शेयर बाजार में सेंसेक्स का भारी गिरना, जानें इसके प्रमुख कारण

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शेयर बाजार में सेंसेक्स का भारी गिरना, जानें इसके प्रमुख कारण

सारांश

भारतीय शेयर बाजार में सोमवार को सेंसेक्स में भारी गिरावट आई है। जानें इसके पीछे के कारण, जो वैश्विक तनाव और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों से जुड़े हैं।

Key Takeaways

  • सेंसेक्स में 1,772 अंक की गिरावट आई है।
  • अमेरिका-ईरान तनाव का बाजार पर गहरा असर पड़ा है।
  • कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि से भी बाजार प्रभावित हुआ है।
  • विदेशी संस्थागत निवेशक 5,518.39 करोड़ रुपए की निकासी कर चुके हैं।
  • बाजार में व्यापक गिरावट देखी जा रही है।

मुंबई, 23 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। भारतीय शेयर बाजार में सोमवार को बड़े पैमाने पर गिरावट देखी जा रही है। दोपहर 12:37 बजे सेंसेक्स में 1,772 अंक या 2.32 प्रतिशत की कमी आई, जिससे यह 72,803 पर पहुँच गया। निफ्टी में भी 565 अंक या 2.44 प्रतिशत की गिरावट आई, जो इसे 22,549 पर ले आई।

बाजार में व्यापक गिरावट का सामना करना पड़ रहा है। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स में 2,074 अंक या 3.78 प्रतिशत की गिरावट आई, जो इसे 52,789 पर ले आया। इसी तरह, निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स में 648.70 अंक या 4.12 प्रतिशत की कमी आई, जिससे यह 15,070 पर रहा।

लगभग सभी सूचकांक लाल निशान में हैं, जिनमें कंज्यूमर ड्यूरेबल्स और मेटल सबसे बड़े हारी हुए क्षेत्र रहे हैं।

गिरावट के पीछे मुख्य कारण अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव हैं। सप्ताहांत में तनाव और बढ़ गया जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को फिर से खोलने के लिए 48 घंटे की समय सीमा दी और महत्वपूर्ण ऊर्जा अवसंरचना पर गंभीर प्रतिक्रिया की चेतावनी दी। इसके जवाब में, तेहरान ने प्रमुख क्षेत्रीय संपत्तियों पर हमलों और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को पूरी तरह से बंद करने की धमकी दी।

अब यह संघर्ष चौथे सप्ताह में प्रवेश कर गया है, और इसके अंत के कोई संकेत नहीं मिल रहे हैं, जिससे निवेशकों में सतर्कता बढ़ गई है।

अंतरराष्ट्रीय बाजारों से मिले नकारात्मक संकेतों ने भी भारतीय बाजार के मनोभाव को और बिगाड़ दिया है। टोक्यो, सोल, हांगकांग, शंघाई और बैंकॉक के बाजारों में 2 प्रतिशत से लेकर 6.5 प्रतिशत तक की गिरावट देखी गई।

कच्चे तेल के बढ़ते दामों ने भी बाजार के मूड को प्रभावित किया है। खबर लिखे जाने तक, कॉमेक्स पर ब्रेंट क्रूड की कीमत 0.84 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 113 डॉलर प्रति बैरल और डब्ल्यूटीआई क्रूड की कीमत 2.15 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 100 डॉलर प्रति बैरल पर थी।

इसके अलावा, विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) की बिकवाली ने भी बाजार पर दबाव डाला है। अंतिम कारोबारी सत्र (शुक्रवार) में, एफआईआई ने 5,518.39 करोड़ रुपए की इक्विटी में निकासी की थी, जबकि घरेलू संस्थागत निवेशकों (डीआईआई) ने 5,706.23 करोड़ रुपए का निवेश किया।

Point of View

जो निवेशकों के लिए चिंता का विषय है। यह घटनाक्रम न केवल भारतीय बाजार को प्रभावित कर रहा है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी नकारात्मक संकेत दे रहा है।
NationPress
23/03/2026

Frequently Asked Questions

सेंसेक्स में गिरावट के सबसे बड़े कारण क्या हैं?
सेंसेक्स में गिरावट के प्रमुख कारणों में अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ता तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि, और विदेशी संस्थागत निवेशकों द्वारा बिकवाली शामिल हैं।
क्या यह गिरावट लंबे समय तक चलेगी?
हालांकि वर्तमान में बाजार में गिरावट है, लेकिन इसके आगे के रुझान वैश्विक घटनाओं पर निर्भर करेंगे।
निवेशकों को क्या करना चाहिए?
निवेशकों को सतर्क रहना चाहिए और बाजार की स्थितियों का ध्यानपूर्वक अवलोकन करना चाहिए।
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