15 जुलाई 2026
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पीओके में जेएएसी नेतृत्व को खत्म करने की साजिश, खुफिया रिपोर्ट में पाकिस्तानी सेना पर गंभीर आरोप

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पीओके में जेएएसी नेतृत्व को खत्म करने की साजिश, खुफिया रिपोर्ट में पाकिस्तानी सेना पर गंभीर आरोप

सारांश

पीओके में जेएएसी का आंदोलन अब सिर्फ महंगाई और भेदभाव का विरोध नहीं — एक खुफिया रिपोर्ट में दावा है कि पाकिस्तानी सेना नेतृत्व को ही खत्म करने की योजना बना रही है। मुजफ्फराबाद मार्च और सुरक्षा बलों की नाकेबंदी के बीच यह टकराव गंभीर मोड़ पर पहुँच गया है।

मुख्य बातें

खुफिया रिपोर्ट में दावा — पाकिस्तानी सत्ता प्रतिष्ठान जेएएसी के शीर्ष नेतृत्व को निशाना बनाकर आंदोलन समाप्त करने की योजना बना रहा है।
फील्ड मार्शल असीम मुनीर पर आरोप — सुरक्षा बलों के साथ बैठकों में आंदोलन को बलपूर्वक दबाने के निर्देश देने का दावा।
जेएएसी ने पीछे हटने से इनकार किया; नेताओं ने कहा — नेतृत्व मारा जाए तो भी जनता का आंदोलन जारी रहे।
बुधवार को मुजफ्फराबाद मार्च की घोषणा; महिलाएँ और बच्चे भी शामिल होने की संभावना।
पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने नाकेबंदी की, नाकेबंदी तोड़ने पर कड़ी कार्रवाई की चेतावनी।
भारत के विदेश मंत्रालय ने पीओके में इंटरनेट प्रतिबंध, आपूर्ति बाधा और बल प्रयोग पर चिंता जताई।

पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (जेएएसी) के नेतृत्व में जारी विरोध प्रदर्शनों के बीच एक खुफिया रिपोर्ट में दावा किया गया है कि पाकिस्तानी सत्ता प्रतिष्ठान, जेएएसी के शीर्ष नेताओं को निशाना बनाकर इस आंदोलन को जड़ से समाप्त करने की योजना बना रहा है। 15 जुलाई को सामने आई इस रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तानी सेना का धैर्य अब चुक रहा है और वह बलपूर्वक हस्तक्षेप के पक्ष में है।

आंदोलन की पृष्ठभूमि और जेएएसी की माँगें

जेएएसी पीओके में बढ़ती महंगाई, राजनीतिक भेदभाव, प्रशासनिक उपेक्षा और अल्पसंख्यकों के खिलाफ कथित अत्याचारों के विरोध में सड़कों पर उतरी है। संगठन का आरोप है कि पाकिस्तान सरकार जनता की बुनियादी समस्याओं का समाधान करने के बजाय असहमति की आवाज़ को दबाने में लगी है। गौरतलब है कि सरकार और सुरक्षा प्रतिष्ठान की बार-बार की चेतावनियों के बावजूद जेएएसी ने अपने रुख में कोई बदलाव नहीं किया है।

खुफिया रिपोर्ट में सेना प्रमुख पर आरोप

एक खुफिया अधिकारी के हवाले से दावा किया गया है कि पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल असीम मुनीर आंदोलन को बलपूर्वक कुचलने के पक्षधर हैं और वे सरकार पर प्रदर्शनकारियों की माँगों के सामने न झुकने का दबाव बना रहे हैं। अधिकारी के अनुसार, मुनीर पहले भी सुरक्षा बलों के साथ बैठकों में आंदोलन को दबाने के निर्देश दे चुके हैं।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस मुद्दे को लेकर उठे विवाद के बाद पाकिस्तानी हुक्मरान क्षेत्र में हालात सामान्य दिखाने के लिए जल्द से जल्द प्रदर्शन को समाप्त कराना चाहते हैं।

जेएएसी का जवाब — पीछे हटने से इनकार

कथित खतरे के बावजूद जेएएसी नेतृत्व ने पीछे हटने से स्पष्ट इनकार कर दिया है। संगठन ने जनता से अपील की है कि वे किसी भी दबाव से न डरें और आंदोलन जारी रखें। नेताओं ने भावनात्मक संबोधन में कहा कि यदि नेतृत्व के सभी सदस्य मारे भी जाते हैं, तो भी यह संघर्ष जनता का आंदोलन बनकर आगे बढ़ता रहना चाहिए।

