भारतीय शेयर बाजार 11 महीने के निम्नतम स्तर पर, गिरावट के प्रमुख कारण
सारांश
Key Takeaways
- सेंसेक्स और निफ्टी ने 11 महीनों का निचला स्तर छुआ।
- कच्चे तेल की कीमतों में 26%25 की वृद्धि।
- डॉलर का मजबूत होना भारतीय रुपए को प्रभावित कर रहा है।
- विदेशी निवेशकों ने बड़ी मात्रा में निकासी की।
- वैश्विक बाजारों में कमजोरी का असर भारतीय बाजार पर।
मुंबई, 9 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। भारतीय शेयर बाजार ने सोमवार के कारोबारी सत्र में तीव्र गिरावट के साथ शुरुआत की, जिसके परिणामस्वरूप सेंसेक्स और निफ्टी 11 महीनों के सबसे निचले स्तर पर पहुँच गए हैं।
दोपहर 1 बजे सेंसेक्स 1,750 अंक या 2.22 प्रतिशत की गिरावट के साथ 77,170 पर और निफ्टी 540 अंक या 2.21 प्रतिशत की कमी के साथ 23,910 पर था।
इस गिरावट का मुख्य कारण कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि मानी जा रही है। सोमवार को ब्रेंट क्रूड की कीमत में 26 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी देखी गई, जो इसे 119 डॉलर प्रति बैरल तक ले गई, यह जुलाई 2022 के बाद से इसका सबसे ऊँचा स्तर है। हालांकि, दोपहर तक कीमत में थोड़ी कमी आई है, और वर्तमान में यह 14.42 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 106 डॉलर प्रति बैरल पर है।
कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि का कारण ईराक और कुवैत जैसे देशों द्वारा उत्पादन में कटौती है। इससे पहले, कतर ने एलएनजी के उत्पादन में कमी का ऐलान किया था।
वैश्विक बाजारों में कमजोरी के संकेत भी भारतीय शेयर बाजार की गिरावट का एक बड़ा कारण हैं। एशिया में टोक्यो, शंघाई, सोल, बैंकॉक, हांगकांग और जकार्ता सभी बाजार हरे निशान में थे। वहीं, अमेरिकी बाजार भी शुक्रवार को लाल निशान में बंद हुए थे।
भारतीय बाजार में कमजोरी की एक अन्य वजह डॉलर का मजबूत होना है। दुनिया की छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले अमेरिकी मुद्रा की ताकत को दर्शाने वाला डॉलर इंडेक्स इस साल के अब तक के सबसे ऊँचे स्तर 99.7 पर पहुँच गया है। डॉलर के मजबूत होने से भारतीय रुपए में भी कमजोरी देखी जा रही है।
जब भी डॉलर मजबूत होता है, तब उभरते बाजारों जैसे भारत के बाजारों से विदेशी निवेशकों की निकासी देखने को मिलती है।
विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआइ) द्वारा लगातार बिकवाली भी भारतीय शेयर बाजार में गिरावट का एक अन्य कारण है। विदेशी निवेशकों ने शुक्रवार को इक्विटी बाजार से 6,030.38 करोड़ रुपए की निकासी की।