लेबनान राष्ट्रपति जोसेउ आउन ने रेड क्रॉस से की मुलाकात, इजरायली हमलों को बताया मानवाधिकार उल्लंघन
सारांश
Key Takeaways
लेबनान के राष्ट्रपति जोसेउ आउन ने 30 अप्रैल को बेरूत में इंटरनेशनल फेडरेशन ऑफ रेड क्रॉस एंड रेड क्रिसेंट सोसाइटीज (IFRC) के प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात की और दक्षिण लेबनान में जारी इजरायली हमलों को अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार नियमों का उल्लंघन बताते हुए उन्हें तत्काल रोकने की माँग की। राष्ट्रपति कार्यालय के आधिकारिक X (ट्विटर) अकाउंट से जारी बयान के अनुसार, संघर्षविराम की घोषणा के बावजूद दक्षिण लेबनान में हमले बदस्तूर जारी हैं।
मुख्य घटनाक्रम
राष्ट्रपति आउन ने IFRC प्रतिनिधिमंडल के समक्ष स्पष्ट किया कि इन हमलों की जद में केवल आम नागरिक ही नहीं, बल्कि पैरामेडिक्स, सिविल डिफेंस कर्मचारी, राहत कार्यकर्ता और पत्रकार भी आ रहे हैं। उन्होंने बताया कि घरों और पूजा स्थलों को भी क्षति पहुँचाई जा रही है और प्रतिदिन मरने व घायल होने वालों की संख्या बढ़ रही है।
राष्ट्रपति के अनुसार, अब तक लेबनानी रेड क्रॉस और अन्य संगठनों के करीब 17 पैरामेडिक्स और स्वयंसेवकों की जान जा चुकी है। उन्होंने कहा कि बचाव अभियान पहले से सूचित करके चलाए जाते हैं, ताकि कर्मियों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके — फिर भी उन पर हमले हो रहे हैं।
कैदियों की जानकारी पर विवाद
राष्ट्रपति आउन ने यह भी माँग की कि लेबनानी कैदियों की जानकारी साझा करने में मदद की जाए। उनका आरोप है कि इजरायल कैदियों से मिलने या उनके स्वास्थ्य की जानकारी प्राप्त करने के लिए अंतरराष्ट्रीय रेड क्रॉस समिति (ICRC) को अनुमति नहीं दे रहा, जो कि जिनेवा कन्वेंशन के प्रावधानों के विरुद्ध है।
दक्षिण लेबनान में ताज़ा हमले
नेशनल न्यूज एजेंसी के मुताबिक, इजरायली हमलों में 9 लोगों की मौत हो गई। जेबचित में 3 लोगों की जान गई और 7 घायल हुए। टूल में 4 लोगों की मौत और 6 लोग घायल हुए, जबकि हारूफ में 2 लोगों की मौत हुई और एक घर पूरी तरह तबाह हो गया।
इजरायली सेना की नई चेतावनियाँ
इजरायली सेना ने दक्षिण लेबनान के कई कस्बों — अल-समनिएह, अल-हनिएह, अल-कलीला, वादी जिलों, अल-कनिसा, कफ्र, मजदल ज़ून और सिद्दिकीन — के निवासियों को नए चेतावनी संदेश जारी किए हैं, जो हमलों के और तेज होने का संकेत देते हैं। गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब संघर्षविराम समझौते की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर निगरानी की जा रही है। आने वाले दिनों में IFRC और ICRC की भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण हो सकती है, क्योंकि दोनों पक्षों के बीच तनाव कम होने के कोई ठोस संकेत अभी नहीं दिख रहे।