पीओके के रावलकोट में महिलाएं-बच्चे धरने पर, मुजफ्फराबाद मार्च की तैयारी; 50 से अधिक मौतों का दावा
सारांश
मुख्य बातें
पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) के रावलकोट में 2 अगस्त को डी-चौक पर बड़ी संख्या में लोगों ने धरना दिया और मुजफ्फराबाद की ओर शांतिपूर्ण लंबे मार्च की तैयारी की। जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (जेएएसी) के अनुसार, सुरक्षा बलों की ओर से बीच-बीच में भारी गोलीबारी की जा रही है, हालांकि रावलकोट में अब तक किसी की मौत की पुष्टि नहीं हुई है।
मुख्य घटनाक्रम
प्रदर्शनकारियों ने नारे लगाए — 'आवाज दो हम एक हैं, कश्मीर के पहाड़ों में हम एक हैं।' जेएएसी ने बताया कि ड्रीक में — जहाँ पहले 50 दिनों तक धरना चला था — अब महिलाएं और बच्चे धरना जारी रखे हुए हैं। संगठन ने स्पष्ट किया कि यह आंदोलन तब तक नहीं रुकेगा जब तक उनकी मान्य मांगें स्वीकार नहीं की जातीं।
जेएएसी के एक बयान में कहा गया, 'कश्मीरी लोगों ने एकजुट होकर फैसला किया है कि वे किसी भी हाल में अपने शहीदों के खून के साथ विश्वासघात नहीं करेंगे।'
मौतों और घायलों का दावा
शनिवार को जेएएसी के सदस्य सरदार उमर नजीर कश्मीरी ने दावा किया कि पिछले चार दिनों में पाकिस्तानी बलों की कथित कड़ी कार्रवाई में 50 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है और सैकड़ों लोग घायल हुए हैं। उन्होंने एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा, 'पिछले चार दिनों में सुरक्षा बलों ने क्रूर कार्रवाई के जरिए हमारे 50 से ज्यादा लोगों को मार दिया है और सैकड़ों लोग घायल हुए हैं।' यह दावा स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं किया जा सका है।
गौरतलब है कि कोटली में एक शांतिपूर्ण रैली के दौरान पुलिस की कार्रवाई और गोलीबारी के बाद महिला प्रदर्शनकारियों के भागने के वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आए हैं। हालांकि इन वीडियो की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
संयुक्त राष्ट्र में पीओके की दस्तक
यूनाइटेड कश्मीर पीपुल्स नेशनल पार्टी (यूकेपीएनपी) के चेयरमैन सरदार शौकत अली कश्मीरी के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में कई बैठकें कीं। इन बैठकों में प्रतिनिधिमंडल ने पीओके में पाकिस्तानी बलों की ओर से की गई कथित ज्यादतियों की जानकारी संयुक्त राष्ट्र अधिकारियों को दी।
प्रतिनिधिमंडल ने संयुक्त राष्ट्र, अंतरराष्ट्रीय समुदाय, विभिन्न सरकारों, मानवाधिकार संगठनों और लोकतांत्रिक संस्थाओं से अपील की कि वे क्षेत्र में जान-माल के नुकसान को रोकने और बुनियादी अधिकारों की रक्षा के लिए तत्काल कदम उठाएं।
आम जनता पर असर
यह ऐसे समय में आया है जब मुजफ्फराबाद क्षेत्र के कई इलाकों में देर रात तक विरोध प्रदर्शन जारी रहे। स्थानीय निवासी बुनियादी अधिकारों की सुरक्षा और स्थानीय प्रशासन द्वारा किए गए वादों को पूरा करने की मांग को लेकर सड़कों पर डटे रहे। आंदोलन की व्यापकता — जिसमें महिलाएं और बच्चे सबसे आगे हैं — इसे पीओके के हालिया इतिहास में एक असाधारण जन-प्रतिरोध के रूप में रेखांकित करती है।
क्या होगा आगे
जेएएसी के अनुसार, मुजफ्फराबाद की ओर लंबा मार्च किसी भी समय शुरू हो सकता है। संगठन ने स्पष्ट किया है कि जब तक आंदोलन की मांगें पूरी नहीं होतीं, धरना और मार्च जारी रहेंगे। अंतरराष्ट्रीय दबाव और संयुक्त राष्ट्र में उठाई गई आवाज़ के मद्देनजर, आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर वैश्विक ध्यान और बढ़ने की संभावना है।