ग्रेट निकोबार परियोजना पर राहुल गांधी के आरोप गलत और भ्रामक: सेवानिवृत्त एयर चीफ मार्शल आरकेएस भदौरिया

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ग्रेट निकोबार परियोजना पर राहुल गांधी के आरोप गलत और भ्रामक: सेवानिवृत्त एयर चीफ मार्शल आरकेएस भदौरिया

सारांश

ग्रेट निकोबार परियोजना पर राहुल गांधी के पर्यावरण और आदिवासी हितों के आरोपों को सेवानिवृत्त एयर चीफ मार्शल आरकेएस भदौरिया ने सिरे से खारिज किया। ₹72,000 करोड़ की यह परियोजना मलक्का जलडमरूमध्य से 150 किमी दूर भारत की सामरिक और आर्थिक ताकत का नया केंद्र बनने जा रही है।

Key Takeaways

सेवानिवृत्त एयर चीफ मार्शल आरकेएस भदौरिया ने 30 अप्रैल को राहुल गांधी के ग्रेट निकोबार परियोजना संबंधी बयान को गलत और भ्रामक बताया। ग्रेट निकोबार परियोजना नीति आयोग द्वारा 2021 में शुरू की गई एकीकृत योजना है, जिसका परिव्यय ₹72,000 करोड़ है। परियोजना में 16.2 मिलियन टीईयू क्षमता का अंतरराष्ट्रीय बंदरगाह, हवाई अड्डा, 450 मेगावाट पावर प्लांट और आधुनिक टाउनशिप शामिल है। यह स्थान मलक्का जलडमरूमध्य से मात्र 150 किलोमीटर दूर है, जहाँ से दुनिया का 25-30% समुद्री व्यापार गुजरता है। शहर की भावी क्षमता 6 से 6.5 लाख लोगों की होगी; वर्तमान में 8,000 निवासी।

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी द्वारा ग्रेट निकोबार परियोजना का विरोध किए जाने पर सेवानिवृत्त एयर चीफ मार्शल आरकेएस भदौरिया ने 30 अप्रैल को पलटवार करते हुए उनके बयान को पूरी तरह गलत और भ्रामक करार दिया। नई दिल्ली में समाचार एजेंसी राष्ट्र प्रेस से बातचीत में भदौरिया ने कहा कि यह परियोजना देश के रणनीतिक और आर्थिक हितों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है और पर्यावरण तथा आदिवासी हितों का पूरा ध्यान रखा जाता है।

परियोजना का परिचय और वित्तीय ढाँचा

भदौरिया ने बताया कि ग्रेट निकोबार परियोजना नीति आयोग द्वारा वर्ष 2021 में शुरू की गई एक एकीकृत विकास योजना है, जिसका कुल परिव्यय लगभग ₹72,000 करोड़ है। इस परियोजना के तहत 16.2 मिलियन टीईयू क्षमता वाले एक अंतरराष्ट्रीय बंदरगाह का निर्माण किया जाएगा, जो नागरिक शिपिंग के साथ-साथ भारतीय नौसेना की क्षमता बढ़ाने में भी सहायक होगा।

इसके अलावा एक अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा भी बनेगा, जिसमें नागरिक उपयोग के साथ-साथ एक डिफेंस एन्क्लेव भी शामिल होगा। 450 मेगावाट क्षमता का गैस और सौर ऊर्जा आधारित पावर प्लांट तथा एक आधुनिक टाउनशिप का विकास भी इस परियोजना का हिस्सा है।

रणनीतिक महत्व

भदौरिया ने रणनीतिक दृष्टिकोण पर जोर देते हुए कहा कि यह परियोजना मलक्का जलडमरूमध्य से मात्र 150 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। उन्होंने बताया कि दुनिया का 25-30 प्रतिशत समुद्री व्यापार इसी जलडमरूमध्य से गुजरता है और चीन की ऊर्जा निर्भरता का लगभग 75 प्रतिशत व्यापार भी इसी मार्ग से होता है।

उन्होंने कहा कि समुद्री और हवाई क्षेत्र की जागरूकता बढ़ाने तथा बहु-क्षेत्रीय क्षमता निर्माण के लिए यह परियोजना अनिवार्य है और यह एक अजेय ठिकाना बनेगा।

