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सेंसेक्स 736 अंक उछला, 76,264 पर बंद; ईरान-अमेरिका शांति वार्ता और कच्चे तेल की गिरावट से बाजार में तेजी

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सेंसेक्स 736 अंक उछला, 76,264 पर बंद; ईरान-अमेरिका शांति वार्ता और कच्चे तेल की गिरावट से बाजार में तेजी

सारांश

ईरान-अमेरिका शांति वार्ता के सफल समापन और कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट ने सोमवार को भारतीय बाजार में जान फूंक दी। सेंसेक्स 736 अंक उछलकर 76,264 पर बंद हुआ — रियल्टी, ऑटो और मेटल सेक्टर सबसे आगे रहे।

मुख्य बातें

सेंसेक्स सोमवार, 15 जून को 736.38 अंक (0.97%) की तेजी के साथ 76,264.33 पर बंद हुआ।
निफ्टी 231 अंक (0.98%) चढ़कर 23,853.90 पर स्थिर हुआ।
ईरान-अमेरिका शांति समझौते की तारीख 19 जून तय होने से निवेशकों में सकारात्मक धारणा लौटी।
कच्चे तेल की कीमत 85 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आई, जो भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए अनुकूल।
निफ्टी रियल्टी और निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स शीर्ष प्रदर्शन करने वाले सेक्टर रहे; निफ्टी फार्मा और हेल्थकेयर लाल निशान में बंद।
हॉर्मुज स्ट्रेट खुलने से वैश्विक तेल आपूर्ति बढ़ने की संभावना, जिससे भारत को और राहत मिल सकती है।

बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) का सेंसेक्स सोमवार, 15 जून को 736.38 अंक यानी 0.97 प्रतिशत की बढ़त के साथ 76,264.33 पर बंद हुआ, जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का निफ्टी 231 अंक या 0.98 प्रतिशत चढ़कर 23,853.90 पर स्थिर हुआ। ईरान और अमेरिका के बीच शांति समझौते की वार्ता के सफल समापन और 19 जून को समझौते की तारीख तय होने से वैश्विक बाजारों में सकारात्मक धारणा लौटी, जिसका सीधा असर भारतीय बाजार पर दिखा।

मुख्य घटनाक्रम

बाजार में सोमवार को चौतरफा खरीदारी का माहौल रहा। लार्जकैप शेयरों के साथ-साथ मिडकैप और स्मॉलकैप सेगमेंट में भी उल्लेखनीय उछाल देखा गया। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 781.55 अंक यानी 1.29 प्रतिशत की मजबूती के साथ 61,549.65 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 202.55 अंक यानी 1.11 प्रतिशत की तेजी के साथ 18,400 पर रहा।

सेक्टोरल प्रदर्शन

सेक्टोरल सूचकांकों में निफ्टी रियल्टी और निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स सबसे आगे रहे। इनके अलावा निफ्टी ऑटो, निफ्टी मेटल, निफ्टी कंजप्शन, निफ्टी इंडिया मैन्युफैक्चरिंग, निफ्टी ऑयल एंड गैस, निफ्टी इंडिया डिफेंस और निफ्टी इन्फ्रा भी हरे निशान में बंद हुए। दूसरी ओर निफ्टी फार्मा, निफ्टी हेल्थकेयर और निफ्टी मीडिया लाल निशान में बंद हुए, जो इन क्षेत्रों में सतर्कता का संकेत है।

सेंसेक्स पैक में प्रमुख गेनर्स में ट्रेंट, इंडिगो, बजाज फिनसर्व, अल्ट्राटेक सीमेंट, इटरनल, मारुति सुजुकी, एमएंडएम, एलएंडटी, बजाज फाइनेंस, टाइटन, इन्फोसिस, एचसीएल टेक, भारती एयरटेल, आईटीसी और बीईएल शामिल रहे। वहीं एनटीपीसी, आईसीआईसीआई बैंक, एशियन पेंट्स, एचयूएल, सन फार्मा, टेक महिंद्रा और टाटा स्टील लूजर्स की सूची में रहे।

विशेषज्ञ क्या कहते हैं

मार्केट विशेषज्ञ सुनिल शाह ने बताया कि भारतीय बाजार में इस तेजी की मुख्य वजह ईरान-अमेरिका के बीच शांति समझौते पर वार्ता का सफलतापूर्वक समाप्त होना और 19 जून की तारीख तय होना है। उनके अनुसार, इससे निवेशकों के बीच सकारात्मक धारणा लौटी है और बाजार में खरीदारी का उत्साह बढ़ा है।