जेएएसी ने बुधवार को मुजफ्फराबाद तक मार्च जारी रखने का निर्णय लिया है। अधिकारियों के अनुसार, इस मार्च में महिलाएँ और बच्चे भी शामिल हो सकते हैं। वहीं, पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने नाकेबंदी कर रखी है और चेतावनी दी है कि इसे तोड़ने की किसी भी कोशिश पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

भारत की प्रतिक्रिया

भारत ने भी पीओके में कथित बल प्रयोग पर गंभीर चिंता जताई है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि स्थानीय लोगों की जायज़ चिंताओं का समाधान करने के बजाय पाकिस्तान ने पुलिस कार्रवाई, इंटरनेट प्रतिबंध, आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति में बाधा और निहत्थे नागरिकों के विरुद्ध बल प्रयोग का सहारा लिया है।

आगे क्या होगा

आंदोलन अब केवल आर्थिक माँगों तक सीमित नहीं रह गया है — अधिकारियों के अनुसार यह धीरे-धीरे एक व्यापक प्रतिरोध आंदोलन का रूप लेता जा रहा है। मुजफ्फराबाद मार्च और पाकिस्तानी सुरक्षा बलों की नाकेबंदी के बीच टकराव की आशंका बढ़ती जा रही है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नज़रें अब इस पर टिकी हैं कि इस्लामाबाद बातचीत का रास्ता चुनता है या दमन का।

संपादकीय दृष्टिकोण

और दमन उसका पहला उपकरण। जेएएसी का आंदोलन इसलिए खतरनाक है क्योंकि यह आर्थिक नहीं, राजनीतिक वैधता का सवाल उठा रहा है। अंतरराष्ट्रीय दबाव के बावजूद इस्लामाबाद का रवैया बदला नहीं — यह दर्शाता है कि पाकिस्तानी सेना का नियंत्रण लोकतांत्रिक जवाबदेही से ऊपर बना हुआ है। भारत की प्रतिक्रिया कूटनीतिक रूप से सधी है, लेकिन असली सवाल यह है कि क्या अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस बार महज बयानबाजी से आगे जाएगा।
RashtraPress
15 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जेएएसी क्या है और पीओके में इसका आंदोलन किस बात के लिए है?
जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (जेएएसी) पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में एक जन आंदोलन का नेतृत्व कर रही है। यह संगठन बढ़ती महंगाई, राजनीतिक भेदभाव, प्रशासनिक उपेक्षा और अल्पसंख्यकों के खिलाफ कथित अत्याचारों के विरोध में सक्रिय है।
खुफिया रिपोर्ट में जेएएसी नेतृत्व के खिलाफ क्या दावा किया गया है?
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि पाकिस्तानी सत्ता प्रतिष्ठान जेएएसी के शीर्ष नेताओं को निशाना बनाकर आंदोलन को समाप्त करने की योजना बना रहा है। एक खुफिया अधिकारी के हवाले से कहा गया है कि फील्ड मार्शल असीम मुनीर सुरक्षा बलों को बलपूर्वक दमन के निर्देश दे चुके हैं।
जेएएसी ने पाकिस्तानी दबाव पर क्या प्रतिक्रिया दी है?
जेएएसी ने कथित खतरे के बावजूद पीछे हटने से साफ इनकार कर दिया है। नेताओं ने जनता से आंदोलन जारी रखने की अपील की और कहा कि यदि पूरा नेतृत्व भी मारा जाए, तो यह जनता का आंदोलन बनकर आगे बढ़ता रहे।
भारत ने पीओके की स्थिति पर क्या कहा है?
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि पाकिस्तान ने स्थानीय लोगों की जायज़ चिंताओं को दूर करने के बजाय पुलिस कार्रवाई, इंटरनेट प्रतिबंध, आपूर्ति में बाधा और निहत्थे नागरिकों पर बल प्रयोग का सहारा लिया है।
मुजफ्फराबाद मार्च और नाकेबंदी को लेकर आगे क्या होने की आशंका है?
जेएएसी ने बुधवार को मुजफ्फराबाद तक मार्च जारी रखने का निर्णय लिया है, जिसमें महिलाएँ और बच्चे भी शामिल हो सकते हैं। पाकिस्तानी सुरक्षा बलों की नाकेबंदी और कड़ी कार्रवाई की चेतावनी के बीच टकराव की आशंका बढ़ती जा रही है।
राष्ट्र प्रेस
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