सेंसेक्स 130 अंक चढ़कर 77,185 पर बंद, पश्चिम एशिया तनाव के बीच मिली-जुली रही बाजार की चाल
सारांश
मुख्य बातें
बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) का सेंसेक्स बुधवार, 15 जुलाई को 130.49 अंक यानी 0.17 प्रतिशत की बढ़त के साथ 77,185.43 पर बंद हुआ, जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का निफ्टी50 26.45 अंक यानी 0.11 प्रतिशत उछलकर 24,078.50 पर आ गया। पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की ऊँची कीमतों के चलते वैश्विक बाजारों के मिले-जुले संकेतों ने घरेलू बाजार की बढ़त को सीमित रखा।
कारोबारी सत्र का घटनाक्रम
सेंसेक्स अपने पिछले बंद स्तर 77,054.94 से 0.17 प्रतिशत की बढ़त के साथ 77,192.76 पर खुला। दिन के कारोबार में यह एक समय 591.33 अंक यानी 0.76 प्रतिशत की छलांग लगाकर 77,646.27 के इंट्रा-डे उच्चतम स्तर तक पहुँचा, लेकिन बाद में मुनाफावसूली के दबाव में लाभ काफी घट गया।
निफ्टी50 अपने पिछले बंद 24,052.05 से 0.14 प्रतिशत की तेजी के साथ 24,085.85 पर खुला और दिन के कारोबार में 168.3 अंक यानी 0.69 प्रतिशत की उछाल के साथ 24,220.35 के इंट्रा-डे हाई तक गया।
व्यापक बाजार और सेक्टरवार प्रदर्शन
व्यापक बाजारों में भी सकारात्मक रुझान रहा — निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 0.28 प्रतिशत और निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 0.67 प्रतिशत की बढ़त के साथ बंद हुए।
सेक्टरवार देखें तो निफ्टी पीएसयू बैंक इंडेक्स में करीब 1 प्रतिशत की तेजी रही। निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स में 0.73 प्रतिशत, निफ्टी ऑयल एंड गैस में 0.69 प्रतिशत और निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज में 0.63 प्रतिशत की बढ़त दर्ज हुई। निफ्टी फार्मा, निफ्टी हेल्थकेयर और निफ्टी ऑटो भी हरे निशान में बंद हुए।
दूसरी ओर, निफ्टी मेटल में 1 प्रतिशत से अधिक की गिरावट रही। निफ्टी आईटी, निफ्टी एफएमसीजी, निफ्टी मीडिया और निफ्टी रियल्टी भी दबाव में रहे।
टॉप गेनर्स और लूज़र्स
निफ्टी50 में अल्ट्राटेक सीमेंट, इटरनल, एचडीएफसी लाइफ, श्रीराम फाइनेंस, आयशर मोटर्स और एसबीआई के शेयर सबसे अधिक चढ़े। वहीं, हिंडाल्को इंडस्ट्रीज, पावर ग्रिड, टाटा स्टील, एलएंडटी, जेएसडब्ल्यू स्टील और इंफोसिस के शेयरों में सबसे ज्यादा गिरावट देखने को मिली।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं
मार्केट विशेषज्ञ सुनील शाह ने कहा, 'कल तेल की कीमतों में तेजी की वजह से सेंसेक्स 500 से ज्यादा अंक गिर गया था। आज यह गैप-अप के साथ खुला और ट्रेडिंग के पहले घंटे में ही 400 अंक ऊपर था। यह सकारात्मक है, लेकिन यह ज्यादातर एक तकनीकी बाउंस-बैक जैसा लग रहा है क्योंकि कच्चे तेल की कीमतें अभी भी 85-86 डॉलर के स्तर के आसपास हैं।' उन्होंने यह भी कहा कि अगर कच्चे तेल की कीमतें 70 डॉलर से नीचे आती हैं और पश्चिम एशिया में तनाव घटता है, तो घरेलू बाजार को और सहारा मिलेगा और रिकवरी की राह खुल सकती है।
आगे की राह
यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक निवेशक पश्चिम एशिया की स्थिति पर बारीकी से नज़र रख रहे हैं। कच्चे तेल की ऊँची कीमतें भारत के चालू खाते के घाटे और मुद्रास्फीति पर दबाव बना सकती हैं, जो बाजार की धारणा को प्रभावित करने वाला प्रमुख कारक बना रहेगा।