पीओके में 36 दिन बाद भी विरोध जारी, जेएएसी नेता ने इस्लामाबाद के 'फर्जी दावों' को नकारा
सारांश
मुख्य बातें
पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) में जन-आक्रोश लगातार 36वें दिन भी थमने का नाम नहीं ले रहा। 15 जुलाई को रावलाकोट में हज़ारों की तादाद में उमड़े प्रदर्शनकारियों के बीच जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (जेएएसी) के नेता सरदार अम्मान खान ने पाकिस्तान पर क्षेत्र पर 'जबरन कब्ज़ा' करने का आरोप लगाया और इस्लामाबाद के दशकों पुराने 'फर्जी दावों' को सिरे से खारिज कर दिया। यह आंदोलन इस्लामाबाद के नियंत्रण को अब तक की सबसे सीधी चुनौती के रूप में देखा जा रहा है।
मुख्य घटनाक्रम
रावलाकोट में आयोजित विशाल जनसभा में सरदार अम्मान खान ने स्पष्ट शब्दों में कहा, 'यह कोई विवादित क्षेत्र नहीं है; यह एक कब्ज़े वाला क्षेत्र है। इस पर जबरन कब्ज़ा किया गया है।' उन्होंने ऐलान किया कि यह आंदोलन 'जीत' हासिल होने तक जारी रहेगा, और प्रदर्शनकारी अपने अधिकारों के लिए जान देने से भी नहीं चूकेंगे। सभा में पाकिस्तान सरकार और प्रशासन के विरुद्ध ज़ोरदार नारेबाज़ी हुई।
कथित हिंसा और मौतें
अंग्रेज़ी दैनिक डॉन की रिपोर्ट के अनुसार, रावलाकोट में सुरक्षाबलों और प्रदर्शनकारियों के बीच हुई झड़पों के दौरान गोलीबारी में सात और नागरिकों की कथित मौत हुई। इस पर यूनाइटेड कश्मीर पीपुल्स नेशनल पार्टी (यूकेपीएनपी) ने कड़ी निंदा करते हुए स्वतंत्र अंतरराष्ट्रीय जाँच की माँग की। पार्टी ने कथित जबरन गायब किए जाने, मनमानी गिरफ्तारियों और नागरिकों पर लगाए गए प्रतिबंधों को भी उजागर किया।
यूकेपीएनपी की माँगें
यूकेपीएनपी ने पाकिस्तान सरकार से शांतिपूर्ण नागरिकों के विरुद्ध घातक बल प्रयोग तत्काल बंद करने, सभी हिरासत में लिए गए लोगों को सक्षम अदालतों के सामने पेश करने तथा खाद्य सामग्री, दवाओं और स्वास्थ्य सेवाओं तक निर्बाध पहुँच बहाल करने की अपील की। पार्टी ने संचार प्रतिबंध हटाने और आवाजाही की स्वतंत्रता सुनिश्चित करने की भी माँग रखी।
अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील
यूकेपीएनपी ने संयुक्त राष्ट्र, यूरोपीय संघ, ब्रिटेन और अमेरिका से पीओके में एक स्वतंत्र फैक्ट-फाइंडिंग मिशन भेजने, कथित मानवाधिकार उल्लंघनों की निष्पक्ष जाँच कराने और जमीनी स्थिति की निगरानी करने का आग्रह किया। गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब क्षेत्र में सख्त नाकेबंदी, कर्फ्यू और संचार प्रतिबंध जारी रहने की बात कही जा रही है।
आगे क्या
जेएएसी नेताओं के अनुसार आंदोलन तब तक जारी रहेगा जब तक माँगें पूरी नहीं होतीं। पीओके में जारी ये विरोध प्रदर्शन इस्लामाबाद के दशकों पुराने नियंत्रण को अब तक की सबसे संगठित चुनौती के रूप में देखे जा रहे हैं, और अंतरराष्ट्रीय दबाव बढ़ने की स्थिति में पाकिस्तान के लिए कूटनीतिक मुश्किलें और गहरी हो सकती हैं।