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पीओजेके में पाकिस्तानी सेना की गोलीबारी में 30 से अधिक की मौत, फारूक वानी बोले — 'हदें पार हो गईं'

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पीओजेके में पाकिस्तानी सेना की गोलीबारी में 30 से अधिक की मौत, फारूक वानी बोले — 'हदें पार हो गईं'

सारांश

पीओजेके में पाकिस्तानी सुरक्षा बलों की कथित गोलीबारी ने 30 से अधिक लोगों की जान ली और 200 से अधिक घायल हुए। श्रीनगर में राजनीतिक विश्लेषक फारूक वानी ने इसे मानवीय संकट बताया और कहा कि पाकिस्तान को यह इलाका देर-सवेर खाली करना ही होगा।

मुख्य बातें

पीओजेके में हालिया प्रदर्शनों के दौरान पाकिस्तानी बलों की कथित गोलीबारी में 30 से अधिक लोगों की मौत और 200 से अधिक घायल ।
राजनीतिक विश्लेषक फारूक वानी ने इसे 'मानवाधिकारों का खुला उल्लंघन' बताया; कहा — पाकिस्तान को पीओजेके छोड़ना होगा।
प्रदर्शनकारी बुनियादी अधिकार और आर्थिक राहत की माँग कर रहे थे।
नेशनल कॉन्फ्रेंस के प्रांतीय सचिव शफकत मीर ने निहत्थे नागरिकों पर हिंसा को 'किसी भी परिस्थिति में अनुचित' बताया।
वानी ने ऑपरेशन सिंदूर का उल्लेख करते हुए कहा कि पाकिस्तान को यह भूभाग अंततः खाली करना ही होगा।

पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू और कश्मीर (पीओजेके) में हालिया विरोध-प्रदर्शनों के दौरान पाकिस्तानी सुरक्षा बलों की कथित अंधाधुंध गोलीबारी में 30 से अधिक लोगों की जान चली गई और 200 से अधिक लोग घायल हो गए। श्रीनगर में राजनीतिक विश्लेषक फारूक वानी ने इस घटनाक्रम को 'बेहद दुखद और चिंताजनक' करार देते हुए कहा कि प्रदर्शनकारी केवल अपने बुनियादी अधिकार और आर्थिक राहत माँग रहे थे।

मुख्य घटनाक्रम

वानी के अनुसार, पाकिस्तान की सुरक्षा एजेंसियों ने शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर बल प्रयोग किया, जो उनके अनुसार मानवाधिकारों का खुला उल्लंघन है। उन्होंने कहा, 'बॉर्डर के उस पार का इलाका, जिसे हम हमारा क्षेत्र मानते हैं, वहाँ हालात बेहद खराब हैं।' प्रारंभिक रिपोर्टों में 20 से अधिक मौतों की बात थी, किंतु वानी ने बाद में यह संख्या 30 से अधिक बताई।

गौरतलब है कि पीओजेके में विरोध-प्रदर्शन नई घटना नहीं है — यह क्षेत्र लंबे समय से आर्थिक उपेक्षा, बिजली संकट और प्रशासनिक दमन के विरुद्ध आवाज उठाता रहा है। इस बार की हिंसा उन प्रदर्शनों की सबसे घातक कड़ी बताई जा रही है।

फारूक वानी का बयान

वानी ने कहा, 'जब से पाकिस्तान बना है, तब से आर्मी ने पीओजेके में हमेशा अपना दबदबा बनाए रखा है। लेकिन आज उन्होंने हमारे ही लोगों को मारकर और घायल करके सारी हदें पार कर दीं, जबकि वे सिर्फ अपना हक माँग रहे थे।' उन्होंने जोर देकर कहा कि पीओजेके एक 'कब्जा किया हुआ इलाका' है और पाकिस्तान को 'देर-सवेर इसे छोड़ना ही होगा।'

वानी ने 'ऑपरेशन सिंदूर' का उल्लेख करते हुए कहा कि उस समय भी इस क्षेत्र पर असर पड़ा था और अंततः पाकिस्तान को यह भूभाग खाली करना ही होगा। उन्होंने कहा कि वहाँ के लोग भारत की संस्कृति, परंपराओं और विरासत से गहरे जुड़े हुए हैं।

