15 जुलाई 2026
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पीओके में 36 दिन बाद भी विरोध जारी, जेएएसी नेता ने इस्लामाबाद के 'फर्जी दावों' को नकारा

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पीओके में 36 दिन बाद भी विरोध जारी, जेएएसी नेता ने इस्लामाबाद के 'फर्जी दावों' को नकारा

सारांश

पीओके में 36 दिनों से जारी आंदोलन अब सीधे इस्लामाबाद के 'कब्ज़े के दावे' को चुनौती दे रहा है। रावलाकोट में जेएएसी नेता ने पाकिस्तान को 'कब्ज़ाधारी' कहा, जबकि कथित गोलीबारी में 7 नागरिकों की मौत पर यूकेपीएनपी ने संयुक्त राष्ट्र से जाँच की माँग की।

मुख्य बातें

पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) में विरोध प्रदर्शन 15 जुलाई को लगातार 36वें दिन भी जारी रहा।
जेएएसी नेता सरदार अम्मान खान ने रावलाकोट में हज़ारों की सभा को संबोधित करते हुए पीओके को 'कब्ज़े वाला क्षेत्र' बताया और इस्लामाबाद के 'फर्जी दावों' को खारिज किया।
डॉन की रिपोर्ट के अनुसार, सुरक्षाबलों और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प में कथित तौर पर 7 नागरिकों की मौत हुई।
यूकेपीएनपी ने कथित हत्याओं, जबरन गायब किए जाने और मनमानी गिरफ्तारियों की स्वतंत्र अंतरराष्ट्रीय जाँच की माँग की।
पार्टी ने संयुक्त राष्ट्र , यूरोपीय संघ , ब्रिटेन और अमेरिका से स्वतंत्र फैक्ट-फाइंडिंग मिशन भेजने की अपील की।
क्षेत्र में सख्त नाकेबंदी, कर्फ्यू और संचार प्रतिबंध जारी रहने की बात कही जा रही है।

पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) में जन-आक्रोश लगातार 36वें दिन भी थमने का नाम नहीं ले रहा। 15 जुलाई को रावलाकोट में हज़ारों की तादाद में उमड़े प्रदर्शनकारियों के बीच जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (जेएएसी) के नेता सरदार अम्मान खान ने पाकिस्तान पर क्षेत्र पर 'जबरन कब्ज़ा' करने का आरोप लगाया और इस्लामाबाद के दशकों पुराने 'फर्जी दावों' को सिरे से खारिज कर दिया। यह आंदोलन इस्लामाबाद के नियंत्रण को अब तक की सबसे सीधी चुनौती के रूप में देखा जा रहा है।

मुख्य घटनाक्रम

रावलाकोट में आयोजित विशाल जनसभा में सरदार अम्मान खान ने स्पष्ट शब्दों में कहा, 'यह कोई विवादित क्षेत्र नहीं है; यह एक कब्ज़े वाला क्षेत्र है। इस पर जबरन कब्ज़ा किया गया है।' उन्होंने ऐलान किया कि यह आंदोलन 'जीत' हासिल होने तक जारी रहेगा, और प्रदर्शनकारी अपने अधिकारों के लिए जान देने से भी नहीं चूकेंगे। सभा में पाकिस्तान सरकार और प्रशासन के विरुद्ध ज़ोरदार नारेबाज़ी हुई।

कथित हिंसा और मौतें

अंग्रेज़ी दैनिक डॉन की रिपोर्ट के अनुसार, रावलाकोट में सुरक्षाबलों और प्रदर्शनकारियों के बीच हुई झड़पों के दौरान गोलीबारी में सात और नागरिकों की कथित मौत हुई। इस पर यूनाइटेड कश्मीर पीपुल्स नेशनल पार्टी (यूकेपीएनपी) ने कड़ी निंदा करते हुए स्वतंत्र अंतरराष्ट्रीय जाँच की माँग की। पार्टी ने कथित जबरन गायब किए जाने, मनमानी गिरफ्तारियों और नागरिकों पर लगाए गए प्रतिबंधों को भी उजागर किया।

