बलूचिस्तान में कथित फर्जी मुठभेड़: आमिर नूर की हत्या, दो महिलाएं जबरन गायब — मानवाधिकार संगठनों के गंभीर आरोप

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बलूचिस्तान में कथित फर्जी मुठभेड़: आमिर नूर की हत्या, दो महिलाएं जबरन गायब — मानवाधिकार संगठनों के गंभीर आरोप

सारांश

बलूचिस्तान में मानवाधिकार उल्लंघन का एक और भयावह अध्याय — रिहाई के चार दिन बाद आमिर नूर की कथित हत्या और दो महिलाओं का जबरन गायब होना। एचआरसीबी के अनुसार जनवरी 2025 से अब तक रिहा हुए 11 में से 10 लोगों को मार दिया गया है — यह पैटर्न गंभीर सवाल खड़े करता है।

Key Takeaways

आमिर नूर (केच जिला, बलूचिस्तान) की 28 अप्रैल 2026 को बस से उतारकर गोली मारकर हत्या का आरोप; पत्नी और बहन घायल। आमिर नूर को 4 नवंबर 2024 को हिरासत में लिया गया था और 24 अप्रैल 2026 को रिहा किया गया — रिहाई के मात्र 4 दिन बाद हत्या। एचआरसीबी के अनुसार जनवरी 2025 से अप्रैल 2026 के बीच रिहाई के बाद निशाना बनाए गए 11 में से 10 लोगों की मौत हो चुकी है। केच जिले के तेजाबान इलाके से जुबैदा और उनकी बहू जरनाज को कथित तौर पर हिरासत में लिया गया; तब से लापता। जुबैदा के बेटे दौलत की 18 फरवरी को कथित तौर पर हत्या हो चुकी है — अब माँ और पत्नी भी गायब। बलूच महिला फोरम ने तत्काल कार्रवाई की माँग की; पाकिस्तानी अधिकारियों की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं।

बलूचिस्तान मानवाधिकार परिषद (एचआरसीबी) और बलूच महिला फोरम (बीडब्ल्यूएफ) ने 30 अप्रैल 2026 को गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि केच जिले के निवासी आमिर नूर की कथित तौर पर गैर-न्यायिक हत्या की गई और उसी जिले की दो बलूच महिलाओं — जुबैदा और उनकी बहू जरनाज — को जबरन गायब कर दिया गया। इन घटनाओं के लिए पाकिस्तानी सुरक्षा बलों और उनसे जुड़े कथित डेथ स्क्वॉड पर आरोप लगाए गए हैं, हालाँकि पाकिस्तानी अधिकारियों की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।

आमिर नूर की कथित हत्या का घटनाक्रम

एचआरसीबी के अनुसार, केच जिले के तुंप क्षेत्र निवासी आमिर नूर 28 अप्रैल 2026 को अपनी पत्नी और बहन के साथ इलाज के लिए कराची जा रहे थे। रास्ते में उनकी बस को रोककर हथियारबंद लोगों ने उन्हें नीचे उतारा और गोलीबारी कर दी, जिससे उनकी मौके पर ही मृत्यु हो गई। इस हमले में उनकी पत्नी और बहन भी घायल हुईं।

संगठन ने दावा किया कि आमिर नूर को पहले 4 नवंबर 2024 को पाकिस्तानी बलों ने कथित तौर पर जबरन हिरासत में लिया था। लंबे समय तक बंदी बनाए रखने के बाद उन्हें 24 अप्रैल 2026 को रिहा किया गया था — और रिहाई के मात्र चार दिन बाद उनकी हत्या कर दी गई।

रिहाई के बाद निशाना बनाए जाने का गंभीर पैटर्न

एचआरसीबी ने चिंता जताते हुए कहा कि जनवरी 2025 से अप्रैल 2026 के बीच 11 लोगों को जबरन गायब किए जाने के बाद रिहाई मिलने पर निशाना बनाया गया। इनमें से 10 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि एक व्यक्ति हमले में बच गया।

संगठन ने कहा कि इन घटनाओं को कथित तौर पर स्थानीय डेथ स्क्वॉड ने अंजाम दिया, जिससे रिहाई के बाद भी लगातार उत्पीड़न को लेकर गंभीर सवाल उठते हैं। गौरतलब है कि बलूचिस्तान में जबरन गुमशुदगी और कथित न्यायेतर हत्याओं के मामले वर्षों से अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों की चिंता का विषय रहे हैं।

दो महिलाओं के जबरन गायब किए जाने का मामला

बलूच महिला फोरम (बीडब्ल्यूएफ) ने बताया कि केच जिले के तेजाबान इलाके में मंगलवार देर रात छापेमारी के दौरान जुबैदा और उनकी बहू जरनाज को पाकिस्तानी बलों ने कथित तौर पर हिरासत में ले लिया। तब से उनका कोई पता नहीं चल सका है।

