सेंसेक्स 776 अंक उछला, निफ्टी 24,000 के करीब; 5 दिनों की गिरावट के बाद बाज़ार में बड़ी वापसी
सारांश
मुख्य बातें
BSE सेंसेक्स सोमवार, 27 जुलाई 2026 को 776.01 अंक यानी 1.02 प्रतिशत की बढ़त के साथ 76,835.78 पर बंद हुआ, जबकि NSE निफ्टी 50 228.50 अंक यानी 0.96 प्रतिशत चढ़कर 23,995.95 पर पहुँचा। यह तेजी लगातार 5 कारोबारी सत्रों की गिरावट के बाद आई है, जिसकी मुख्य वजह अमेरिका और ईरान द्वारा सैन्य हमलों को स्थगित किए जाने के बाद कच्चे तेल की कीमतों में आई तेज़ गिरावट रही।
मुख्य बाज़ार संकेतक
व्यापक बाज़ार में भी उत्साह स्पष्ट दिखा। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 1.11 प्रतिशत और स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 1.31 प्रतिशत की बढ़त के साथ बंद हुए। BSE पर सूचीबद्ध कंपनियों का कुल बाज़ार पूंजीकरण पिछले सत्र के लगभग ₹476 लाख करोड़ से बढ़कर लगभग ₹481 लाख करोड़ हो गया — यानी निवेशकों को एक ही सत्र में ₹5 लाख करोड़ की संपत्ति वापस मिली।
सेक्टरवार प्रदर्शन
सभी प्रमुख सेक्टर हरे निशान में बंद हुए। निफ्टी मीडिया 2.4 प्रतिशत की बढ़त के साथ शीर्ष प्रदर्शनकर्ता रहा, इसके बाद निफ्टी आईटी (2.3 प्रतिशत) और निफ्टी रियल्टी (2.2 प्रतिशत) का स्थान रहा। निफ्टी ऑटो में 1.6 प्रतिशत और निफ्टी फार्मा में 1.5 प्रतिशत की बढ़त दर्ज हुई। निफ्टी एफएमसीजी 1 प्रतिशत, निफ्टी बैंक 0.7 प्रतिशत और निफ्टी इंफ्रा 0.66 प्रतिशत ऊपर रहे। हालाँकि, निफ्टी ऑयल एंड गैस सेक्टर का प्रदर्शन अपेक्षाकृत कमज़ोर रहा। गौरतलब है कि निफ्टी रियल्टी, निफ्टी फार्मा और निफ्टी मेटल ने लगातार तीन दिनों की गिरावट को इस सत्र में तोड़ा।
टॉप गेनर और लूज़र
निफ्टी में सर्वाधिक लाभ कमाने वाले शेयरों में इटरनल, इंटरग्लोब एविएशन, इंफोसिस, बजाज फाइनेंस, मैक्स हेल्थ और श्रीराम फाइनेंस शामिल रहे। वहीं, नुकसान उठाने वाले शेयरों में ओएनजीसी, एचडीएफसी लाइफ, एचडीएफसी बैंक, कोल इंडिया, पावर ग्रिड और डॉ. रेड्डीज़ लैब्स प्रमुख रहे।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं
बाज़ार विशेषज्ञों के अनुसार, पश्चिम एशिया में हमलों पर विराम लगने से आयात लागत और महंगाई बढ़ने की आशंकाएँ कम हुई हैं, जिससे बाज़ार में राहत भरी तेजी देखने को मिली। कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट और दीर्घकालिक बॉन्ड यील्ड में कमी ने भी निवेशकों की धारणा को मज़बूती दी है। इसके साथ ही बाज़ार में लॉन्ग अनवाइंडिंग के संकेत भी देखे गए।
आगे क्या देखें
विशेषज्ञों के मुताबिक, इस सप्ताह अमेरिकी फेडरल रिज़र्व, बैंक ऑफ इंग्लैंड और बैंक ऑफ जापान की प्रमुख मौद्रिक नीति बैठकों पर बाज़ार की नज़र रहेगी। माना जा रहा है कि ये केंद्रीय बैंक फिलहाल ब्याज दरें यथावत रख सकते हैं। घरेलू मोर्चे पर मानसून घाटे से महंगाई में राहत की उम्मीद और पहली तिमाही के उम्मीद से बेहतर कंपनी नतीजे भी बाज़ार की धारणा को सहारा दे रहे हैं। यह देखना अहम होगा कि वैश्विक केंद्रीय बैंकों के फैसले और भू-राजनीतिक स्थिति इस तेजी को टिकाऊ बनाते हैं या नहीं।