भारतीय शेयर बाजार में भारी गिरावट, सेंसेक्स 1,200 अंक तक गिरा; जानें इसके प्रमुख कारण
सारांश
Key Takeaways
- सेंसेक्स में 1,200 अंक की गिरावट हुई है।
- अमेरिका-ईरान युद्ध एक प्रमुख कारण है।
- कच्चे तेल की कीमतें भी बढ़ी हैं।
- विदेशी निवेशकों की बिकवाली ने बाजार को प्रभावित किया है।
- निवेशकों को धैर्य बनाए रखने की सलाह दी जा रही है।
मुंबई, 30 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। सप्ताह के पहले कारोबारी दिन सोमवार को भारतीय शेयर बाजार में काफी गिरावट देखने को मिली। दोनों मुख्य बेंचमार्क, सेंसेक्स और निफ्टी50, 1 प्रतिशत से अधिक की गिरावट के साथ खुले।
कारोबार के दौरान, सेंसेक्स लगभग 1,200 अंक यानी 1.6 प्रतिशत टूटकर 72,326.54 के दिन के निचले स्तर तक पहुंच गया, जबकि निफ्टी 50 करीब 350 अंक यानी 1.5 प्रतिशत गिरकर 22,453 के इंट्रा-डे लो पर आ गया। इस दौरान, मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी 1 प्रतिशत से अधिक की गिरावट देखी गई।
इस तेज गिरावट के चलते निवेशकों को कुछ ही घंटों में करीब 6 लाख करोड़ रुपए का नुकसान हुआ। बीएसई में सूचीबद्ध कंपनियों का कुल मार्केट कैप 422.04 लाख करोड़ रुपए (शुक्रवार) से घटकर 416.06 लाख करोड़ रुपए रह गया (दोपहर 12.30 बजे तक)।
बाजार में इस गिरावट के पीछे कई महत्वपूर्ण कारण हैं। सबसे बड़ा कारण अमेरिका-ईरान युद्ध है, जो एक महीने से अधिक समय से जारी है और अब अपने पांचवें सप्ताह में प्रवेश कर चुका है। इस युद्ध के समाप्त होने को लेकर अभी भी अनिश्चितता बनी हुई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में ईरान के ऊर्जा ठिकानों पर हमले रोकने का निर्णय बढ़ाया, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान सामने नहीं आया है। इस बीच, यमन के हूती विद्रोहियों के शामिल होने से तनाव और बढ़ गया है।
दूसरा बड़ा कारण कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें हैं। ब्रेंट क्रूड 115 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंच गया है। होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्तों पर असर के कारण सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ गई है। भारत, जो दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक है, अपनी 85-90 प्रतिशत जरूरत आयात से पूरी करता है; ऐसे में महंगा तेल अर्थव्यवस्था पर दबाव डालता है।
तीसरा कारण बाजार में बढ़ती अस्थिरता है। वोलैटिलिटी इंडेक्स इंडिया वीआईएक्स 5 प्रतिशत से ज्यादा बढ़कर 28.1 के पार पहुंच गया, जो यह दर्शाता है कि निवेशकों में डर और अनिश्चितता बढ़ रही है। आमतौर पर 12-15 का स्तर सामान्य माना जाता है, लेकिन इससे ऊपर जाने पर बाजार में ज्यादा उतार-चढ़ाव की आशंका रहती है।
चौथा बड़ा कारण विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली है। विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) ने मार्च में 27 तारीख तक भारतीय बाजार से 1.23 लाख करोड़ रुपए निकाल लिए हैं। इससे बाजार पर भारी दबाव बना हुआ है।
पांचवां कारण एफएंडओ (फ्यूचर्स और ऑप्शंस) कॉन्ट्रैक्ट की एक्सपायरी है। 30 मार्च को मार्च सीरीज के कॉन्ट्रैक्ट समाप्त हो रहे हैं, जिससे बाजार में उतार-चढ़ाव और बढ़ गया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इन सभी कारणों के चलते फिलहाल बाजार में कमजोरी बनी रह सकती है। हालांकि, लंबी अवधि के निवेशकों को जल्दबाजी में फैसले लेने से बचने और धैर्य बनाए रखने की सलाह दी जा रही है।