ईरान को आतंक और नफरत फैलाने वाला देश मानते हैं ट्रंप
सारांश
Key Takeaways
- ईरान को आतंक और नफरत फैलाने वाला देश बताया गया।
- ट्रंप ने ईरान की मौजूदा स्थिति पर चिंता जताई।
- अमेरिकी सेना की ताकत की सराहना की गई।
- ईरान के खिलाफ कदम उठाने की आवश्यकता पर जोर दिया गया।
- अमेरिका और ईरान के बीच तनाव अभी भी उच्च स्तर पर है।
वाशिंगटन, १३ मार्च (राष्ट्र प्रेस)। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान की तीखी निंदा करते हुए इसे "आतंक और नफरत फैलाने वाला देश" करार दिया। उन्होंने कहा कि वर्तमान में ईरान को इसकी गंभीर कीमत चुकानी पड़ रही है। अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित चर्चाओं में ईरान का मुद्दा इस समय मुख्य बना हुआ है।
व्हाइट हाउस में "महिलाओं के इतिहास माह" के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में ट्रंप ने अपने भाषण में कुछ समय के लिए विदेश नीति का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि ईरान के संदर्भ में स्थिति बहुत तेजी से बदल रही है। साथ ही, उन्होंने अमेरिकी सेना की शक्ति की भी सराहना की।
ट्रंप ने कहा, "ईरान वास्तव में आतंक और नफरत फैलाने वाला देश है और उसे इसकी बड़ी कीमत चुकानी पड़ रही है।" उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका की सेना दुनिया में सबसे शक्तिशाली है और इसकी ताकत पहले कभी नहीं देखी गई।
राष्ट्रपति ट्रंप ने संकेत दिया कि ईरान के खिलाफ लिए जा रहे कदम काफी पहले उठाए जाने चाहिए थे।
उन्होंने कहा, "हम वही कर रहे हैं जो करना महत्वपूर्ण है और जो पहले ही कर लेना चाहिए था।" ट्रंप के अनुसार, पिछले लगभग ४७ वर्षों में कई अलग-अलग लोगों को ऐसे कदम उठाने का अवसर मिला।
हालांकि, अपने भाषण के दौरान ट्रंप ने ईरान के खिलाफ अमेरिका की किसी विशेष कार्रवाई की जानकारी नहीं दी। लेकिन उन्होंने यह बताया कि स्थितियाँ तेजी से बदल रही हैं।
ट्रंप ने कहा, "ईरान से संबंधित स्थिति बहुत तेजी से आगे बढ़ रही है और चीजें सकारात्मक दिशा में जा रही हैं।"
हालांकि उनका यह भाषण मुख्य रूप से "महिलाओं के इतिहास माह", कामकाजी माताओं और देश की आर्थिक नीतियों पर केंद्रित था, लेकिन ईरान के संदर्भ में उनकी टिप्पणी से यह स्पष्ट हो गया कि अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा नीति में यह मुद्दा अब भी अत्यंत महत्वपूर्ण है।
काफी समय से ईरान और अमेरिका के बीच तनाव बना हुआ है। विशेषकर ईरान के क्षेत्रीय प्रभाव, कुछ उग्रवादी संगठनों को कथित समर्थन और उसके परमाणु कार्यक्रम के कारण दोनों देशों के संबंधों में खटास आई है।
१९७९ की इस्लामी क्रांति के बाद से अमेरिका और ईरान के रिश्ते लगातार तनावपूर्ण रहे हैं। इस दौरान अमेरिका की विभिन्न सरकारों ने ईरान पर कई तरह के प्रतिबंध लगाए और उसकी सैन्य तथा परमाणु क्षमता को सीमित करने का प्रयास किया।