कपालभाति प्राणायाम: सांस की तकलीफ, साइनस और ब्रोंकियल इन्फेक्शन में आयुष मंत्रालय की सलाह
सारांश
Key Takeaways
- आयुष मंत्रालय ने 30 अप्रैल 2026 को कपालभाति प्राणायाम को श्वसन स्वास्थ्य के लिए अनुशंसित किया।
- साइनस कंजेशन, राइनाइटिस, साइनसाइटिस, अस्थमा और ब्रोंकियल इन्फेक्शन में विशेष रूप से लाभकारी बताया गया।
- कपालभाति से फेफड़ों की क्षमता बढ़ती है, बलगम साफ होता है और ऑक्सीजन का स्तर सुधरता है।
- अभ्यास हमेशा खाली पेट करें; शुरुआत कम चक्रों से करें और धीरे-धीरे बढ़ाएँ।
- गंभीर बीमारी की स्थिति में डॉक्टर या योग विशेषज्ञ की सलाह अनिवार्य।
नई दिल्ली में 30 अप्रैल 2026 को आयुष मंत्रालय ने श्वसन संबंधी समस्याओं से राहत के लिए प्राचीन प्राणायाम क्रिया कपालभाति अपनाने की सिफारिश की है। बढ़ते वायु प्रदूषण, धूल और मौसमी बदलावों के कारण साइनस, खांसी, जुकाम और ब्रोंकियल इन्फेक्शन जैसी समस्याएँ व्यापक रूप से बढ़ रही हैं, जिसके मद्देनज़र मंत्रालय ने यह परामर्श जारी किया है।
कपालभाति क्या है और यह कैसे काम करती है
कपालभाति एक शक्तिशाली प्राणायाम तकनीक है जिसमें तेज़ गति से साँस छोड़ी जाती है जबकि साँस लेना स्वाभाविक रूप से होता है। आयुष मंत्रालय के अनुसार, इस क्रिया के नियमित अभ्यास से फेफड़े साफ होते हैं, साँस की नलियाँ खुलती हैं और पूरा श्वसन तंत्र सुदृढ़ होता है। यह फेफड़ों से पुरानी हवा और विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालती है, जिससे संक्रमण का जोखिम कम होता है।
इस अभ्यास से फेफड़ों की क्षमता बढ़ती है, रक्त में ऑक्सीजन का स्तर सुधरता है और श्वसन नलिकाओं में जमा बलगम साफ होता है। मंत्रालय के मुताबिक, नियमित अभ्यास से साँस की नली की सूजन में भी कमी आती है।
किन समस्याओं में विशेष रूप से फायदेमंद
आयुष मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि जिन लोगों को साइनस कंजेशन, लगातार खांसी, जुकाम, राइनाइटिस, साइनसाइटिस, अस्थमा या ब्रोंकियल इन्फेक्शन की शिकायत है, उनके लिए कपालभाति विशेष रूप से लाभकारी हो सकती है। यह ऐसे समय में आया है जब शहरी और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता सूचकांक लगातार चिंताजनक स्तर पर बना हुआ है।
गौरतलब है कि विश्व योग दिवस निकट आने के साथ मंत्रालय लगातार विभिन्न योगासनों और प्राणायाम तकनीकों के फायदों पर जागरूकता अभियान चला रहा है।
विशेषज्ञों की राय
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि कपालभाति न केवल श्वसन तंत्र को मज़बूत बनाती है, बल्कि शरीर की आंतरिक सफाई में भी सहायक है। विशेषज्ञों के अनुसार, सुबह के समय कपालभाति करने से मस्तिष्क तरोताज़ा रहता है और पूरे दिन ऊर्जा बनी रहती है।
सावधानियाँ और अभ्यास के दिशानिर्देश
विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि शुरुआत में कम चक्रों से अभ्यास शुरू करें और धीरे-धीरे इसे बढ़ाएँ। कपालभाति हमेशा खाली पेट करनी चाहिए। यदि किसी व्यक्ति को कोई गंभीर बीमारी है, तो डॉक्टर या योग विशेषज्ञ की सलाह लेने के बाद ही इसका अभ्यास करें। आयुष मंत्रालय की यह पहल सुझाव देती है कि पारंपरिक योग विधियाँ आधुनिक श्वसन संबंधी चुनौतियों से निपटने में सहायक भूमिका निभा सकती हैं।