16 जुलाई 2026
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पीओके में छठे हफ्ते भी हिंसा जारी, मृतकों की संख्या 12 हुई; अंतरराष्ट्रीय जांच की मांग तेज

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पीओके में छठे हफ्ते भी हिंसा जारी, मृतकों की संख्या 12 हुई; अंतरराष्ट्रीय जांच की मांग तेज

सारांश

पीओके में छह हफ्तों से जल रही बगावत की आग अब 12 मौतों तक पहुँच चुकी है। रावलाकोट में हजारों लोग सड़कों पर हैं, 4,000 रेंजर्स तैनात हैं और मीडिया पर ताला है — फिर भी जेएएसी नेताओं का कहना है कि यह लड़ाई जीत तक जारी रहेगी।

मुख्य बातें

पीओके में 15 जुलाई को हुई झड़पों के बाद मृतकों की कुल संख्या बढ़कर 12 हो गई है, जिनमें 2 सुरक्षाकर्मी भी शामिल हैं।
यह आंदोलन लगातार छठे हफ्ते में है; रावलाकोट में 4,000 से अधिक रेंजर्स तैनात, मीडिया पर पाबंदी।
जेएएसी नेता सरदार अम्मान खान ने पीओके को 'कब्जे वाला क्षेत्र' बताया और आंदोलन जारी रखने की घोषणा की।
पीपीपी अध्यक्ष बिलावल भुट्टो जरदारी ने हालात को 'बेहद चिंताजनक' बताते हुए जनरल असीम मुनीर और शहबाज शरीफ की भूमिका पर सवाल उठाए।
यूकेपीएनपी ने नागरिकों पर बल प्रयोग की निंदा करते हुए संचार पाबंदियाँ हटाने और मानवीय सहायता सुनिश्चित करने की माँग की।

पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में 15 जुलाई को रावलाकोट में स्थानीय प्रदर्शनकारियों और पाकिस्तानी सुरक्षा बलों के बीच भीषण झड़पें हुईं, जिनमें मृतकों की कुल संख्या बढ़कर 12 हो गई है। यह आंदोलन अब लगातार छठे हफ्ते में प्रवेश कर चुका है और इस्लामाबाद के खिलाफ जन-आक्रोश थमने का नाम नहीं ले रहा।

मुख्य घटनाक्रम

रिपोर्टों के अनुसार, रावलाकोट में बढ़ते सरकार-विरोधी प्रदर्शनों के दौरान पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने भीड़ पर गोलीबारी की, जिसमें कई आम नागरिकों की जान गई। पाकिस्तान के प्रमुख अखबार डॉन के अनुसार, मंगलवार की अलग-अलग झड़पों में कम से कम दो सुरक्षाकर्मी भी मारे गए। इलाके में 4,000 से अधिक रेंजर्स तैनात किए गए हैं और मीडिया की पहुँच पर भी पाबंदी लगाई गई है।

गौरतलब है कि यह वही क्षेत्र है जहाँ दशकों से बिजली, आटे और ईंधन की कीमतों को लेकर असंतोष सुलगता रहा है — और अब यह आंदोलन राजनीतिक स्वायत्तता की माँग में तब्दील हो चुका है।

नेताओं के बयान और आरोप

जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (जेएएसी) के नेता सरदार अम्मान खान ने रावलाकोट की विशाल रैली में पाकिस्तान पर पीओके पर 'जबरन कब्जा' करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, "यह जबरन कब्जा किया गया इलाका है।" उन्होंने स्पष्ट किया कि इस क्षेत्र को 'विवादित' नहीं, बल्कि 'कब्जे वाला क्षेत्र' कहा जाना चाहिए। उन्होंने यह भी ऐलान किया कि यह आंदोलन जीत मिलने तक — चाहे जान भी देनी पड़े — नहीं रुकेगा।

पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) के अध्यक्ष बिलावल भुट्टो जरदारी ने पिछले महीने से जारी हालात को 'बेहद चिंताजनक' बताया और सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर तथा प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की भूमिका पर सवाल उठाए।

यूकेपीएनपी की कड़ी निंदा और माँगें

यूनाइटेड कश्मीर पीपुल्स नेशनल पार्टी (यूकेपीएनपी) ने पाकिस्तानी सुरक्षा बलों द्वारा आम नागरिकों की कथित हत्याओं की कड़ी निंदा की। पार्टी ने पाकिस्तान सरकार से माँग की कि शांतिपूर्ण नागरिकों के खिलाफ अत्यधिक बल का इस्तेमाल तत्काल बंद किया जाए, गैरकानूनी हत्याएँ, मनमानी गिरफ्तारियाँ और जबरन गुमशुदगियाँ रोकी जाएँ।