नेशनल कॉन्फ्रेंस की प्रतिक्रिया

नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) के प्रांतीय सचिव शफकत मीर ने भी इस घटना पर गहरी चिंता और दुख व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि निहत्थे नागरिकों पर हिंसा किसी भी परिस्थिति में न्यायसंगत नहीं ठहराई जा सकती। मीर ने इसे 'मानवाधिकारों का गंभीर उल्लंघन' बताते हुए कहा कि किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में नागरिकों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।

मीर ने भारत और पाकिस्तान के प्रशासनिक दृष्टिकोण की तुलना करते हुए कहा कि भारतीय सुरक्षा बल आमतौर पर संकट की स्थिति में नागरिकों की सहायता के लिए आगे आते हैं, जबकि पीओजेके में स्थिति इसके ठीक विपरीत दिखती है। उन्होंने संबंधित अधिकारियों से नागरिक सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील की।

मानवीय संकट और आगे की राह

वानी ने स्पष्ट किया कि पीओजेके में स्थिति केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि एक गंभीर मानवीय संकट है। उन्होंने नई दिल्ली और श्रीनगर दोनों स्तरों पर इस मुद्दे को उठाने का उल्लेख किया। यह ऐसे समय में आया है जब भारत-पाकिस्तान संबंध पहले से ही तनावपूर्ण हैं और अंतरराष्ट्रीय समुदाय की निगाहें इस क्षेत्र पर टिकी हैं। विश्लेषकों का मानना है कि इस हिंसा से पीओजेके के लोगों में असंतोष और गहरा होगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

जिसे अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अपेक्षित ध्यान नहीं मिला। फारूक वानी का बयान भावनात्मक होने के साथ-साथ एक बड़े भू-राजनीतिक सच को भी उजागर करता है — पीओजेके की जनता का असंतोष अब उस बिंदु पर है जहाँ दमन और प्रतिरोध का चक्र टूटना मुश्किल होता जा रहा है। मुख्यधारा की कवरेज अक्सर मौतों की संख्या पर रुक जाती है, लेकिन असली सवाल यह है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस पर चुप्पी क्यों साधे रहता है। जब तक पीओजेके के हालात पर वैश्विक दबाव नहीं बनता, तब तक ऐसी घटनाएँ दोहराती रहेंगी।
RashtraPress
28 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पीओजेके में हाल की गोलीबारी में कितने लोग मारे गए?
राजनीतिक विश्लेषक फारूक वानी के अनुसार, पीओजेके में हालिया विरोध-प्रदर्शनों के दौरान पाकिस्तानी सुरक्षा बलों की कथित गोलीबारी में 30 से अधिक लोगों की मौत हुई और 200 से अधिक घायल हुए।
पीओजेके में प्रदर्शनकारी किस बात की माँग कर रहे थे?
वानी के अनुसार, प्रदर्शनकारी अपने बुनियादी अधिकारों और आर्थिक राहत की माँग कर रहे थे। पीओजेके लंबे समय से आर्थिक उपेक्षा और प्रशासनिक दमन का सामना करता रहा है।
फारूक वानी ने पीओजेके पर क्या कहा?
वानी ने कहा कि पाकिस्तान की सेना ने पीओजेके में हमेशा दबदबा बनाए रखा है और इस बार निहत्थे प्रदर्शनकारियों पर गोलीबारी करके 'सारी हदें पार कर दीं।' उन्होंने यह भी कहा कि पाकिस्तान को देर-सवेर यह इलाका खाली करना ही होगा।
नेशनल कॉन्फ्रेंस ने पीओजेके हिंसा पर क्या रुख अपनाया?
नेशनल कॉन्फ्रेंस के प्रांतीय सचिव शफकत मीर ने इसे 'मानवाधिकारों का गंभीर उल्लंघन' बताया और कहा कि निहत्थे नागरिकों पर हिंसा किसी भी परिस्थिति में उचित नहीं है। उन्होंने संबंधित अधिकारियों से नागरिक सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील की।
पीओजेके का भारत से क्या ऐतिहासिक संबंध है?
वानी के अनुसार, पीओजेके के लोग भारत के साथ सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और पारंपरिक रूप से जुड़े हुए हैं। भारत इस क्षेत्र को अपना अभिन्न अंग मानता है और पाकिस्तान पर इसे 'जबरदस्ती कब्जाए रखने' का आरोप लगाता रहा है।
राष्ट्र प्रेस
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