क्या हरे निशान में खुलने के बाद भारतीय शेयर बाजार में गिरावट आयी? ट्रंप द्वारा 25 प्रतिशत टैरिफ का असर

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क्या हरे निशान में खुलने के बाद भारतीय शेयर बाजार में गिरावट आयी? ट्रंप द्वारा 25 प्रतिशत टैरिफ का असर

Key Takeaways

  • भारतीय शेयर बाजार ने हरे निशान में शुरुआत की लेकिन जल्दी ही गिरावट में चला गया।
  • अमेरिकी राजदूत का व्यापार वार्ता का आश्वासन सकारात्मक संकेत है।
  • ट्रंप का 25 प्रतिशत टैरिफ निर्णय वैश्विक व्यापार पर असर डाल रहा है।
  • बाजार में सेंसेक्स और निफ्टी की स्थिति पर नजर रखना आवश्यक है।
  • आर्थिक नीतियों का निवेश पर गहरा प्रभाव पड़ता है।

मुंबई, 13 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। पिछले कुछ दिनों की निरंतर गिरावट के बाद, सप्ताह के दूसरे कारोबारी दिन, मंगलवार को भारतीय शेयर बाजार ने हरे निशान में शुरुआत की। इस दौरान घरेलू बाजार के प्रमुख बेंचमार्कों ने अच्छी शुरुआत की, लेकिन थोड़ी देर बाद शुरुआती बढ़त खोकर दोनों प्रमुख बेंचमार्क सेंसेक्स और निफ्टी दबाव में आ गए।

भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर के इस बयान के बाद कि दोनों देश मंगलवार को व्यापार वार्ता करेंगे, और मजबूत वैश्विक संकेतों के बीच, सोमवार के कारोबारी सत्र में शुरुआती गिरावट के बाद सेंसेक्स और निफ्टी में शानदार तेजी देखने को मिली, और दोनों बेंचमार्क अच्छी बढ़त के साथ बंद हुए थे।

वहीं, हफ्ते के दूसरे ट्रेडिंग सेशन में भी दोनों प्रमुख घरेलू बेंचमार्कों ने बढ़त का सिलसिला जारी रखते हुए तेजी से कारोबार की शुरुआत की।

सुबह 9:20 बजे के आसपास 30 शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स 278 अंक या 0.33 प्रतिशत की उछाल के साथ 84,156 पर कारोबार कर रहा था, जबकि निफ्टी शुरुआती कारोबार में 82 अंक या 0.32 प्रतिशत की तेजी के साथ 25,872 पर था।

हालांकि, कुछ ही देर बाद सुबह 9:30 बजे तक सेंसेक्स 85 अंक या 0.10 प्रतिशत गिरकर 83,792 पर और निफ्टी 22 अंक या 0.08 प्रतिशत गिरकर 25,768 पर आ गया।

व्यापक बाजार में, निफ्टी मिडकैप इंडेक्स में 0.24 प्रतिशत और निफ्टी स्मॉलकैप इंडेक्स में 0.52 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई।

सेक्टरवार देखें तो, निफ्टी पीएसयू बैंक इंडेक्स में 0.88 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई, जिसके बाद निफ्टी एफएमसीजी, आईटी और मेटल इंडेक्सों में 0.3 प्रतिशत की गिरावट आई। वहीं, निफ्टी फार्मा इंडेक्स में 0.25 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।

सेंसेक्स पैक में इटरनल, एसबीआई, एचडीएफसी बैंक, टेक महिंद्रा और बीईएल टॉप गेनर्स में शामिल रहे। वहीं, दूसरी ओर एल एंड टी, एचसीएल टेक, ट्रेंट, रिलायंस, एम एंड एम, भारती एयरटेल और टाटा स्टील टॉप लूजर्स में रहे।

जियोजित इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट डॉ. वीके विजयकुमार ने कहा कि वैश्विक भू-राजनीतिक घटनाक्रम और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयान और फैसले आगे भी शेयर बाजारों को प्रभावित करते रहेंगे। ट्रंप द्वारा टैरिफ को एक हथियार की तरह इस्तेमाल करने की नीति पहले ही वैश्विक व्यापार पर असर डाल चुकी है, खासतौर पर उन देशों पर जिन पर दंडात्मक टैरिफ लगाए गए हैं। ट्रंप की हालिया घोषणा कि ईरान के साथ व्यापार करने वाले देशों पर अमेरिका 25 प्रतिशत टैरिफ लगाएगा, यह साफ संकेत देती है कि टैरिफ के जरिए दबाव बनाने की यह नीति आगे भी जारी रहेगी।

उन्होंने कहा कि अन्य देशों को निशाना बनाने के अलावा ट्रंप अपने देश में भी उन लोगों को निशाना बना रहे हैं जो उनकी बात नहीं मानते। फेडरल रिजर्व के प्रमुख जेरोम पॉवेल के खिलाफ लगाए गए आरोप इस बात का उदाहरण हैं कि ट्रंप किसी भी ऐसे व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई करेंगे जो उनकी बात नहीं मानता।

एक्सपर्ट के मुताबिक, अमेरिकी राष्ट्रपति का यह अभूतपूर्व, अस्थिर और अप्रत्याशित व्यवहार आगे भी बाजारों पर दबाव बनाए रखेगा। भारतीय बाजार के नजरिए से देखें तो अमेरिका-भारत व्यापार समझौते की जरूरत उस समय साफ नजर आई, जब अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने यह कहा कि अमेरिका भारत के साथ व्यापार समझौता करने के लिए प्रतिबद्ध है और इस पर बातचीत 13 जनवरी से फिर शुरू होगी। इस बयान के बाद भारतीय शेयर बाजार में जोरदार तेजी देखने को मिली।

उन्होंने आगे कहा कि निकट अवधि में तीसरी तिमाही के नतीजों के दौरान बाजार में समग्र तेजी से ज्यादा अलग-अलग शेयरों में नतीजों के आधार पर उतार-चढ़ाव देखने को मिलेगा।

Point of View

यह स्पष्ट है कि बाजार की वृद्धि और गिरावट का सीधा असर निवेशकों पर पड़ता है। वैश्विक घटनाक्रमों और आर्थिक नीतियों का गहरा संबंध है। हमें हमेशा देश की आर्थिक स्थिति के प्रति सजग रहना चाहिए।

NationPress
13/01/2026

Frequently Asked Questions

भारतीय शेयर बाजार में गिरावट का मुख्य कारण क्या है?
गिरावट का मुख्य कारण अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा लगाए गए 25 प्रतिशत टैरिफ और वैश्विक आर्थिक संकेत हैं।
क्या इस गिरावट का असर भारतीय निवेशकों पर पड़ेगा?
हां, यह गिरावट भारतीय निवेशकों के लिए चिंता का विषय है, क्योंकि यह बाजार की स्थिरता को प्रभावित कर सकती है।
क्या सेंसेक्स और निफ्टी में फिर से तेजी आएगी?
बाजार की स्थिति और वैश्विक घटनाक्रमों के आधार पर तेजी आ सकती है, लेकिन वर्तमान स्थिति में सतर्क रहना उचित है।
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