15 जुलाई 2026
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ऑपरेशन सीवाई-वज्रा: नोएडा में 8 अवैध कॉल सेंटर ध्वस्त, ₹60 करोड़ की साइबर ठगी का नेटवर्क उजागर

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ऑपरेशन सीवाई-वज्रा: नोएडा में 8 अवैध कॉल सेंटर ध्वस्त, ₹60 करोड़ की साइबर ठगी का नेटवर्क उजागर

सारांश

उत्तर प्रदेश पुलिस के 'ऑपरेशन सीवाई-वज्रा' ने नोएडा में 8 अवैध कॉल सेंटर तोड़े, 49 गिरफ्तार और एक नाइजीरियाई नागरिक भी हिरासत में। ₹60 करोड़ से अधिक की साइबर ठगी का नेटवर्क उजागर — म्यूल खाते, फर्जी कॉल सेंटर और अंतरराष्ट्रीय कड़ियाँ सब एक साथ।

मुख्य बातें

गौतमबुद्धनगर पुलिस ने 15 जुलाई को 'ऑपरेशन सीवाई-वज्रा' के तहत 8 अवैध कॉल सेंटर ध्वस्त किए।
49 अभियुक्तों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई; 700 से अधिक लोगों का सत्यापन और पूछताछ।
बरामदगी में 67 मोबाइल फोन , 19 लैपटॉप , 76 सिम कार्ड , 81 डेबिट/क्रेडिट कार्ड और ₹5 लाख से अधिक नकदी शामिल।
प्रारंभिक जाँच में ₹60 करोड़ से अधिक की साइबर वित्तीय धोखाधड़ी से संबंध उजागर।
एक नाइजीरियाई नागरिक गिरफ्तार; उसके डिजिटल उपकरणों की फॉरेंसिक जाँच जारी।
साइबर ठगी की शिकायत के लिए हेल्पलाइन 1930 या NCRP पोर्टल पर संपर्क करें।

गौतमबुद्धनगर में उत्तर प्रदेश पुलिस के प्रदेशव्यापी अभियान 'ऑपरेशन सीवाई-वज्रा' के तहत 15 जुलाई को 8 अवैध कॉल सेंटरों का भंडाफोड़ किया गया और ₹60 करोड़ से अधिक की साइबर वित्तीय धोखाधड़ी से जुड़े नेटवर्क का पर्दाफाश हुआ। इस कार्रवाई में 49 अभियुक्तों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की गई है और एक नाइजीरियाई नागरिक को भी गिरफ्तार किया गया है।

अभियान की पृष्ठभूमि और उद्देश्य

उत्तर प्रदेश पुलिस ने साइबर अपराध पर नकेल कसने के लिए प्रदेशस्तरीय विशेष अभियान 'ऑपरेशन सीवाई-वज्रा' की शुरुआत की थी। गौतमबुद्धनगर कमिश्नरेट पुलिस ने डिजिटल और मैनुअल इंटेलिजेंस के समन्वय से व्यापक सत्यापन अभियान चलाया, जिसके परिणामस्वरूप इस बड़े ऑपरेशन को अंजाम दिया गया। यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में साइबर ठगी के मामलों में तेज़ी से वृद्धि दर्ज की जा रही है।

मुख्य घटनाक्रम और बरामदगी

पुलिस के अनुसार, छापेमारी के दौरान 700 से अधिक लोगों का सत्यापन और पूछताछ की गई। 49 अभियुक्तों के कब्जे से 67 मोबाइल फोन, 19 लैपटॉप, 76 सिम कार्ड, 81 डेबिट एवं क्रेडिट कार्ड तथा ₹5 लाख से अधिक की नकदी बरामद की गई।

जाँच में यह भी सामने आया कि कुछ गिरोह साइबर अपराधियों को म्यूल बैंक खाते उपलब्ध कराते थे और बैंक खातों की खरीद-फरोख्त कर ठगी के नेटवर्क को सक्रिय सहयोग दे रहे थे। प्रारंभिक जाँच में गिरफ्तार व्यक्तियों का ₹60 करोड़ से अधिक की साइबर वित्तीय धोखाधड़ी से प्रत्यक्ष अथवा परोक्ष संबंध पाया गया है।

नाइजीरियाई नागरिक की गिरफ्तारी

अभियान के दौरान मिले सुरागों के आधार पर पुलिस ने एक नाइजीरियाई नागरिक को भी हिरासत में लिया है। प्रारंभिक जाँच में उसका संबंध बड़े पैमाने पर संचालित साइबर वित्तीय धोखाधड़ी से सामने आया है। उसके पास से बरामद इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और डिजिटल साक्ष्यों का राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) पर दर्ज विभिन्न शिकायतों से संबंध मिला है। इन उपकरणों की फॉरेंसिक जाँच जारी है ताकि पूरे नेटवर्क तक पहुँचा जा सके।