आर्थिक लाभ और कोलंबो-सिंगापुर पर निर्भरता में कमी

आर्थिक पहलू पर भदौरिया ने कहा कि इस परियोजना के पूरा होने से कोलंबो और सिंगापुर जैसे बंदरगाहों पर भारत की निर्भरता घटेगी और पूरे क्षेत्र का समग्र विकास होगा। यह ऐसे समय में आया है जब भारत वैश्विक शिपिंग हब बनने की दिशा में तेजी से काम कर रहा है।

वर्तमान में इस स्मार्ट सिटी क्षेत्र में लगभग 8,000 लोग रहते हैं, जबकि विकसित होने पर शहर की क्षमता 6 से 6.5 लाख लोगों की होगी।

राहुल गांधी के आरोपों पर सीधा जवाब

राहुल गांधी ने परियोजना पर पर्यावरण को नुकसान, आदिवासी हितों के विरुद्ध होने, पेड़ काटे जाने और घोटाले जैसे गंभीर आरोप लगाए थे। इस पर भदौरिया ने स्पष्ट शब्दों में कहा,

Point of View

लेकिन असली सवाल यह है कि ₹72,000 करोड़ की इस परियोजना में पर्यावरणीय मंजूरियाँ और आदिवासी परामर्श प्रक्रिया कितनी पारदर्शी रही है। यह ऐसे समय में विशेष रूप से प्रासंगिक है जब देश में बड़ी बुनियादी ढाँचा परियोजनाओं में वन और जनजातीय अधिकारों के उल्लंघन के आरोप बार-बार उठते रहे हैं। मलक्का जलडमरूमध्य के पास सामरिक उपस्थिति की ज़रूरत से कोई इनकार नहीं कर सकता, लेकिन विकास और जनजातीय अधिकारों के बीच संतुलन केवल आश्वासनों से नहीं, बल्कि स्वतंत्र निगरानी तंत्र से ही सुनिश्चित होगा।
NationPress
30/04/2026

Frequently Asked Questions

ग्रेट निकोबार परियोजना क्या है?
ग्रेट निकोबार परियोजना नीति आयोग द्वारा 2021 में शुरू की गई ₹72,000 करोड़ की एकीकृत विकास योजना है। इसमें अंतरराष्ट्रीय बंदरगाह, हवाई अड्डा, 450 मेगावाट पावर प्लांट और एक आधुनिक टाउनशिप शामिल है।
राहुल गांधी ने ग्रेट निकोबार परियोजना पर क्या आरोप लगाए?
राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि यह परियोजना पर्यावरण को नुकसान पहुँचा रही है, आदिवासी हितों के खिलाफ है, पेड़ काटे जा रहे हैं और यह एक बड़ा घोटाला है। सेवानिवृत्त एयर चीफ मार्शल आरकेएस भदौरिया ने इन सभी आरोपों को पूरी तरह गलत और भ्रामक बताया है।
ग्रेट निकोबार का रणनीतिक महत्व क्यों है?
ग्रेट निकोबार मलक्का जलडमरूमध्य से मात्र 150 किलोमीटर दूर है, जहाँ से दुनिया का 25-30% समुद्री व्यापार और चीन की ऊर्जा निर्भरता का लगभग 75% व्यापार गुजरता है। यह भारतीय नौसेना की क्षमता बढ़ाने और समुद्री निगरानी के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है।
इस परियोजना से आदिवासी समुदायों पर क्या असर होगा?
भदौरिया के अनुसार, आदिवासी हितों का अर्थ उन्हें पुरानी स्थिति में बनाए रखना नहीं है और विकास व जनजातीय संस्कृति के बीच संतुलन ज़रूरी है। सरकार का कहना है कि सभी वैधानिक मंजूरियाँ ली जाती हैं और आदिवासी निकायों तथा जनजातीय मामलों के मंत्रालय को भी प्रक्रिया में शामिल किया जाता है।
क्या पिछली सरकारें भी इस परियोजना के पक्ष में थीं?
भदौरिया ने बताया कि पिछले 20 वर्षों से रक्षा सेवाएं इस क्षेत्र के विकास की माँग कर रही थीं और पूर्व रक्षा मंत्री एके एंटनी भी इस विकास के पक्ष में थे। पिछली सरकार ने भी सैद्धांतिक रूप से इसका समर्थन किया था।
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