उत्तराखंड कैबिनेट ने 17 प्रस्तावों को दी मंजूरी: कुंभ 2027, 250 बसें, वन नियम में बड़े बदलाव

Click to start listening
उत्तराखंड कैबिनेट ने 17 प्रस्तावों को दी मंजूरी: कुंभ 2027, 250 बसें, वन नियम में बड़े बदलाव

सारांश

उत्तराखंड कैबिनेट की एक बैठक में 17 बड़े फैसले — 250 नई बसें, कुंभ 2027 की तैयारियों में तेज़ी, वन दरोगा के लिए स्नातक अनिवार्य और एसिड अटैक पीड़ितों को निःशुल्क कानूनी सेवा। मुख्यमंत्री धामी की अगुवाई में लिए गए ये निर्णय राज्य के प्रशासनिक ढाँचे को व्यापक रूप से प्रभावित करेंगे।

Key Takeaways

उत्तराखंड कैबिनेट ने 30 अप्रैल 2026 को 17 प्रस्तावों को मंजूरी दी। परिवहन विभाग को 250 बसें खरीदने की अनुमति; जीएसटी दर घटने से पूर्व स्वीकृत 100 बसों की संख्या 109 हुई। कुंभ मेला 2027 के लिए ₹1 करोड़ तक के कार्य मेलाधिकारी और ₹5 करोड़ तक के कार्य गढ़वाल मंडल आयुक्त से स्वीकृत होंगे। वन दरोगा की न्यूनतम योग्यता इंटरमीडिएट से बढ़ाकर स्नातक ; आयु सीमा 21-35 वर्ष निर्धारित। एसिड अटैक पीड़ितों को निःशुल्क विधिक सेवाओं के दायरे में शामिल किया गया। खनन रॉयल्टी दर ₹7 से बढ़ाकर ₹8 प्रति यूनिट की गई।

उत्तराखंड मंत्रिमंडल ने 30 अप्रैल 2026 को देहरादून में हुई कैबिनेट बैठक में परिवहन, औद्योगिक विकास, शिक्षा, वन और अल्पसंख्यक कल्याण सहित विभिन्न विभागों से जुड़े 17 अहम प्रस्तावों को मंजूरी दी। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में राज्य के सुशासन और जनकल्याण को केंद्र में रखते हुए कई नीतिगत निर्णय लिए गए।

मुख्य घटनाक्रम

सबसे प्रमुख निर्णय के तहत मोटर यान (संशोधन) नियमावली 2026 को कैबिनेट की स्वीकृति मिली। इसके अंतर्गत परिवहन विभाग में पूर्व में सृजित पदों के सापेक्ष वर्दी निर्धारण को मंजूरी दी गई है। पुलिस विभाग के अनुरूप अब प्रवर्तन चालकों के लिए भी वर्दी तय की जाएगी।

कैबिनेट ने परिवहन विभाग को 250 बसें खरीदने की अनुमति दी। इसके अतिरिक्त, जीएसटी दर 28 प्रतिशत से घटकर 18 प्रतिशत होने के चलते पूर्व में स्वीकृत 100 बसों की संख्या संशोधित कर 109 बसें क्रय करने की अनुमति दी गई।

कुंभ मेला 2027 की तैयारियों को गति

हरिद्वार में प्रस्तावित कुंभ मेला 2027 के स्थायी एवं अस्थायी निर्माण कार्यों की स्वीकृति प्रक्रिया को सरल बनाया गया है। अब ₹1 करोड़ तक के कार्य मेलाधिकारी स्तर से और ₹5 करोड़ तक के कार्य गढ़वाल मंडल के आयुक्त स्तर से स्वीकृत होंगे। इससे अधिक लागत वाले कार्यों के लिए पूर्ववत शासन से मंजूरी आवश्यक होगी।

विधिक सेवाएँ और खनन नियमों में संशोधन

उत्तराखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (संशोधन) नियमावली 2026 के तहत जिला सैनिक कल्याण अधिकारी को जिला विधिक सेवा प्राधिकरण में पदेन सदस्य बनाया गया है। उल्लेखनीय है कि एसिड अटैक पीड़ितों को भी अब निःशुल्क विधिक सेवाओं के दायरे में शामिल किया गया है।

औद्योगिक विकास विभाग के अंतर्गत उपखनिज परिहार नियमावली 2023 में संशोधन करते हुए रॉयल्टी दर ₹7 से बढ़ाकर ₹8 प्रति यूनिट कर दी गई है। आबकारी नीति के अनुरूप 6 प्रतिशत वैट दर संशोधन को भी स्वीकृति मिली।

शिक्षा और वन सेवा नियमों में बदलाव

उत्तराखंड अधीनस्थ वन सेवा नियमावली 2016 में संशोधन करते हुए वन दरोगा के लिए न्यूनतम शैक्षिक योग्यता इंटरमीडिएट से बढ़ाकर स्नातक कर दी गई है। वन दरोगा के लिए आयु सीमा 21 से 35 वर्ष और वन आरक्षी के लिए 18 से 25 वर्ष निर्धारित की गई है।

उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा अधिनियम 2025 के तहत कक्षा 1 से 8 तक के संस्थानों की संबद्धता जिला स्तर पर और कक्षा 9 से 12 तक के संस्थानों की संबद्धता विद्यालयी शिक्षा परिषद रामनगर से अनिवार्य की गई है। इसके लिए अध्यादेश लाने को भी मंजूरी दी गई।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत उच्च शिक्षा शोध प्रोत्साहन योजना को अनुदानित महाविद्यालयों तक विस्तारित किया गया। उत्तराखंड संस्कृत शिक्षा शैक्षिक संवर्ग सेवा नियमावली 2026 को लागू कर शिक्षकों के पदोन्नति मार्ग को स्पष्ट किया गया।

अन्य अहम फैसले

लोक निर्माण विभाग में दिव्यांग श्रेणी के पदों के सृजन को स्वीकृति मिली। अधिप्राप्ति नियमावली के तहत 'डी' श्रेणी ठेकेदारों की निविदा सीमा ₹1 करोड़ से बढ़ाकर ₹1.5 करोड़ की गई। वन क्षेत्रों की सीमा पर मधुमक्खी पालन को बढ़ावा देने के लिए नई नीति को मंजूरी दी गई, जिसका उद्देश्य स्थानीय लोगों की आय बढ़ाना, स्वरोजगार को प्रोत्साहन देना और मानव-हाथी संघर्ष को कम करना है। यह ऐसे समय में आया है जब उत्तराखंड में मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाएँ लगातार चिंता का विषय बनी हुई हैं।

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि ये निर्णय प्रदेश के विकास को नई गति देंगे और सरकार जनहित सर्वोपरि के संकल्प के साथ उत्तराखंड के सर्वांगीण विकास के लिए निरंतर कार्यरत है।

Point of View

लेकिन इसकी असली परीक्षा क्रियान्वयन में होगी। कुंभ 2027 की तैयारियों में वित्तीय स्वीकृति का विकेंद्रीकरण स्वागत योग्य है, परंतु जवाबदेही तंत्र के बिना यह भ्रष्टाचार के नए द्वार भी खोल सकता है। वन दरोगा के लिए स्नातक योग्यता अनिवार्य करना दीर्घकालिक दृष्टि से सही कदम है, लेकिन पहाड़ी जिलों में जहाँ उच्च शिक्षा की पहुँच सीमित है, वहाँ यह योग्य उम्मीदवारों को बाहर कर सकता है। एसिड अटैक पीड़ितों को निःशुल्क विधिक सेवाओं में शामिल करना एक सकारात्मक और संवेदनशील कदम है जो मुख्यधारा की कवरेज में अक्सर नज़रअंदाज़ हो जाता है।
NationPress
30/04/2026

Frequently Asked Questions

उत्तराखंड कैबिनेट ने 30 अप्रैल 2026 को कितने प्रस्तावों को मंजूरी दी?
उत्तराखंड मंत्रिमंडल ने 30 अप्रैल 2026 को हुई बैठक में 17 अहम प्रस्तावों को मंजूरी दी। इनमें परिवहन, शिक्षा, वन, खनन और अल्पसंख्यक कल्याण से जुड़े नीतिगत निर्णय शामिल हैं।
कुंभ मेला 2027 के निर्माण कार्यों की स्वीकृति प्रक्रिया में क्या बदलाव हुआ?
अब ₹1 करोड़ तक के कार्य मेलाधिकारी स्तर से और ₹5 करोड़ तक के कार्य गढ़वाल मंडल के आयुक्त स्तर से स्वीकृत होंगे। इससे अधिक लागत वाले कार्यों के लिए पूर्ववत शासन से मंजूरी आवश्यक रहेगी।
उत्तराखंड में वन दरोगा के लिए नई शैक्षिक योग्यता क्या है?
उत्तराखंड अधीनस्थ वन सेवा नियमावली 2016 में संशोधन के बाद वन दरोगा के लिए न्यूनतम योग्यता इंटरमीडिएट से बढ़ाकर स्नातक कर दी गई है। आयु सीमा 21 से 35 वर्ष निर्धारित की गई है।
उत्तराखंड में खनन रॉयल्टी दर में क्या बदलाव हुआ?
उपखनिज परिहार नियमावली 2023 में संशोधन कर रॉयल्टी दर ₹7 से बढ़ाकर ₹8 प्रति यूनिट कर दी गई है। यह निर्णय औद्योगिक विकास विभाग के अंतर्गत लिया गया है।
एसिड अटैक पीड़ितों को उत्तराखंड में क्या नई सुविधा मिली?
उत्तराखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (संशोधन) नियमावली 2026 के तहत एसिड अटैक पीड़ितों को अब निःशुल्क विधिक सेवाओं के दायरे में शामिल किया गया है। इसके साथ ही जिला सैनिक कल्याण अधिकारी को जिला विधिक सेवा प्राधिकरण में पदेन सदस्य बनाया गया है।
Nation Press