यूकेपीएनपी की माँगें

यूकेपीएनपी ने पाकिस्तान सरकार से शांतिपूर्ण नागरिकों के विरुद्ध घातक बल प्रयोग तत्काल बंद करने, सभी हिरासत में लिए गए लोगों को सक्षम अदालतों के सामने पेश करने तथा खाद्य सामग्री, दवाओं और स्वास्थ्य सेवाओं तक निर्बाध पहुँच बहाल करने की अपील की। पार्टी ने संचार प्रतिबंध हटाने और आवाजाही की स्वतंत्रता सुनिश्चित करने की भी माँग रखी।

अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील

यूकेपीएनपी ने संयुक्त राष्ट्र, यूरोपीय संघ, ब्रिटेन और अमेरिका से पीओके में एक स्वतंत्र फैक्ट-फाइंडिंग मिशन भेजने, कथित मानवाधिकार उल्लंघनों की निष्पक्ष जाँच कराने और जमीनी स्थिति की निगरानी करने का आग्रह किया। गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब क्षेत्र में सख्त नाकेबंदी, कर्फ्यू और संचार प्रतिबंध जारी रहने की बात कही जा रही है।

आगे क्या

जेएएसी नेताओं के अनुसार आंदोलन तब तक जारी रहेगा जब तक माँगें पूरी नहीं होतीं। पीओके में जारी ये विरोध प्रदर्शन इस्लामाबाद के दशकों पुराने नियंत्रण को अब तक की सबसे संगठित चुनौती के रूप में देखे जा रहे हैं, और अंतरराष्ट्रीय दबाव बढ़ने की स्थिति में पाकिस्तान के लिए कूटनीतिक मुश्किलें और गहरी हो सकती हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो पाकिस्तान के लिए कूटनीतिक मोर्चे पर दबाव और बढ़ सकता है — ऐसे में मुख्यधारा की कवरेज जो इसे केवल 'आंतरिक विरोध' तक सीमित करती है, वह इस आंदोलन की व्यापक भू-राजनीतिक परतों को नज़रअंदाज़ कर रही है।
RashtraPress
15 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पीओके में चल रहा विरोध प्रदर्शन क्या है?
पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) में जनता पाकिस्तान सरकार और प्रशासन के खिलाफ 36 दिनों से लगातार प्रदर्शन कर रही है। जेएएसी के नेतृत्व में यह आंदोलन नागरिक अधिकारों, स्वायत्तता और कथित दमन के विरुद्ध है।
सरदार अम्मान खान ने इस्लामाबाद पर क्या आरोप लगाए?
जेएएसी नेता सरदार अम्मान खान ने पाकिस्तान पर पीओके पर 'जबरन कब्ज़ा' करने का आरोप लगाया और इसे 'विवादित' नहीं बल्कि 'कब्ज़े वाला क्षेत्र' बताया। उन्होंने इस्लामाबाद के दशकों पुराने दावों को 'फर्जी नैरेटिव' कहकर खारिज किया।
रावलाकोट में कथित गोलीबारी में कितने लोगों की मौत हुई?
डॉन की रिपोर्ट के अनुसार, रावलाकोट में सुरक्षाबलों और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प के दौरान कथित तौर पर 7 नागरिकों की मौत हुई। यूकेपीएनपी ने इन मौतों की स्वतंत्र अंतरराष्ट्रीय जाँच की माँग की है।
यूकेपीएनपी ने क्या माँगें रखी हैं?
यूकेपीएनपी ने पाकिस्तान से नागरिकों पर घातक बल प्रयोग तत्काल बंद करने, हिरासत में लिए गए लोगों को अदालत में पेश करने और खाद्य, दवा व स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुँच बहाल करने की माँग की है। साथ ही संचार प्रतिबंध हटाने और आवाजाही की स्वतंत्रता सुनिश्चित करने की भी अपील की गई है।
क्या अंतरराष्ट्रीय समुदाय से कोई हस्तक्षेप की माँग की गई है?
हाँ, यूकेपीएनपी ने संयुक्त राष्ट्र, यूरोपीय संघ, ब्रिटेन और अमेरिका से पीओके में स्वतंत्र फैक्ट-फाइंडिंग मिशन भेजने और कथित मानवाधिकार उल्लंघनों की निष्पक्ष जाँच कराने की अपील की है। अभी तक किसी अंतरराष्ट्रीय संस्था की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
राष्ट्र प्रेस
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