भीषण गर्मी और लू से बचाव: AIIA के आयुर्वेदिक उपाय जो देंगे तुरंत राहत
सारांश
Key Takeaways
ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ आयुर्वेद (AIIA) ने 30 अप्रैल 2026 को भीषण गर्मी और लू के बढ़ते प्रकोप के बीच आमजन से अपील की है कि वे आयुर्वेदिक दिनचर्या और घरेलू नुस्खों को अपनाकर डिहाइड्रेशन, थकान और पाचन संबंधी समस्याओं से बच सकते हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, गर्मी के मौसम में शरीर को ठंडक और नमी बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।
गर्मी में शरीर पर क्या असर पड़ता है
आयुर्वेद विशेषज्ञों का मानना है कि तेज़ धूप और लू के कारण शरीर में पित्त दोष बढ़ जाता है, जिससे थकान, चक्कर आना, अत्यधिक पसीना और पाचन तंत्र की गड़बड़ी जैसी समस्याएँ सामने आती हैं। यह ऐसे समय में और गंभीर हो जाता है जब दोपहर का तापमान कई शहरों में 44 से 47 डिग्री सेल्सियस तक पहुँच जाता है। गौरतलब है कि डिहाइड्रेशन और हीटस्ट्रोक गर्मी से होने वाली सबसे सामान्य लेकिन खतरनाक स्थितियाँ हैं।
AIIA के प्रमुख आयुर्वेदिक उपाय
तुलसी के बीज: AIIA की सलाह है कि तुलसी के बीजों को रात भर पानी में भिगोकर सुबह उस पानी का सेवन करें। यह शरीर को प्राकृतिक ठंडक देता है और पाचन क्रिया को भी बेहतर बनाता है।
खस, चंदन और मोगरा: इन तीनों को पानी में भिगोकर रखें और उस पानी को पीएँ। विशेषज्ञों के अनुसार, यह मिश्रण शरीर का तापमान नियंत्रित रखने और गर्मी से उत्पन्न थकान को कम करने में सहायक है।
सफेद प्याज: गर्मी के मौसम में सफेद प्याज का नियमित सेवन शरीर के तापमान को संतुलित रखने में मदद करता है। यह एक सरल और सुलभ उपाय है जिसे दैनिक आहार में शामिल किया जा सकता है।
आहार और जीवनशैली में ज़रूरी बदलाव
संस्थान ने सलाह दी है कि गर्मी में भारी, तला-भुना और अत्यधिक मसालेदार भोजन से परहेज़ करें। इसके बजाय फल, सब्जियाँ, दही, छाछ और सलाद को आहार में प्रमुखता दें। दिनभर में पर्याप्त मात्रा में पानी और अन्य तरल पदार्थों का सेवन करते रहें, ताकि शरीर में नमी बनी रहे।
धूप में निकलते समय सावधानियाँ
विशेषज्ञों ने विशेष रूप से दोपहर 12 बजे से शाम 4 बजे के बीच बाहर निकलने से बचने की सलाह दी है, क्योंकि इस दौरान सूर्य की किरणें सबसे तीव्र होती हैं। यदि बाहर जाना अनिवार्य हो, तो छाता, टोपी, धूप का चश्मा और हल्के रंग के ढीले सूती कपड़े पहनना आवश्यक है। इन सरल सावधानियों को अपनाकर हीटस्ट्रोक के जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
आयुर्वेद विशेषज्ञों का कहना है कि इन उपायों को नियमित रूप से अपनाने पर गर्मी से जुड़ी अधिकांश स्वास्थ्य समस्याओं से बचाव संभव है — और आने वाले हफ्तों में जैसे-जैसे तापमान और बढ़ेगा, ये सावधानियाँ और भी ज़रूरी हो जाएँगी।