फोरम ने बताया कि इससे पहले जुबैदा के बेटे दौलत की 18 फरवरी को कथित तौर पर पाकिस्तान समर्थित डेथ स्क्वॉड द्वारा हत्या किए जाने का आरोप है। अब उनकी माँ और पत्नी के गायब होने से परिवार की पीड़ा और गहरी हो गई है। बीडब्ल्यूएफ ने कहा कि इन घटनाओं से प्रभावित परिवारों में डर, अनिश्चितता और मानसिक तनाव बढ़ा है।

मानवाधिकार संगठनों की माँग

बलूच महिला फोरम ने स्पष्ट कहा कि जबरन गायब किया जाना किसी भी परिस्थिति में स्वीकार्य नहीं है और यह बुनियादी मानवाधिकारों का गंभीर उल्लंघन है। संगठन ने संबंधित संस्थाओं से तत्काल और प्रभावी कदम उठाने की माँग की है, ताकि ऐसी घटनाएँ रोकी जा सकें और प्रभावित परिवारों को राहत मिल सके।

यह ऐसे समय में आया है जब बलूचिस्तान में मानवाधिकार उल्लंघनों को लेकर अंतरराष्ट्रीय दबाव बढ़ रहा है और पाकिस्तान सरकार पर जवाबदेही सुनिश्चित करने की माँग तेज हो रही है।

Point of View

महज़ एक घटना नहीं बल्कि एक सुनियोजित पैटर्न की ओर इशारा करता है — जिसे अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार कानून में 'enforced disappearance followed by extrajudicial execution' कहा जाता है। पाकिस्तानी अधिकारी इन आरोपों को लगातार नकारते रहे हैं, लेकिन स्वतंत्र जाँच की अनुमति देने से भी इनकार करते रहे हैं — यह विरोधाभास खुद में जवाबदेही की कमी को उजागर करता है। बलूचिस्तान में महिलाओं को निशाना बनाना एक नया और अधिक चिंताजनक आयाम है, जिसे मुख्यधारा की कवरेज अक्सर नज़रअंदाज़ करती है। जब तक पाकिस्तान किसी स्वतंत्र अंतरराष्ट्रीय निगरानी तंत्र को अनुमति नहीं देता, ये आरोप सत्यापित नहीं हो सकते — लेकिन इनकी अनदेखी भी नहीं की जा सकती।
NationPress
30/04/2026

Frequently Asked Questions

आमिर नूर कौन थे और उनकी हत्या कैसे हुई?
आमिर नूर बलूचिस्तान के केच जिले के तुंप क्षेत्र के निवासी थे। एचआरसीबी के अनुसार, 28 अप्रैल 2026 को वे अपनी पत्नी और बहन के साथ इलाज के लिए कराची जा रहे थे, जब रास्ते में बस रोककर हथियारबंद लोगों ने उन्हें गोली मार दी और उनकी मौके पर ही मृत्यु हो गई।
जुबैदा और जरनाज को कब और कहाँ से गायब किया गया?
बलूच महिला फोरम के अनुसार, केच जिले के तेजाबान इलाके में मंगलवार देर रात छापेमारी के दौरान जुबैदा और उनकी बहू जरनाज को पाकिस्तानी बलों ने कथित तौर पर हिरासत में लिया। तब से उनका कोई पता नहीं चल सका है।
एचआरसीबी ने रिहाई के बाद हत्या के कितने मामले दर्ज किए हैं?
बलूचिस्तान मानवाधिकार परिषद (एचआरसीबी) के अनुसार जनवरी 2025 से अप्रैल 2026 के बीच 11 ऐसे लोगों को निशाना बनाया गया जिन्हें जबरन गायब करने के बाद रिहा किया गया था। इनमें से 10 की मौत हो चुकी है और एक व्यक्ति हमले में बच गया।
बलूच महिला फोरम ने क्या माँगें रखी हैं?
बलूच महिला फोरम ने संबंधित संस्थाओं से तत्काल और प्रभावी कदम उठाने की माँग की है ताकि जबरन गुमशुदगी की घटनाएँ रोकी जा सकें और प्रभावित परिवारों को राहत मिल सके। संगठन ने कहा कि जबरन गायब किया जाना बुनियादी मानवाधिकारों का गंभीर उल्लंघन है।
बलूचिस्तान में जबरन गुमशुदगी की समस्या कितनी पुरानी है?
बलूचिस्तान में जबरन गुमशुदगी और कथित न्यायेतर हत्याओं के मामले वर्षों से अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों जैसे एमनेस्टी इंटरनेशनल और ह्यूमन राइट्स वॉच की चिंता का विषय रहे हैं। पाकिस्तान सरकार इन आरोपों को नकारती रही है, लेकिन स्वतंत्र जाँच की अनुमति देने से भी इनकार करती रही है।
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