डीयूजेए पर हमला: बांग्लादेश के 370 कैंपस पत्रकारों ने की निंदा, जातीयबादी छात्र दल पर लगाए आरोप

Click to start listening
डीयूजेए पर हमला: बांग्लादेश के 370 कैंपस पत्रकारों ने की निंदा, जातीयबादी छात्र दल पर लगाए आरोप

सारांश

बांग्लादेश में 370 कैंपस पत्रकारों ने डीयूजेए सदस्यों पर हुए हमले की निंदा करते हुए जवाबदेही की माँग की है। आरोप है कि जातीयबादी छात्र दल के 150-200 कार्यकर्ताओं ने शाहबाग थाने के पास ड्यूटी पर तैनात करीब 10 पत्रकारों पर हमला किया। यह घटना बांग्लादेश में प्रेस स्वतंत्रता पर बढ़ते खतरे की ताजा कड़ी है।

Key Takeaways

बांग्लादेश के 370 कैंपस पत्रकारों ने 30 अप्रैल को संयुक्त बयान जारी कर डीयूजेए पर हमले की निंदा की। आरोप है कि जातीयबादी छात्र दल (BNP का छात्र संगठन) के 150-200 कार्यकर्ताओं ने शाहबाग पुलिस स्टेशन के पास पत्रकारों पर हमला किया। इस घटना में करीब 10 पत्रकार घायल हुए, जो अपने पेशेवर कर्तव्यों का निर्वहन कर रहे थे। हमले की पृष्ठभूमि में प्रधानमंत्री तारिक रहमान की बेटी जैमा रहमान से जुड़ा एक कथित फर्जी स्क्रीनशॉट वायरल होना बताया गया। पत्रकारों ने दोषियों की गिरफ्तारी, निष्पक्ष जाँच और ढाका विश्वविद्यालय प्रशासन से सख्त कार्रवाई की माँग की।

बांग्लादेश के करीब 370 कैंपस पत्रकारों ने ढाका यूनिवर्सिटी जर्नलिस्ट एसोसिएशन (डीयूजेए) के सदस्यों पर हुए हालिया हमले की कड़ी निंदा की है और हमलावरों को कठोर दंड दिए जाने की एकजुट माँग उठाई है। 30 अप्रैल को जारी एक संयुक्त बयान में इन पत्रकारों ने इस घटना को स्वतंत्र पत्रकारिता पर सीधा प्रहार करार दिया। स्थानीय मीडिया और द ढाका ट्रिब्यून ने यह रिपोर्ट प्रकाशित की।

मुख्य घटनाक्रम

रिपोर्ट्स के अनुसार, यह हिंसक घटना शाहबाग पुलिस स्टेशन के निकट उस समय हुई जब सोशल मीडिया पर एक कथित आपत्तिजनक टिप्पणी वाला फर्जी स्क्रीनशॉट वायरल हुआ, जो कथित तौर पर प्रधानमंत्री तारिक रहमान की बेटी जैमा रहमान से जुड़ा बताया गया। डीयूजेए के अनुसार, उसके सदस्य उस समय शाहबाग थाने में स्थिति को कवर कर रहे थे, जब उन पर हमला बोला गया।

संगठन ने आरोप लगाया कि बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के छात्र संगठन जातीयबादी छात्र दल के नेताओं ने पहले पत्रकारों को रोका, जिसके बाद 150 से 200 लोगों की भीड़ ने उन पर हमला कर दिया। इस घटना में करीब 10 पत्रकार घायल हो गए।

पत्रकारों की माँगें

संयुक्त बयान में पत्रकारों ने दोषियों की जल्द पहचान कर गिरफ्तारी और कड़ी सजा की माँग की। साथ ही ढाका विश्वविद्यालय प्रशासन से आरोपी छात्रों के विरुद्ध सख्त प्रशासनिक कार्रवाई करने का आग्रह किया गया। पत्रकारों ने सरकार से निष्पक्ष जाँच कराने और कानून प्रवर्तन एजेंसियों की कथित लापरवाही की पड़ताल करने की भी अपील की।

प्रेस स्वतंत्रता पर गंभीर सवाल

बयान में इस हमले को लोकतांत्रिक मूल्यों के विरुद्ध बताया गया। हस्ताक्षरकर्ताओं ने कहा कि पत्रकारों पर हमले, उत्पीड़न और धमकी की घटनाएँ अलग-थलग नहीं हैं, बल्कि एक व्यापक प्रवृत्ति का हिस्सा हैं। गौरतलब है कि बांग्लादेश में हाल के वर्षों में मीडियाकर्मियों पर हमलों की घटनाएँ चिंताजनक रूप से बढ़ी हैं।

पत्रकारों ने कहा,

Point of View

लेकिन असली परीक्षा यह होगी कि क्या अधिकारी दोषियों को वास्तव में जवाबदेह ठहराते हैं या यह भी उन घटनाओं की सूची में जुड़ जाती है जो बिना न्याय के दब जाती हैं।
NationPress
30/04/2026

Frequently Asked Questions

डीयूजेए पर हमला कब और कहाँ हुआ?
यह हमला बांग्लादेश की राजधानी ढाका में शाहबाग पुलिस स्टेशन के निकट हुआ, जब ढाका यूनिवर्सिटी जर्नलिस्ट एसोसिएशन (डीयूजेए) के सदस्य वहाँ की स्थिति को कवर कर रहे थे। इस घटना में करीब 10 पत्रकार घायल हुए।
हमले के पीछे क्या कारण बताया गया?
रिपोर्ट्स के अनुसार, सोशल मीडिया पर प्रधानमंत्री तारिक रहमान की बेटी जैमा रहमान से जुड़ा एक कथित फर्जी आपत्तिजनक स्क्रीनशॉट वायरल होने के बाद तनाव भड़का। डीयूजेए का आरोप है कि जातीयबादी छात्र दल के कार्यकर्ताओं ने इसी माहौल में पत्रकारों पर हमला बोला।
370 कैंपस पत्रकारों ने क्या माँगें रखी हैं?
पत्रकारों ने दोषियों की जल्द पहचान और गिरफ्तारी, कड़ी सजा, ढाका विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा आरोपी छात्रों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई और सरकार से निष्पक्ष जाँच की माँग की। उन्होंने कानून प्रवर्तन एजेंसियों की कथित लापरवाही की भी जाँच माँगी है।
जातीयबादी छात्र दल क्या है?
जातीयबादी छात्र दल बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) का छात्र संगठन है। डीयूजेए ने आरोप लगाया है कि इसी संगठन के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने पत्रकारों को पहले रोका और फिर 150-200 की भीड़ ने हमला किया।
यह घटना बांग्लादेश में प्रेस स्वतंत्रता के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?
पत्रकारों का कहना है कि यह हमला अलग-थलग घटना नहीं, बल्कि बांग्लादेश में पत्रकारों पर बढ़ते हमलों और उत्पीड़न की व्यापक प्रवृत्ति का हिस्सा है। यह घटना ऐसे समय में हुई जब देश में राजनीतिक तनाव के बीच मीडिया की स्वतंत्रता पहले से ही दबाव में है।
Nation Press