बोकारो कोषागार घोटाला: सीआईडी ने ₹1.98 करोड़ फ्रीज किए, ₹10 करोड़ के मनी ट्रेल का खुलासा
सारांश
Key Takeaways
झारखंड के बोकारो जिला कोषागार से अवैध तरीके से सरकारी राशि की निकासी के मामले में अपराध अनुसंधान विभाग (सीआईडी) ने 30 अप्रैल 2026 को बड़ी कार्रवाई करते हुए अब तक करीब ₹1.98 करोड़ की राशि फ्रीज कर दी है। आईजी पंकज कंबोज के नेतृत्व में गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) ने जांच में ₹10 करोड़ के मनी ट्रेल का भी खुलासा किया है। मुख्य आरोपियों को पहले ही गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है।
मनी ट्रेल और फ्रीज की गई राशि
सीआईडी के अनुसार, जांच में पाया गया कि सरकारी धन को अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर किया गया था। त्वरित कार्रवाई करते हुए पुलिस ने विभिन्न बैंकों में ट्रांसफर किए गए लगभग ₹1.80 करोड़ को फ्रीज कर दिया है। इसके अलावा ₹18 लाख के फिक्स्ड डिपॉजिट को भी सीज किया गया है। इस प्रकार कुल फ्रीज की गई राशि ₹1.98 करोड़ है, जबकि समग्र मनी ट्रेल ₹10 करोड़ तक का बताया जा रहा है।
छापेमारी और बरामद दस्तावेज
जांच के क्रम में एसआईटी ने आरोपी अशोक कुमार भंडारी के ठिकानों पर छापेमारी की। भंडारी बोकारो के पुलिस अधीक्षक कार्यालय के अकाउंट सेक्शन में प्रतिनियुक्त थे। छापेमारी के दौरान उनकी संपत्तियों से जुड़े कई महत्वपूर्ण दस्तावेज बरामद किए गए।
जब्त दस्तावेजों के मुताबिक, तेलीडीह, बोकारो में 4.08 डिसमिल भूमि, उसी जमीन पर बना तीन मंजिला मकान और तेलीडीह में ही 4.98 डिसमिल की एक अन्य जमीन का पता चला है। यह ऐसे समय में आया है जब झारखंड में सरकारी कोषागारों की निगरानी व्यवस्था पर पहले से सवाल उठते रहे हैं।
गिरफ्तार आरोपी
इस घोटाले में अब तक गिरफ्तार किए गए प्रमुख आरोपियों में तत्कालीन लेखापाल कौशल कुमार पांडेय, सतीश कुमार और अशोक कुमार भंडारी शामिल हैं। अधिकारियों ने बताया कि तीनों को पहले ही जेल भेजा जा चुका है।
आगे की जांच का दायरा
सीआईडी ने संकेत दिया है कि मामले में अन्य संलिप्त व्यक्तियों की पहचान कर आगे भी कार्रवाई जारी रहेगी। जांच एजेंसी यह भी खंगाल रही है कि अवैध निकासी की प्रक्रिया में किन-किन स्तरों पर लापरवाही या मिलीभगत हुई और क्या इसमें किसी अन्य अधिकारी या बाहरी नेटवर्क की भूमिका रही है। गौरतलब है कि यह मामला सरकारी कोषागार प्रणाली में आंतरिक नियंत्रण की खामियों को उजागर करता है।