यूपी चुनाव से पहले आईएसआई की बड़ी साजिश: जासूसी, सीसीटीवी निगरानी और सांप्रदायिक अस्थिरता की आशंका

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यूपी चुनाव से पहले आईएसआई की बड़ी साजिश: जासूसी, सीसीटीवी निगरानी और सांप्रदायिक अस्थिरता की आशंका

सारांश

यूपी चुनाव से पहले आईएसआई की रणनीति महज हमले तक सीमित नहीं — यह सांप्रदायिक माहौल बिगाड़ने, एजेंसियों को उलझाने और घरेलू नेटवर्क की आड़ में पाकिस्तानी निशान मिटाने की बहुस्तरीय योजना है। गाज़ियाबाद का सीसीटीवी मॉड्यूल इसी बड़े खेल की एक कड़ी बताई जा रही है।

Key Takeaways

खुफिया एजेंसियों के अनुसार आईएसआई यूपी विधानसभा चुनाव से पहले बड़ी साजिश में जुटी है। गाज़ियाबाद पुलिस ने रेलवे स्टेशनों पर सोलर पावर सीसीटीवी कैमरे लगाने वाले मॉड्यूल का भंडाफोड़ किया; लाइव फीड पाकिस्तान स्थित हैंडलर्स तक पहुँचाई जा रही थी। आईएसआई अब दूसरे राज्यों के लोगों का इस्तेमाल कर स्थानीय पुलिस रिकॉर्ड से बचने की कोशिश कर सकती है। कई इंटरसेप्ट्स में प्रचार चैनलों को सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने के लिए सक्रिय किए जाने के संकेत मिले हैं। एफएटीएफ की नज़र के कारण पाकिस्तान आतंकी फंडिंग और गतिविधियों को छिपाने के नए तरीके अपना रहा है।

खुफिया एजेंसियों के अनुसार पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई (ISI) उत्तर प्रदेश में अगले वर्ष होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले एक सुनियोजित साजिश को अंजाम देने में जुटी है। 30 अप्रैल को सामने आई खुफिया रिपोर्टों के अनुसार आईएसआई ध्यान भटकाने, निगरानी और प्रचार तंत्र के ज़रिए माहौल बिगाड़ने की कोशिश कर रही है, ताकि किसी बड़े हमले की ज़मीन तैयार की जा सके।

मुख्य घटनाक्रम

अधिकारियों के मुताबिक आईएसआई-समर्थित तत्व सीसीटीवी कैमरे लगाने, जासूसी गतिविधियों में शामिल होने और संवेदनशील स्थानों की जानकारी जुटाने जैसे कार्यों में सक्रिय हैं। एक खुफिया अधिकारी ने बताया कि अचानक बढ़ी इन गतिविधियों का मकसद भारतीय एजेंसियों को अलग-अलग मामलों में उलझाए रखना है, ताकि बड़े हमले की साजिश को परदे के पीछे से अंजाम दिया जा सके।

सूत्रों के मुताबिक आईएसआई की नज़र सिर्फ उत्तर प्रदेश के बड़े शहरों पर नहीं, बल्कि दूसरे दर्जे के शहरों और गाँवों पर भी है। इसका मकसद एजेंसियों को भ्रमित करना और अचानक हमला करना बताया जा रहा है।

गाज़ियाबाद मॉड्यूल: सीसीटीवी जासूसी का खुलासा

हाल ही में गाज़ियाबाद पुलिस ने एक ऐसे मॉड्यूल का भंडाफोड़ किया था, जो रेलवे स्टेशनों और अन्य संवेदनशील स्थानों पर सोलर पावर सीसीटीवी कैमरे लगा रहा था। इन कैमरों की लाइव फीड सीधे पाकिस्तान स्थित हैंडलर्स तक पहुँचाई जा रही थी। इस खुलासे के बाद देशभर में सीसीटीवी ऑडिट कराया गया। अधिकारियों को आशंका है कि बड़ी संख्या में कैमरे पहले से ही स्थापित किए जा चुके हैं और यूपी चुनाव से पहले इसी रणनीति को दोहराया जा सकता है।

सूत्रों के मुताबिक सड़क किनारे ढाबों और दुकानों पर कैमरे लगाकर चुनाव प्रचार के दौरान बड़े नेताओं के रूट पर नज़र रखने की योजना हो सकती है।