शाह ने यह भी कहा कि इस भू-राजनीतिक घटनाक्रम के चलते कच्चे तेल की कीमतें 85 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आ गई हैं, जो भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए अत्यंत अनुकूल संकेत है। उनके अनुसार, इससे डॉलर के मुकाबले रुपये पर दबाव कम होगा और आयात लागत में राहत मिलेगी।

हॉर्मुज स्ट्रेट का असर

विशेषज्ञों के अनुसार, हॉर्मुज स्ट्रेट के खुलने से वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की आपूर्ति और बढ़ेगी, जिससे तेल की कीमतों पर दबाव और कम होने की संभावना है। यह ऐसे समय में आया है जब भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात के जरिये पूरा करता है, इसलिए कच्चे तेल में हर गिरावट सीधे भारत के चालू खाते के घाटे और मुद्रास्फीति पर असर डालती है।

आगे क्या

बाजार विश्लेषकों की नजर अब 19 जून को प्रस्तावित ईरान-अमेरिका समझौते पर टिकी है। यदि यह समझौता सफलतापूर्वक संपन्न होता है, तो वैश्विक बाजारों में स्थिरता और मजबूत होने की उम्मीद है, जिसका सकारात्मक असर भारतीय बाजार पर भी जारी रह सकता है। घरेलू स्तर पर मानसून की प्रगति और अगले सप्ताह के व्यापक आर्थिक आंकड़े भी बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन ध्यान देने वाली बात यह है कि ईरान-अमेरिका समझौता अभी केवल तारीख तय होने तक सीमित है — अंतिम हस्ताक्षर बाकी हैं। यदि 19 जून को समझौता विफल होता है या शर्तें विवादास्पद निकलती हैं, तो यही बाजार उतनी ही तेजी से पलट सकता है। इसके अलावा, कच्चे तेल में गिरावट से भारत को अल्पकालिक राहत तो मिलती है, लेकिन घरेलू मुद्रास्फीति और मानसून की अनिश्चितता जैसे बुनियादी जोखिम अभी भी बने हुए हैं। निवेशकों को वैश्विक संकेतों के साथ-साथ इन घरेलू कारकों पर भी नजर रखनी चाहिए।
RashtraPress
31 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सोमवार को सेंसेक्स कितना बढ़ा और क्यों?
सोमवार, 15 जून को सेंसेक्स 736.38 अंक यानी 0.97 प्रतिशत की बढ़त के साथ 76,264.33 पर बंद हुआ। ईरान-अमेरिका शांति वार्ता के सफल समापन और 19 जून को समझौते की तारीख तय होने से वैश्विक बाजारों में सकारात्मक धारणा लौटी, जिसका सीधा असर भारतीय बाजार पर पड़ा।
कच्चे तेल की कीमत गिरने से भारत को क्या फायदा होगा?
कच्चे तेल की कीमत 85 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आने से भारत के आयात बिल में कमी आएगी और डॉलर के मुकाबले रुपये पर दबाव घटेगा। इससे मुद्रास्फीति नियंत्रण में मदद मिलेगी और चालू खाते के घाटे में सुधार की संभावना है।
आज के बाजार में कौन से सेक्टर सबसे ज्यादा चढ़े?
निफ्टी रियल्टी और निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स शीर्ष पर रहे। इनके अलावा निफ्टी ऑटो, निफ्टी मेटल, निफ्टी इंडिया मैन्युफैक्चरिंग और निफ्टी ऑयल एंड गैस भी हरे निशान में बंद हुए। दूसरी ओर निफ्टी फार्मा, हेल्थकेयर और मीडिया लाल निशान में रहे।
हॉर्मुज स्ट्रेट खुलने का बाजार पर क्या असर होगा?
हॉर्मुज स्ट्रेट खुलने से वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की आपूर्ति बढ़ेगी, जिससे तेल की कीमतों में और गिरावट की संभावना है। यह भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश के लिए सकारात्मक संकेत है, क्योंकि इससे ऊर्जा लागत और आयात व्यय में राहत मिलेगी।
ईरान-अमेरिका समझौते की तारीख कब तय हुई और इसका बाजार पर क्या असर है?
ईरान-अमेरिका शांति समझौते की तारीख 19 जून तय हुई है। इस खबर ने वैश्विक निवेशकों में भू-राजनीतिक जोखिम कम होने की उम्मीद जगाई, जिससे भारत सहित उभरते बाजारों में खरीदारी का उत्साह बढ़ा।
राष्ट्र प्रेस
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