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मारीच्यासन: पेट की समस्याओं और तनाव से राहत दिलाने वाला शक्तिशाली योगासन

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मारीच्यासन: पेट की समस्याओं और तनाव से राहत दिलाने वाला शक्तिशाली योगासन

सारांश

आधुनिक जीवनशैली में पाचन और तनाव की समस्या से जूझ रहे लोगों के लिए मारीच्यासन एक प्रभावी समाधान हो सकता है। आयुष मंत्रालय द्वारा अनुशंसित यह प्राचीन ट्विस्टिंग आसन लिवर, किडनी और प्रजनन तंत्र सहित कई आंतरिक अंगों को सक्रिय करता है — और सांस व ध्यान के सही संयोजन से मानसिक शांति भी देता है।

मुख्य बातें

मारीच्यासन ऋषि मारीचि के नाम पर रखा गया संस्कृत-मूल का बैठकर किया जाने वाला ट्विस्टिंग आसन है।
भारत सरकार के आयुष मंत्रालय ने इस आसन के महत्व पर विशेष जोर दिया है।
नियमित अभ्यास से लिवर, किडनी, अग्न्याशय, पित्ताशय और प्रजनन तंत्र सक्रिय होते हैं।
इस आसन से ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होता है, तनाव कम होता है और रीढ़ की हड्डी में लचीलापन आता है।
शुरुआत में योग शिक्षक की देखरेख में अभ्यास करने और संतुलित आहार के साथ योग को जोड़ने की सलाह दी जाती है।

मारीच्यासन एक प्रभावशाली बैठकर किया जाने वाला ट्विस्टिंग आसन है, जो आधुनिक जीवनशैली में रीढ़ की हड्डी के लचीलेपन और पाचन तंत्र को स्वस्थ रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। भारत सरकार के आयुष मंत्रालय ने भी इस आसन के महत्व पर विशेष जोर दिया है। नियमित अभ्यास से यह आसन शरीर के आंतरिक अंगों को गहराई से डिटॉक्स करने में सहायक माना जाता है।

मारीच्यासन का अर्थ और उत्पत्ति

मारीच्यासन शब्द संस्कृत भाषा से लिया गया है। इसमें 'मारीच' का अर्थ प्रकाश की किरण — अर्थात सूर्य या चंद्रमा की किरण — होता है, जबकि 'आसन' का अर्थ बैठने की मुद्रा या योग की स्थिति है। यह आसन प्राचीन ऋषि मारीचि के नाम पर रखा गया है, जो ब्रह्मांडीय प्रकाश के प्रतीक माने जाते हैं।

मारीच्यासन करने की सही विधि

इस आसन का अभ्यास करने के लिए सर्वप्रथम योगा मैट पर दंडासन की मुद्रा में बैठ जाएं। इसके बाद अपना दाहिना घुटना मोड़ें और बाएं हाथ को दाहिनी जांघ के बाहर रखें। सांस छोड़ते हुए दाईं ओर मुड़ें और पीछे की तरफ देखें। यदि संभव हो, तो दोनों हाथों को पीठ के पीछे आपस में पकड़ें और 5 से 10 गहरी सांसें लेकर इसे दूसरी तरफ भी दोहराएं।

विशेषज्ञों की सलाह है कि शुरुआत में इस आसन को धीरे-धीरे और योग शिक्षक की देखरेख में ही करें। सांस पर पूरा ध्यान केंद्रित रखें और किसी भी प्रकार की जल्दबाजी से बचें।

शरीर पर होने वाले लाभ

आयुष मंत्रालय के अनुसार, इस आसन के नियमित अभ्यास से ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होता है और तनाव में कमी आती है। यह आसन पेट के कई महत्वपूर्ण अंगों को सक्रिय करता है, जिनमें लिवर, किडनी, प्लीहा, अग्न्याशय, छोटी आंत, पित्ताशय और प्रजनन तंत्र शामिल हैं। गौरतलब है कि मेरुदंड को मोड़ने वाले इस आसन से रीढ़ की हड्डी में लचीलापन भी बढ़ता है।