यूकेपीएनपी ने यह भी माँग की कि लोगों तक खाद्य सामग्री, दवाइयाँ और मानवीय सहायता बिना रुकावट पहुँचने दी जाए, संचार पाबंदियाँ हटाई जाएँ और आवाजाही की स्वतंत्रता सुनिश्चित की जाए।

अंतरराष्ट्रीय दबाव और मीडिया पर रोक

यह ऐसे समय में आया है जब पीओके में मीडिया की पहुँच पूरी तरह प्रतिबंधित है, जिससे स्वतंत्र सत्यापन संभव नहीं हो पा रहा। प्रदर्शनकारी और विपक्षी नेता अंतरराष्ट्रीय जाँच की माँग कर रहे हैं। आलोचकों का कहना है कि मीडिया ब्लैकआउट और बड़े पैमाने पर सुरक्षा बल तैनाती मिलकर एक ऐसी स्थिति बना रहे हैं जहाँ जवाबदेही लगभग असंभव हो जाती है।

आगे क्या होगा

जेएएसी नेताओं ने स्पष्ट किया है कि जब तक उनकी माँगें पूरी नहीं होतीं, आंदोलन जारी रहेगा। अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों की नज़र इस क्षेत्र पर टिकी है, और कथित तौर पर कई देशों ने पाकिस्तान से संयम बरतने की अपील की है। स्थिति की संवेदनशीलता को देखते हुए आने वाले दिनों में कूटनीतिक दबाव और बढ़ने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

क्योंकि यह वही भाषा है जो भारत दशकों से इस्तेमाल करता रहा है। मीडिया ब्लैकआउट और 4,000 रेंजर्स की तैनाती बताती है कि पाकिस्तानी सेना इसे कानून-व्यवस्था नहीं, बल्कि अस्तित्व की लड़ाई मान रही है। बिलावल जैसे गठबंधन सहयोगियों का मुखर होना संकेत देता है कि इस्लामाबाद के भीतर भी दरारें गहरी हो रही हैं।
RashtraPress
16 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पीओके में मृतकों की संख्या 12 कैसे पहुँची?
15 जुलाई को रावलाकोट में पाकिस्तानी सुरक्षा बलों और प्रदर्शनकारियों के बीच हुई झड़पों में कई नागरिकों की मौत हुई, जिससे कुल मृतक संख्या 12 हो गई। डॉन अखबार के अनुसार इनमें कम से कम दो सुरक्षाकर्मी भी शामिल हैं।
पीओके में यह आंदोलन क्यों शुरू हुआ?
यह आंदोलन शुरुआत में बिजली, आटे और ईंधन की बढ़ती कीमतों के खिलाफ था, लेकिन अब यह राजनीतिक स्वायत्तता और पाकिस्तानी प्रशासन के विरोध में बदल चुका है। जेएएसी नेताओं ने इसे 'कब्जे के खिलाफ लड़ाई' करार दिया है।
जेएएसी क्या है और इसकी माँगें क्या हैं?
जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (जेएएसी) पीओके का प्रमुख विरोधी संगठन है जो इस आंदोलन का नेतृत्व कर रहा है। इसकी माँगें हैं — पाकिस्तानी सुरक्षा बलों की वापसी, मीडिया पाबंदियाँ हटाना और क्षेत्र की स्वायत्तता की बहाली।
पाकिस्तान के राजनीतिक नेताओं ने इस पर क्या कहा?
पीपीपी अध्यक्ष बिलावल भुट्टो जरदारी ने हालात को 'बेहद चिंताजनक' बताया और सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर तथा प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की भूमिका पर सवाल उठाए। यह एक गठबंधन सहयोगी का सरकार के खिलाफ दुर्लभ सार्वजनिक बयान है।
अंतरराष्ट्रीय जांच की माँग क्यों उठ रही है?
मीडिया पर पाबंदी और संचार सेवाओं के बंद होने के कारण पीओके में स्वतंत्र सत्यापन संभव नहीं है। यूकेपीएनपी सहित कई संगठनों ने कथित नागरिक हत्याओं की अंतरराष्ट्रीय जांच की माँग की है ताकि जवाबदेही सुनिश्चित हो सके।
राष्ट्र प्रेस
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