17 अगस्त 2026
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रावलकोट के शहीदों को पीओके की अवाम का सलाम, पाकिस्तानी हुकूमत के खिलाफ गुस्सा चरम पर

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रावलकोट के शहीदों को पीओके की अवाम का सलाम, पाकिस्तानी हुकूमत के खिलाफ गुस्सा चरम पर

सारांश

रावलकोट की गलियाँ शोक और आक्रोश में डूबी हैं — निहत्थों पर पाकिस्तानी बलों की कथित गोलीबारी के बाद स्मारकों पर लाल गुलाब, बंद दुकानें और 'इंकलाब आएगा' के नारे। मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का दावा है कि 100 से अधिक लोग मारे गए हैं, लेकिन इंटरनेट और मोबाइल बंदी के बीच सच्चाई दबाई जा रही है।

मुख्य बातें

पीओके के रावलकोट में पाकिस्तानी सुरक्षा बलों की कथित गोलीबारी में मानवाधिकार कार्यकर्ताओं के अनुसार 100 से अधिक लोगों की मौत का दावा।
शहर में इंटरनेट, मोबाइल सेवाएँ और कुछ इलाकों में बिजली काटी गई; खाद्य आपूर्ति भी बाधित।
जेएएसी (JAAC) ने अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों और मीडिया से पीओके की स्थिति पर निगरानी की अपील की।
बोखारा सहित पीओके के कई हिस्सों में गुरुवार को हजारों लोग रैलियों में शामिल हुए; महिलाओं और बच्चों ने भी मार्च किया।
विवाद की शुरुआत बिजली और जरूरी वस्तुओं की बढ़ती कीमतों से हुई, जो अब राजनीतिक सुधारों की माँग का आंदोलन बन चुका है।
स्थानीय निवासी नोमान (सिंगोला गाँव) सहित कई नागरिकों की मौत की गवाही स्थानीय लोगों ने दी।

पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) का शहर रावलकोट इन दिनों उन निहत्थे नागरिकों को श्रद्धांजलि दे रहा है, जो कथित तौर पर पाकिस्तानी सुरक्षा बलों की गोलीबारी में मारे गए। स्मारकों पर लाल गुलाब रखे जा रहे हैं, दुकानें बंद रखी जा रही हैं और गलियों में शोक का माहौल है। मानवाधिकार कार्यकर्ताओं के अनुसार, इस हिंसा में 100 से अधिक लोगों की जान जाने का दावा किया जा रहा है, हालाँकि पाकिस्तान सरकार द्वारा लगाई गई पाबंदियों के कारण सटीक आँकड़े सत्यापित नहीं हो पाए हैं।

मुख्य घटनाक्रम

ऑस्ट्रेलियन ब्रॉडकास्टिंग कॉर्पोरेशन (ABC) की एक रिपोर्ट के अनुसार, स्थानीय निवासी हाजी हसन अजीजी ने बताया कि उन्होंने लगभग तीन हफ्ते पहले सुरक्षाकर्मियों को बड़े हथियारों के साथ 'निहत्थे लोगों पर अंधाधुंध गोलियाँ चलाते' देखा था। हसन ने कहा, 'हमने शव उठाए; उन्हें एम्बुलेंस में रखा और कुछ को अपने कंधों पर। यह वही जगह है जहाँ एक लड़का शहीद हुआ था — उसका नाम नोमान था, जो सिंगोला गाँव का रहने वाला था।'

एक अन्य स्थानीय निवासी मुमताज खान ने बताया कि पुलिस ने पहले आँसू गैस छोड़ी, और फिर इतनी गोलियाँ चलाई गईं कि उनके घर की दीवारों में छेद हो गए। गोलीबारी के बाद से शहर का केंद्रीय बस अड्डा सैकड़ों प्रदर्शनकारियों से पटा पड़ा है।

सूचना और राहत पर पाबंदी

रिपोर्टों के अनुसार, इंटरनेट और मोबाइल सेवाएँ बंद कर दी गईं, जिससे स्थानीय पत्रकारों और विदेशी मीडिया के 'फिक्सर' तक जानकारी पहुँचाने में बाधा आई। कई घायलों को अस्पताल बंद होने के कारण घरों पर ही उपचार दिया गया। हसन ने बताया, 'जो भी इलाज कर सकते थे, हमने वो किया... हमने उनके जख्मों को अपने स्कार्फ से ढक दिया।' इसके अलावा, प्रशासन ने कुछ इलाकों में बिजली काट दी और खाने-पीने की डिलीवरी रोक दी।

