जेईएम को बड़ा झटका: बहावलपुर में शीर्ष कमांडर मौलाना सलमान की रहस्यमयी मौत, आतंकी संगठनों में नेतृत्व संकट गहराया
सारांश
Key Takeaways
पाकिस्तान के बहावलपुर में जैश-ए-मोहम्मद (JEM) के शीर्ष कमांडर मौलाना सलमान की 30 अप्रैल 2026 को एक अज्ञात वाहन की टक्कर से मौत हो गई। सलमान, JEM प्रमुख मसूद अजहर का करीबी सहयोगी था और उसका नाम भारत में हुए कई बड़े आतंकी हमलों से जोड़ा जाता रहा है। सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार यह घटना संगठन के लिए एक और गंभीर आघात है।
मुख्य घटनाक्रम
मौलाना सलमान को बहावलपुर स्थित मार्कज सुभानअल्लाह में दफनाया गया। खबरों के मुताबिक, अंतिम संस्कार में पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई (ISI) के कुछ अधिकारी भी मौजूद थे। सूत्रों के अनुसार, सलमान इससे पहले ऑपरेशन सिंदूर के दौरान जैश के ठिकाने पर हुए हमले में घायल हो गया था, जिसमें संगठन के कई वरिष्ठ सदस्य और मसूद अजहर के करीबी परिजन मारे गए थे।
सलमान का नाम 2001 के भारतीय संसद पर हमले और 2019 के पुलवामा आतंकी हमले से जोड़ा जाता रहा है। उसकी मौत को JEM की परिचालन क्षमता पर एक और प्रत्यक्ष प्रहार माना जा रहा है।
रहस्यमयी हत्याओं का बढ़ता सिलसिला
यह ऐसे समय में आया है जब पाकिस्तान में आतंकी संगठनों के शीर्ष नेताओं पर हमलों की एक श्रृंखला सामने आ रही है। महज दो दिन पहले लश्कर-ए-तैयबा (LeT) के कमांडर शेख यूसुफ अफरीदी की खैबर पख्तूनख्वा में अज्ञात हमलावरों ने हत्या कर दी थी।
गौरतलब है कि पिछले साल JEM के रणनीतिकार मौलाना अब्दुल अजीज अजार की भी संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हुई थी, जिसे आधिकारिक तौर पर हार्ट अटैक बताया गया। इस साल अप्रैल में लश्कर के संस्थापक सदस्यों में से एक मौलाना आमिर हमजा पर भी हमला हुआ, जिसमें वह बच निकले।
आतंकी संगठनों पर असर
सूत्रों के अनुसार, इन लगातार हो रही घटनाओं से JEM और LeT दोनों संगठनों को नेतृत्व स्तर पर भारी नुकसान उठाना पड़ा है और संकट गहरा गया है। मसूद अजहर की सेहत को लेकर भी कथित तौर पर चिंताएँ जताई जा रही हैं।
पाकिस्तानी मीडिया में अजहर से जुड़ी खबरों पर अनौपचारिक रोक की भी चर्चा है। लश्कर में भी नेतृत्व को लेकर सवाल उठ रहे हैं और नए, युवा नेतृत्व की माँग तेज हो रही है।
नेतृत्व संकट और ISI की भूमिका
बताया जा रहा है कि ISI के मार्गदर्शन में JEM नए नेतृत्व को सामने लाने की कोशिश कर रहा है। विश्लेषकों का मानना है कि यह घटनाक्रम दोनों संगठनों की संरचनात्मक कमज़ोरी को उजागर करता है और उनकी परिचालन क्षमता पर दीर्घकालिक प्रभाव डाल सकता है।
आगे क्या
इन घटनाओं के बाद पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठनों के भविष्य पर सवाल उठने लगे हैं। सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, नेतृत्व शून्यता के बीच इन संगठनों में आंतरिक खींचतान और पुनर्गठन की प्रक्रिया तेज़ हो सकती है।