मानसिक स्वास्थ्य पर प्रभाव

नियमित योगाभ्यास न केवल शारीरिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाता है, बल्कि मानसिक शांति प्रदान करने में भी सहायक है। मारीच्यासन में सही तरीके से सांस लेना और ध्यान केंद्रित करना इसका सबसे महत्वपूर्ण पहलू माना जाता है। यह आसन शरीर को लचीला बनाते हुए मन को स्थिर और शांत रखता है।

संतुलित आहार का महत्व

योग विशेषज्ञों का मानना है कि मारीच्यासन के अभ्यास के साथ-साथ संतुलित आहार ग्रहण करना भी उतना ही आवश्यक है। सही खान-पान पाचन को दुरुस्त रखता है, मन को शांत करता है और शारीरिक व मानसिक शुद्धि में सहायता करता है। इस प्रकार योग और संतुलित जीवनशैली का संयोजन समग्र स्वास्थ्य की दिशा में एक ठोस कदम साबित हो सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह ध्यान देना ज़रूरी है कि अधिकांश दावे नैदानिक परीक्षणों के बजाय पारंपरिक ज्ञान पर आधारित हैं। जब तक इन लाभों को सत्यापित करने वाले स्वतंत्र, peer-reviewed अध्ययन सामने नहीं आते, पाठकों को इन्हें पूरक स्वास्थ्य उपाय के रूप में देखना चाहिए, न कि चिकित्सा उपचार के विकल्प के रूप में। भारत में योग की बढ़ती लोकप्रियता के साथ, सरकारी संस्थाओं की ज़िम्मेदारी है कि वे प्रमाण-आधारित दिशानिर्देश प्रस्तुत करें।
RashtraPress
26 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मारीच्यासन क्या है और इसका नाम कहाँ से आया?
मारीच्यासन एक बैठकर किया जाने वाला ट्विस्टिंग योगासन है, जो प्राचीन ऋषि मारीचि के नाम पर रखा गया है। संस्कृत में 'मारीच' का अर्थ प्रकाश की किरण होता है और 'आसन' का अर्थ बैठने की मुद्रा है।
मारीच्यासन से पेट के किन अंगों को फायदा होता है?
आयुष मंत्रालय के अनुसार, इस आसन के अभ्यास से लिवर, किडनी, प्लीहा, अग्न्याशय, छोटी आंत, पित्ताशय और प्रजनन तंत्र सक्रिय होते हैं। इससे पाचन तंत्र बेहतर होता है और शरीर के आंतरिक अंगों की डिटॉक्सिफिकेशन में मदद मिलती है।
मारीच्यासन कैसे करें?
योगा मैट पर दंडासन में बैठकर दाहिना घुटना मोड़ें, बाएं हाथ को दाहिनी जांघ के बाहर रखें और सांस छोड़ते हुए दाईं ओर मुड़ें। 5 से 10 गहरी सांसें लें और फिर दूसरी तरफ दोहराएं — शुरुआत में योग शिक्षक की देखरेख में करें।
क्या मारीच्यासन तनाव कम करने में मदद करता है?
हाँ, इस आसन के नियमित अभ्यास से ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होता है और तनाव में कमी आती है। सही तरीके से सांस लेना और ध्यान केंद्रित करना इस आसन का सबसे महत्वपूर्ण पहलू माना जाता है, जो मानसिक शांति प्रदान करता है।
मारीच्यासन के साथ और क्या करना चाहिए?
योग विशेषज्ञों के अनुसार, मारीच्यासन के साथ-साथ संतुलित आहार ग्रहण करना भी उतना ही आवश्यक है। सही खान-पान पाचन को दुरुस्त रखता है और शारीरिक व मानसिक शुद्धि में सहायता करता है।
राष्ट्र प्रेस
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