सेंसेक्स 287 अंक उछला, 77,656 पर बंद; कच्चे तेल में गिरावट से बाजार को मिली राहत
सारांश
मुख्य बातें
बीएसई सेंसेक्स मंगलवार, 25 अगस्त को 286.98 अंक यानी 0.37 प्रतिशत की बढ़त के साथ 77,656.09 पर बंद हुआ, जबकि एनएसई निफ्टी 50 116 अंक यानी 0.48 प्रतिशत चढ़कर 24,335.55 पर बंद हुआ। वैश्विक बाजारों के मिले-जुले संकेतों के बावजूद कच्चे तेल की कीमतों में आई नरमी ने घरेलू बाजार को पिछले सत्र की गिरावट से उबरने में मदद की।
कारोबारी सत्र का घटनाक्रम
सेंसेक्स अपने पिछले बंद 77,369.11 से 73.61 अंक की मामूली गिरावट के साथ 77,295.49 पर फ्लैट खुला। दिन के दौरान इसने 77,666.39 का इंट्रा-डे उच्चतम स्तर छुआ, जो 0.38 प्रतिशत की बढ़त थी।
निफ्टी 50 ने भी सतर्क शुरुआत की और अपने पिछले बंद 24,219.05 से 43.29 अंक नीचे 24,175.75 पर खुला। सत्र के दौरान यह 24,334.55 के इंट्रा-डे हाई तक पहुँचा और अंततः मजबूती के साथ बंद हुआ।
कौन-से सेक्टर रहे आगे, कौन पिछड़े
निफ्टी हेल्थकेयर, निफ्टी फार्मा और निफ्टी पीएसयू बैंक ने बेहतरीन प्रदर्शन किया। वहीं, निफ्टी प्राइवेट बैंक और निफ्टी मेटल दबाव में रहे।
व्यापक बाजार में मिला-जुला रुझान रहा — निफ्टी मिडकैप में 0.54 प्रतिशत की बढ़त दर्ज हुई, जबकि निफ्टी स्मॉलकैप में 0.10 प्रतिशत की मामूली गिरावट रही।
शीर्ष लाभार्थी और पिछड़ने वाले शेयर
निफ्टी 50 में सबसे अधिक बढ़त पाने वाले शेयरों में अदाणी एंटरप्राइजेज, मैक्स हेल्थकेयर, अपोलो हॉस्पिटल्स, इंडिगो, अदाणी पोर्ट्स, श्रीराम फाइनेंस, इन्फोसिस और इटरनल शामिल रहे।
दूसरी ओर, एचडीएफसी लाइफ, सिप्ला और ओएनजीसी सबसे अधिक दबाव में रहे।
विशेषज्ञों की राय
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, ईरान पर अमेरिका के बहुप्रतीक्षित प्रतिबंध बाजार की उम्मीदों से हल्के रहे, जिससे कच्चे तेल की कीमतें और बॉन्ड यील्ड अपने हालिया उच्चतम स्तर से नीचे आ गए। ऊर्जा लागत में इस राहत ने मासिक एक्सपायरी के दिन बाजार को बढ़त के साथ बंद होने में सहयोग दिया।
विशेषज्ञों ने यह भी बताया कि घरेलू बॉन्ड बाजार में स्थिरता के संकेतों के बीच निवेशकों ने हेल्थकेयर और फाइनेंशियल जैसे डिफेंसिव व घरेलू-केंद्रित सेक्टरों में पैसा लगाया।
आगे की राह
बाजार भागीदार अब इस सप्ताहांत आने वाले महंगाई के आँकड़ों और फेडरल रिजर्व प्रमुख की टिप्पणियों पर नजर रखे हुए हैं, जो ब्याज दरों की दिशा पर स्पष्टता देंगे। हालाँकि, अमेरिका-ईरान के बीच अनसुलझे भू-राजनीतिक तनाव और अपेक्षाकृत ऊँची तेल कीमतों के चलते निकट अवधि में सतर्कता का रुख बने रहने की संभावना है।