयुक्त राष्ट्र अधिकारियों को दी।

प्रतिनिधिमंडल ने संयुक्त राष्ट्र, अंतरराष्ट्रीय समुदाय, विभिन्न सरकारों, मानवाधिकार संगठनों और लोकतांत्रिक संस्थाओं से अपील की कि वे क्षेत्र में जान-माल के नुकसान को रोकने और बुनियादी अधिकारों की रक्षा के लिए तत्काल कदम उठाएं।

आम जनता पर असर

यह ऐसे समय में आया है जब मुजफ्फराबाद क्षेत्र के कई इलाकों में देर रात तक विरोध प्रदर्शन जारी रहे। स्थानीय निवासी बुनियादी अधिकारों की सुरक्षा और स्थानीय प्रशासन द्वारा किए गए वादों को पूरा करने की मांग को लेकर सड़कों पर डटे रहे। आंदोलन की व्यापकता — जिसमें महिलाएं और बच्चे सबसे आगे हैं — इसे पीओके के हालिया इतिहास में एक असाधारण जन-प्रतिरोध के रूप में रेखांकित करती है।

क्या होगा आगे

जेएएसी के अनुसार, मुजफ्फराबाद की ओर लंबा मार्च किसी भी समय शुरू हो सकता है। संगठन ने स्पष्ट किया है कि जब तक आंदोलन की मांगें पूरी नहीं होतीं, धरना और मार्च जारी रहेंगे। अंतरराष्ट्रीय दबाव और संयुक्त राष्ट्र में उठाई गई आवाज़ के मद्देनजर, आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर वैश्विक ध्यान और बढ़ने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो यह किसी भी प्रशासन के लिए राजनीतिक संकट की घंटी है। जेएएसी के 50 से अधिक मौतों के दावे की स्वतंत्र पुष्टि न होना एक बड़ी सूचना-रिक्तता को उजागर करता है — पाकिस्तान ने इस क्षेत्र में मीडिया पहुँच पर जो पाबंदियाँ लगाई हैं, वे खुद एक कहानी हैं। संयुक्त राष्ट्र तक पहुँचने की कोशिश दर्शाती है कि आंतरिक रास्ते बंद माने जा रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय समुदाय की प्रतिक्रिया — या उसकी अनुपस्थिति — यह तय करेगी कि यह आंदोलन इतिहास में एक मील का पत्थर बनेगा या एक दबाई गई आवाज।
RashtraPress
3 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पीओके के रावलकोट में क्या हो रहा है?
रावलकोट के डी-चौक पर 2 अगस्त को बड़ी संख्या में लोगों ने धरना दिया और मुजफ्फराबाद की ओर शांतिपूर्ण लंबे मार्च की तैयारी की। जेएएसी के अनुसार सुरक्षा बल बीच-बीच में गोलीबारी कर रहे हैं, हालांकि रावलकोट में मौत की अभी तक पुष्टि नहीं हुई है।
जेएएसी कौन है और इसकी मांगें क्या हैं?
जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (जेएएसी) पीओके का एक नागरिक संगठन है जो बुनियादी अधिकारों की सुरक्षा और स्थानीय प्रशासन द्वारा किए गए वादों को पूरा करने की माँग कर रहा है। संगठन का कहना है कि जब तक ये मांगें नहीं मानी जातीं, आंदोलन जारी रहेगा।
पीओके में कितने लोगों की मौत का दावा किया गया है?
जेएएसी के सदस्य सरदार उमर नजीर कश्मीरी ने दावा किया है कि पिछले चार दिनों में पाकिस्तानी सुरक्षा बलों की कथित कार्रवाई में 50 से अधिक लोगों की मौत हुई और सैकड़ों घायल हुए हैं। यह दावा अभी तक स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं हुआ है।
यूकेपीएनपी ने संयुक्त राष्ट्र से क्यों मुलाकात की?
यूनाइटेड कश्मीर पीपुल्स नेशनल पार्टी (यूकेपीएनपी) के चेयरमैन सरदार शौकत अली कश्मीरी के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र अधिकारियों को पीओके में कथित मानवाधिकार उल्लंघनों की जानकारी दी। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से तत्काल हस्तक्षेप की अपील की।
ड्रीक में धरना कब से चल रहा है?
जेएएसी के अनुसार ड्रीक में 50 दिनों तक धरना चला था, और अब उसी स्थान पर महिलाएं और बच्चे आंदोलन जारी रखे हुए हैं। यह आंदोलन पीओके में बुनियादी अधिकारों और प्रशासनिक वादों को लेकर चल रहे व्यापक जन-असंतोष का हिस्सा है।
राष्ट्र प्रेस
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