चीन में भारत के नए राजदूत विक्रम दोराईस्वामी ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से लिया परिचय पत्र
सारांश
Key Takeaways
चीन में भारत के नवनियुक्त राजदूत विक्रम दोराईस्वामी ने 30 अप्रैल 2026 को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से अपना परिचय पत्र (क्रेडेंशियल्स) प्राप्त किया, जो किसी राजदूत की आधिकारिक नियुक्ति की औपचारिक शुरुआत होती है। चीन में भारतीय दूतावास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इसकी पुष्टि की। 1992 बैच के भारतीय विदेश सेवा (IFS) अधिकारी दोराईस्वामी को मार्च में चीन में भारत का राजदूत नियुक्त किया गया था।
नियुक्ति की पृष्ठभूमि
दोराईस्वामी इससे पहले ब्रिटेन में भारत के उच्चायुक्त के पद पर कार्यरत थे। विदेश मंत्रालय की ओर से साझा जानकारी के अनुसार, वह शीघ्र ही बीजिंग में अपना कार्यभार संभालेंगे। यह नियुक्ति ऐसे समय में हुई है जब भारत-चीन संबंध कूटनीतिक स्तर पर सामान्यीकरण की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।
विक्रम दोराईस्वामी की शैक्षणिक और कूटनीतिक पृष्ठभूमि
दोराईस्वामी ने दिल्ली विश्वविद्यालय से इतिहास में मास्टर डिग्री प्राप्त की है। 1992-93 में नई दिल्ली में इन-सर्विस प्रशिक्षण के बाद, वे मई 1994 में हांगकांग में भारतीय दूतावास में तृतीय सचिव के रूप में नियुक्त हुए। उन्होंने हांगकांग के चीनी विश्वविद्यालय के न्यू एशिया येल-इन-एशिया लैंग्वेज स्कूल से चीनी भाषा में डिप्लोमा भी हासिल किया, जो उनकी चीन-केंद्रित कूटनीतिक विशेषज्ञता को रेखांकित करता है।
बीजिंग से लेकर संयुक्त राष्ट्र तक — करियर का सफर
सितंबर 1996 में दोराईस्वामी को बीजिंग में भारतीय दूतावास में नियुक्त किया गया, जहाँ उन्होंने लगभग चार वर्षों तक जिम्मेदारी संभाली। 2000 में विदेश मंत्रालय लौटने पर उन्होंने डिप्टी चीफ ऑफ प्रोटोकॉल (ऑफिशियल) की भूमिका निभाई और बाद में प्रधानमंत्री के निजी सचिव के रूप में भी काम किया। 2006 में वे न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन में राजनीतिक सलाहकार बने। अक्टूबर 2009 में उन्होंने जोहान्सबर्ग, दक्षिण अफ्रीका में भारत के महावाणिज्य दूत का कार्यभार संभाला।
बहुआयामी कूटनीतिक अनुभव
जुलाई 2011 में विदेश मंत्रालय वापसी के बाद दोराईस्वामी ने साउथ एशियन एसोसिएशन फॉर रीजनल कोऑपरेशन (SAARC) विभाग का नेतृत्व किया। वे मार्च 2012 में नई दिल्ली में आयोजित चौथे BRICS शिखर सम्मेलन के समन्वयक भी रहे। अक्टूबर 2012 से अक्टूबर 2014 तक वे विदेश मंत्रालय के अमेरिकी विभाग में संयुक्त सचिव रहे। इसके बाद अक्टूबर 2014 में उज्बेकिस्तान में और अप्रैल 2015 में कोरिया में भारत के राजदूत के रूप में उन्होंने अपनी सेवाएँ दीं।
आगे की राह
परिचय पत्र मिलने के साथ ही दोराईस्वामी का बीजिंग रवाना होना अब औपचारिक रूप से तय माना जा रहा है। चीनी भाषा की दक्षता और बीजिंग में पूर्व कार्यकाल को देखते हुए, कूटनीतिक हलकों में उनकी नियुक्ति को भारत-चीन संबंधों के लिए एक अनुभवी और सुचिंतित विकल्प के रूप में देखा जा रहा है।