जेएएसी की अपील और प्रदर्शन

विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व कर रही जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर वीडियो साझा करते हुए कहा, 'रावलकोट में सुरक्षा बलों की फायरिंग में दो लोग घायल हो गए। आम लोगों के खिलाफ बल का इस्तेमाल बहुत चिंताजनक है। हम हिंसा को तुरंत खत्म करने की माँग करते हैं और अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों व मीडिया से जमीनी हालात पर करीब से नजर रखने की अपील करते हैं।'

गुरुवार को पीओके के विभिन्न हिस्सों में अलग-अलग रैलियों में हजारों लोग जमा हुए। बोखारा में बड़ी संख्या में महिलाओं और बच्चों ने झंडे लेकर मार्च किया और 'इंकलाब आएगा' के नारे लगाए।

विवाद की जड़ें

यह टकराव मूलतः बिजली और जरूरी वस्तुओं की बढ़ती कीमतों को लेकर शुरू हुआ था। गौरतलब है कि धीरे-धीरे यह आंदोलन राजनीतिक सुधारों, अधिक जवाबदेही और प्रतिनिधि सरकार की माँग का रूप ले चुका है — जो इस्लामाबाद के साथ पीओके की जनता के गहरे असंतोष को दर्शाता है।

आगे क्या

पाकिस्तान सरकार ने अभी तक मृतकों की संख्या पर कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है। जेएएसी ने अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार समूहों से पीओके की स्थिति पर निगरानी बनाए रखने की अपील की है। विश्लेषकों का कहना है कि यदि सूचना प्रतिबंध जारी रहे तो वास्तविक क्षति का आकलन और कठिन होता जाएगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

जिसे इस्लामाबाद ने हमेशा सूचना-नाकेबंदी से ढकने की कोशिश की है। इंटरनेट शटडाउन, अस्पताल बंद करना और खाद्य आपूर्ति रोकना — ये उपाय केवल दमन नहीं, बल्कि साक्ष्य मिटाने की रणनीति के संकेत हैं। अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चुप्पी यह सवाल उठाती है कि क्या पाकिस्तान की परमाणु-शक्ति वाली स्थिति उसे मानवाधिकार जवाबदेही से परे रखती है। जब तक स्वतंत्र जाँच नहीं होती, मृतकों की वास्तविक संख्या और जिम्मेदारी — दोनों अनिश्चित बने रहेंगे।
RashtraPress
17 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

रावलकोट पीओके में क्या हुआ?
पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) के रावलकोट में पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने कथित तौर पर निहत्थे प्रदर्शनकारियों पर गोलियाँ चलाईं। मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का दावा है कि 100 से अधिक लोग मारे गए, हालाँकि पाकिस्तान सरकार की पाबंदियों के कारण सटीक संख्या की पुष्टि नहीं हो पाई है।
पीओके में विरोध प्रदर्शन क्यों शुरू हुआ?
यह आंदोलन बिजली और जरूरी वस्तुओं की बढ़ती कीमतों के खिलाफ शुरू हुआ था। बाद में यह राजनीतिक सुधारों, अधिक जवाबदेही और प्रतिनिधि सरकार की माँग करने वाले व्यापक आंदोलन में बदल गया।
जेएएसी (JAAC) कौन है और इसने क्या माँग की है?
जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) पीओके में विरोध प्रदर्शनों का नेतृत्व कर रही संस्था है। इसने अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों और मीडिया से पीओके की जमीनी स्थिति पर करीब से नजर रखने और हिंसा तुरंत बंद कराने की अपील की है।
पाकिस्तान सरकार ने रावलकोट में क्या पाबंदियाँ लगाई हैं?
रिपोर्टों के अनुसार इंटरनेट और मोबाइल सेवाएँ बंद कर दी गईं, कुछ इलाकों में बिजली काटी गई और खाद्य सामग्री की डिलीवरी रोकी गई। अस्पताल भी बंद बताए गए, जिससे घायलों को घरों पर ही उपचार लेना पड़ा।
क्या रावलकोट की घटनाओं की अंतरराष्ट्रीय कवरेज हुई है?
ऑस्ट्रेलियन ब्रॉडकास्टिंग कॉर्पोरेशन (ABC) ने रावलकोट पहुँचकर स्थानीय गवाहों के बयान दर्ज किए। हालाँकि सूचना-नाकेबंदी के कारण विदेशी मीडिया के स्थानीय पत्रकारों (फिक्सर) को भी जानकारी जुटाने में बाधा आई।
राष्ट्र प्रेस
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