पुलिस की नीति और आगे की जाँच

गौतमबुद्धनगर कमिश्नरेट पुलिस ने स्पष्ट किया है कि साइबर अपराध के मामले में जीरो टॉलरेंस नीति अपनाई जा रही है। पुलिस अब गिरफ्तार अभियुक्तों के बैंक खातों, डिजिटल ट्रांजैक्शन और अन्य संबद्ध नेटवर्क की गहन जाँच कर रही है।

आम जनता के लिए अपील

पुलिस ने नागरिकों से अनुरोध किया है कि साइबर धोखाधड़ी या किसी भी संदिग्ध ऑनलाइन गतिविधि की सूचना तत्काल राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 या NCRP पोर्टल पर दर्ज कराएँ और निकटतम पुलिस थाने को भी सूचित करें। गौरतलब है कि साइबर ठगी की त्वरित रिपोर्टिंग से धनराशि की रिकवरी की संभावना काफी बढ़ जाती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

अंतरराष्ट्रीय आरोपी और ₹60 करोड़ का नेटवर्क — यह दर्शाती है कि साइबर ठगी अब केवल स्थानीय अपराध नहीं, बल्कि संगठित अंतरराष्ट्रीय उद्यम बन चुका है। असली सवाल यह है कि क्या एकमुश्त छापेमारी से आगे बढ़कर इन नेटवर्क की वित्तीय जड़ें काटी जा सकेंगी — क्योंकि म्यूल खातों की आपूर्ति श्रृंखला बिना बैंकिंग तंत्र की सक्रिय भागीदारी के नहीं टूटती। फॉरेंसिक जाँच के नतीजे तय करेंगे कि यह ऑपरेशन महज संख्या-प्रदर्शन है या साइबर अपराध की संरचना पर वास्तविक चोट।
RashtraPress
15 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ऑपरेशन सीवाई-वज्रा क्या है?
ऑपरेशन सीवाई-वज्रा उत्तर प्रदेश पुलिस का प्रदेशव्यापी साइबर अपराध-विरोधी अभियान है, जिसके तहत अवैध कॉल सेंटरों, म्यूल बैंक खातों और साइबर ठगी नेटवर्क पर कार्रवाई की जा रही है। गौतमबुद्धनगर में इस अभियान के तहत 15 जुलाई को 8 कॉल सेंटर ध्वस्त किए गए।
नोएडा साइबर ठगी मामले में कितने लोग गिरफ्तार हुए?
इस अभियान में 49 अभियुक्तों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की गई है, जिनमें एक नाइजीरियाई नागरिक भी शामिल है। इसके अलावा 700 से अधिक लोगों का सत्यापन और पूछताछ की गई।
म्यूल बैंक खाता क्या होता है और इसका साइबर ठगी से क्या संबंध है?
म्यूल बैंक खाते वे खाते होते हैं जो साइबर अपराधी असली खाताधारकों से खरीदकर या धोखे से प्राप्त करके ठगी की रकम ट्रांसफर करने के लिए इस्तेमाल करते हैं। नोएडा में पकड़े गए गिरोह ऐसे खाते साइबर अपराधियों को उपलब्ध कराते थे, जिससे ठगी की रकम को ट्रेस करना मुश्किल हो जाता था।
साइबर ठगी होने पर कहाँ शिकायत करें?
साइबर धोखाधड़ी की सूचना तुरंत राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 पर दें या राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) पर ऑनलाइन शिकायत दर्ज कराएँ। इसके साथ ही निकटतम पुलिस थाने को भी सूचित करें — जितनी जल्दी रिपोर्ट होगी, रकम वापसी की संभावना उतनी अधिक होगी।
नाइजीरियाई नागरिक की गिरफ्तारी इस मामले में क्यों अहम है?
नाइजीरियाई नागरिक की गिरफ्तारी यह संकेत देती है कि गौतमबुद्धनगर का यह साइबर ठगी नेटवर्क केवल स्थानीय नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संचालित था। उसके पास से बरामद डिजिटल उपकरणों का NCRP पर दर्ज कई शिकायतों से संबंध मिला है और फॉरेंसिक जाँच से नेटवर्क की बड़ी कड़ियों तक पहुँचने की उम्मीद है।
राष्ट्र प्रेस
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