10 अगस्त 2026
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जिरांग: ओडिशा के जंगलों में बसा मिनी भूटान, तिब्बती संस्कृति और पूर्वी घाट की प्रकृति का अनोखा मिलन

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जिरांग: ओडिशा के जंगलों में बसा मिनी भूटान, तिब्बती संस्कृति और पूर्वी घाट की प्रकृति का अनोखा मिलन

ओडिशा के गजपति जिले के निकट बसा जिरांग और उससे सटा चंद्रगिरी गाँव भारत के उन दुर्लभ स्थलों में शुमार है, जहाँ तिब्बती संस्कृति, बौद्ध आध्यात्मिकता और पूर्वी घाट की हरी-भरी प्रकृति एक साथ देखने को मिलती है। गर्मियों की छुट्टियों में यह 'मिनी भूटान' उन पर्यटकों के लिए एक आदर्श गंतव्य बन चुका है, जो भीड़-भाड़ से दूर शांति और सुकून की तलाश में रहते हैं। यहाँ का माहौल, खानपान और स्थापत्य कला भूटान और तिब्बत की याद ताज़ा कर देती है।

तिब्बती प्रवासियों का इतिहास और 'फुंटसोक्लिंग'

1959 में चीन द्वारा तिब्बत पर आक्रमण के बाद विस्थापित तिब्बती शरणार्थियों को इसी भूमि पर आश्रय दिया गया था। तिब्बतियों का पहला समूह 1 मई 1963 को चंद्रगिरी पहुँचा और तब से वे पूर्वी घाट की इन सुरम्य पहाड़ियों में बस गए। तिब्बतियों ने इस स्थान को

राष्ट्र प्रेस
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