रणनीति में बदलाव: घरेलू नेटवर्क का इस्तेमाल

अधिकारियों ने कहा कि आईएसआई उत्तर प्रदेश में पहले से मौजूद नेटवर्क का इस्तेमाल कम कर सकती है। शक से बचने के लिए दूसरे राज्यों के लोगों का उपयोग किया जा सकता है, जिनका स्थानीय पुलिस रिकॉर्ड में कोई नाम न हो। सूत्रों के अनुसार भारत द्वारा पाकिस्तान से जुड़े हर आतंकी हमले को युद्ध जैसी कार्रवाई मानने की नीति के बाद आईएसआई ने अपनी रणनीति बदली है — अब वह ऐसे हमले करवाना चाहती है जो पूरी तरह घरेलू नेटवर्क की करतूत लगें और जिनका सीधा संबंध पाकिस्तान से न जुड़ सके।

सांप्रदायिक सौहार्द को निशाना

अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि इन तत्वों का मकसद सिर्फ हमला करना नहीं, बल्कि सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ना भी है। कई इंटरसेप्ट्स में संकेत मिले हैं कि प्रचार चैनलों को शांति और सद्भाव बिगाड़ने के लिए सक्रिय किया गया है। यह ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश में चुनावी माहौल धीरे-धीरे गर्म हो रहा है और राजनीतिक गतिविधियाँ तेज़ हो रही हैं।

एफएटीएफ और पाकिस्तान का दबाव

अधिकारियों ने यह भी कहा कि आर्थिक संकट से जूझ रहे पाकिस्तान पर एफएटीएफ (FATF) की नज़र भी है। ऐसे में वह दोबारा ग्रे लिस्ट में नहीं जाना चाहता, इसलिए आतंकी फंडिंग और गतिविधियों को छिपाने के नए तरीके अपनाए जा रहे हैं। खुफिया एजेंसियों का मानना है कि लगातार पैदा किया जा रहा ध्यान भटकाव किसी बड़ी योजना का हिस्सा हो सकता है और अन्य क्षेत्रों में हो रही गतिविधियों पर भी करीबी नज़र रखना ज़रूरी है।

Point of View

लेकिन FATF के दबाव में पाकिस्तान का यह 'छद्म आतंकवाद' का मॉडल अपनाना एक खतरनाक नज़ीर है जिस पर नीति-निर्माताओं को गंभीरता से विचार करना होगा।
NationPress
30/04/2026

Frequently Asked Questions

आईएसआई यूपी चुनाव से पहले क्या साजिश रच रही है?
खुफिया एजेंसियों के अनुसार आईएसआई उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले जासूसी, सीसीटीवी निगरानी और सांप्रदायिक अस्थिरता फैलाने की बहुस्तरीय साजिश में जुटी है। इसका मकसद भारतीय एजेंसियों को छोटे-छोटे मामलों में उलझाकर किसी बड़े हमले की ज़मीन तैयार करना बताया जा रहा है।
गाज़ियाबाद में किस मॉड्यूल का भंडाफोड़ हुआ था?
गाज़ियाबाद पुलिस ने एक ऐसे मॉड्यूल का भंडाफोड़ किया था जो रेलवे स्टेशनों और संवेदनशील स्थानों पर सोलर पावर सीसीटीवी कैमरे लगा रहा था। इन कैमरों की लाइव फीड पाकिस्तान स्थित हैंडलर्स तक पहुँचाई जा रही थी, जिसके बाद देशभर में सीसीटीवी ऑडिट कराया गया।
आईएसआई ने अपनी रणनीति क्यों बदली है?
सूत्रों के अनुसार भारत द्वारा पाकिस्तान से जुड़े हर आतंकी हमले को युद्ध जैसी कार्रवाई मानने की नीति के बाद आईएसआई ऐसे हमले करवाना चाहती है जो पूरी तरह घरेलू नेटवर्क की करतूत लगें। इसके अलावा FATF की नज़र के कारण पाकिस्तान ग्रे लिस्ट में दोबारा नहीं जाना चाहता, इसलिए आतंकी फंडिंग छिपाने के नए तरीके अपनाए जा रहे हैं।
क्या आईएसआई सिर्फ बड़े शहरों को निशाना बना रही है?
नहीं, सूत्रों के मुताबिक आईएसआई की नज़र उत्तर प्रदेश के बड़े शहरों के साथ-साथ दूसरे दर्जे के शहरों और गाँवों पर भी है। इसका उद्देश्य एजेंसियों को भ्रमित करना और अचानक हमला करना है।
आम जनता और चुनाव प्रक्रिया पर इसका क्या असर पड़ सकता है?
अधिकारियों के अनुसार आईएसआई-समर्थित प्रचार चैनलों को सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने के लिए सक्रिय किया गया है, जो चुनावी माहौल को प्रभावित कर सकता है। सड़क किनारे ढाबों और दुकानों पर लगे कैमरों के ज़रिए बड़े नेताओं के रूट पर नज़र रखने की भी आशंका जताई जा रही है।
Nation Press