कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि से भारतीय शेयर बाजार में भारी गिरावट, सेंसेक्स और निफ्टी 3%25 गिरे
सारांश
Key Takeaways
- कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि ने भारतीय शेयर बाजार को प्रभावित किया है।
- सेंसेक्स और निफ्टी में 3%25 से अधिक की गिरावट आई।
- निवेशकों में जोखिम से बचने की भावना बढ़ी है।
- विशेषज्ञों का कहना है कि सतर्क रहना महत्वपूर्ण है।
- नई खरीदारी की रणनीति तभी अपनानी चाहिए जब निफ्टी 25,000 के ऊपर स्थिरता दिखाए।
मुंबई, 9 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते संघर्ष और कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल के चलते सप्ताह के पहले कारोबारी दिन सोमवार को भारतीय शेयर बाजार में बड़ी गिरावट देखने को मिली। वैश्विक अनिश्चितताओं के कारण निवेशकों में जोखिम से बचने की प्रवृत्ति बढ़ गई, जिससे बाजार पर दबाव बना।
इस दौरान घरेलू बाजार के प्रमुख बेंचमार्कों में बड़ी गिरावट आई। 30 शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स अपने पिछले स्तर (78,918.90) से 1,862.15 अंकों की बड़ी गिरावट के साथ 77,056.75 पर खुला, वहीं एनएसई निफ्टी भी अपने पिछले स्तर (24,450.45) से 582.4 अंक गिरकर 23,868.05 पर खुला।
खबर लिखे जाने तक (सुबह 9.28 बजे के आसपास) सेंसेक्स 2,404.42 अंकों यानी 3.05 प्रतिशत की गिरावट के साथ 76,514.48 पर कारोबार कर रहा था, जबकि निफ्टी में 727.40 (2.97 प्रतिशत) अंकों की गिरावट दर्ज की गई, और यह 23,723.05 पर नजर आया।
बेंचमार्क इंडेक्स के साथ-साथ व्यापक बाजार भी दबाव में रहा। निफ्टी मिडकैप में लगभग 3.07 प्रतिशत और निफ्टी स्मॉलकैप में करीब 3.18 प्रतिशत की गिरावट हुई।
सेक्टर के अनुसार, निफ्टी पीएसयू बैंक इंडेक्स में सबसे अधिक गिरावट देखी गई, जो खुलते ही 4 प्रतिशत से अधिक गिर गया। इसके अलावा, निफ्टी ऑटो (3.99 प्रतिशत की गिरावट), निफ्टी बैंक (3.87 प्रतिशत की गिरावट), निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज (3.75 प्रतिशत की गिरावट) और निफ्टी एफएमसीजी (2.14 प्रतिशत की गिरावट) भी कमजोर प्रदर्शन करते दिखाई दिए। हालांकि, निफ्टी आईटी में सबसे कम 1.06 प्रतिशत की गिरावट हुई।
सेंसेक्स पैक में, इंडिगो, एसबीआई, एलएंडटी, टाटा स्टील, मारुति सुजुकी, एशियन पेंट्स, एक्सिस बैंक और महिंद्रा एंड महिंद्रा के शेयरों में सबसे अधिक गिरावट देखी गई और ये शीर्ष हानिकारक शेयरों में शामिल रहे।
अमेरिका-ईरान संघर्ष के बढ़ने के कारण वैश्विक तेल बाजार में बड़ी उथल-पुथल देखने को मिली। एशियाई कारोबार के प्रारंभ में कच्चे तेल (ब्रेंट क्रूड) के दाम लगभग 21 प्रतिशत बढ़कर 112 डॉलर प्रति बैरल तक पहुँच गए।
रिपोर्टों के अनुसार, ईरान द्वारा जहाजों पर हमले के बाद होर्मुज जलडमरूमध्य बंद कर दिया गया, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति में बाधा उत्पन्न होने की आशंका बढ़ गई। इसके पश्चात कुवैत, संयुक्त अरब अमीरात और ईरान जैसे प्रमुख तेल उत्पादक देशों ने तेल उत्पादन में कटौती की घोषणा की। इस बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि तेल की कीमतों में वृद्धि अमेरिका और दुनिया की सुरक्षा और शांति के लिए चुकाई जाने वाली एक छोटी कीमत है।
चॉइस ब्रोकिंग के रिसर्च एनालिस्ट हितेश टेलर ने बताया कि पिछले सप्ताह निफ्टी 50 में तेज उतार-चढ़ाव और लगातार बिकवाली का दबाव देखा गया। तकनीकी दृष्टिकोण से देखें तो साप्ताहिक चार्ट पर बनी कमजोरी की कैंडल और 50-सप्ताह के ईएमए के नीचे बंद होना बाजार में कमजोरी का संकेत देती है। वर्तमान में 24,700 से 25,150 का दायरा प्रमुख रेजिस्टेंस माना जा रहा है, जबकि 23,850 और 23,600 के स्तर तत्काल सपोर्ट के रूप में देखे जा रहे हैं। यदि निफ्टी 23,500 के नीचे जाता है, तो बाजार में और गिरावट संभव है।
विशेषज्ञ ने आगे बताया कि एक्सचेंज के प्रारंभिक आंकड़ों के अनुसार, 6 मार्च 2026 को विदेशी निवेशकों (एफआईआई) ने लगभग 6,030 करोड़ रुपये के शेयर बेचे, जिससे बाजार पर दबाव बढ़ा। वहीं घरेलू निवेशकों ने लगभग 6,972 करोड़ रुपये की खरीदारी कर बाजार को कुछ सहारा दिया।
विशेषज्ञों का कहना है कि वैश्विक अनिश्चितताओं और बाजार में बढ़ती अस्थिरता को देखते हुए, निवेशकों को वर्तमान में सतर्क और अनुशासित रहने की सलाह दी जा रही है। गिरावट के दौरान मजबूत फंडामेंटल वाले शेयरों पर ही ध्यान देना बेहतर माना जा रहा है।
मार्केट एक्सपर्ट के अनुसार, निफ्टी में नई खरीदारी की रणनीति तभी अपनाई जानी चाहिए जब इंडेक्स 25,000 के स्तर के ऊपर मजबूत और लगातार ब्रेकआउट दे। ऐसा होने पर बाजार में सकारात्मक धारणा मजबूत होगी और तेजी का एक नया चरण शुरू होने की संभावना बनेगी।