बुद्ध पूर्णिमा 2025: CM पुष्कर सिंह धामी ने दी शुभकामनाएं, बोले — महात्मा बुद्ध का संदेश मानवता की अमूल्य निधि
सारांश
Key Takeaways
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बुद्ध पूर्णिमा की पूर्व संध्या पर 30 अप्रैल को प्रदेशवासियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि महात्मा बुद्ध का अहिंसा, करुणा और शांति का संदेश संपूर्ण मानवता के लिए अमूल्य निधि है। बैशाख पूर्णिमा पर 1 मई को मनाई जाने वाली बुद्ध जयंती के अवसर पर जारी इस संदेश में उन्होंने महात्मा बुद्ध की शिक्षाओं की समकालीन प्रासंगिकता को रेखांकित किया।
मुख्यमंत्री का संदेश
मुख्यमंत्री धामी ने अपने संदेश में कहा कि महात्मा बुद्ध की शिक्षाएं मनुष्य को जीवन में नैतिक मूल्यों और अपने कर्तव्यों के प्रति सदैव जागरूक रहने की प्रेरणा देती हैं। उन्होंने यह भी कहा कि महात्मा बुद्ध ने विश्व कल्याण के लिए मैत्री भावना और बिना किसी भेदभाव के संगठित रहने पर विशेष बल दिया था। धामी के अनुसार, मानव मात्र के लिए उनके संदेश सदैव प्रासंगिक बने रहेंगे।
बुद्ध पूर्णिमा का धार्मिक महत्व
सनातन धर्म में पंचांग का विशेष महत्व है। तिथि, वार, योग, करण और नक्षत्र — इन पाँचों अंगों के आधार पर ही दिन की शुरुआत और शुभ-अशुभ समय का निर्धारण किया जाता है। हिंदू पंचांग के अनुसार 1 मई को पड़ने वाली बैशाख पूर्णिमा धार्मिक और शुभ कार्यों के लिए विशेष महत्व रखती है।
पूर्णिमा के शुभ मुहूर्त और खगोलीय विवरण
पंचांग के अनुसार 1 मई को पूर्णिमा तिथि रात 10 बजकर 52 मिनट तक रहेगी। इस दिन अभिजीत मुहूर्त और विजय मुहूर्त एक साथ पड़ रहे हैं, जिसे शुभ कार्यों के लिए अत्यंत उत्तम माना जाता है। सूर्योदय प्रातः 5 बजकर 41 मिनट पर होगा और सूर्यास्त सायं 6 बजकर 56 मिनट पर। चंद्रोदय शाम 6 बजकर 52 मिनट पर होगा, जबकि चंद्रास्त 2 मई की सुबह 5 बजकर 32 मिनट पर होगा।
महात्मा बुद्ध की शिक्षाओं की आज भी प्रासंगिकता
गौरतलब है कि बुद्ध पूर्णिमा केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि यह मानवीय मूल्यों के पुनर्स्मरण का अवसर भी है। महात्मा बुद्ध के उपदेश — सम्यक विचार, सम्यक वाणी और सम्यक कर्म — आज के संघर्षपूर्ण वैश्विक परिदृश्य में और भी अधिक प्रासंगिक प्रतीत होते हैं। उत्तराखंड जैसे राज्य में, जहाँ बौद्ध धर्म की समृद्ध परंपरा रही है, यह पर्व सांस्कृतिक और आध्यात्मिक दोनों दृष्टियों से महत्वपूर्ण है। आने वाले समय में इस पर्व को लेकर राज्य भर में धार्मिक आयोजन और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाने की संभावना है।