भारतीय शेयर बाजार में भू-राजनीतिक तनाव का प्रभाव: 6 प्रतिशत की गिरावट

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भारतीय शेयर बाजार में भू-राजनीतिक तनाव का प्रभाव: 6 प्रतिशत की गिरावट

सारांश

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के चलते भारतीय शेयर बाजार में इस सप्ताह लगभग 6 प्रतिशत की गिरावट आई है। जानिए कैसे यह गिरावट निवेशकों को प्रभावित कर रही है और बाजार की वर्तमान स्थिति क्या है।

मुख्य बातें

पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव का असर भारतीय शेयर बाजार पर पड़ा है।
इस हफ्ते निफ्टी में 5.31 प्रतिशत की गिरावट आई।
निवेशकों के 10 लाख करोड़ रुपए डूब गए।
कच्चे तेल की कीमतों के बढ़ने से महंगाई का जोखिम बढ़ा है।
भारतीय रुपया रिकॉर्ड निचले स्तर पर बंद हुआ।

मुंबई, 14 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का प्रभाव भारतीय शेयर बाजार पर स्पष्ट रूप से देखने को मिला है। इस सप्ताह प्रमुख घरेलू बेंचमार्क इंडेक्स में लगभग 6 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई, जिससे बाजार में लगातार बिकवाली का माहौल बना रहा।

सप्ताह के दौरान निफ्टी में 5.31 प्रतिशत की कमी आई, और आखिरी कारोबारी दिन पर यह 2.06 प्रतिशत गिरकर 23,151 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं, सेंसेक्स 1,470.50 अंक यानी 1.93 प्रतिशत गिरकर 74,564 पर समाप्त हुआ।

विशेषज्ञों का मानना है कि कच्चे तेल की कीमतों में तेज वृद्धि और ऊर्जा आयात करने वाले देशों के लिए बढ़ती आर्थिक चिंताओं के कारण बाजार में यह गंभीर गिरावट आई है।

इस दौरान निफ्टी ऑटो इंडेक्स में लगभग 10 से 11 प्रतिशत की भारी गिरावट आई, जो मार्च 2020 के बाद का सबसे खराब साप्ताहिक प्रदर्शन माना जा रहा है। इस इंडेक्स के लगभग सभी शेयरों में तेज बिकवाली का सामना करना पड़ा।

सेक्टर के अनुसार, सप्ताह के अंतिम कारोबारी दिन बैंकिंग, मेटल और ऑटो क्षेत्र के शेयरों में सबसे अधिक गिरावट देखी गई।

इस तेज गिरावट के कारण एक ही कारोबारी सत्र (शुक्रवार) में निवेशकों के लगभग 10 लाख करोड़ रुपए डूब गए।

वहीं, व्यापक बाजार सूचकांकों में भी गिरावट दर्ज की गई। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 4.59 प्रतिशत और निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 3.66 प्रतिशत गिर गया।

बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, निफ्टी के लिए तत्काल समर्थन स्तर 23,000 के आसपास है, जबकि 23,300 और 23,500 के स्तर पर प्रतिरोध देखने को मिल सकता है।

बैंक निफ्टी के लिए 53,500 पहला समर्थन स्तर माना जा रहा है, जबकि 53,000 का स्तर महत्वपूर्ण होगा। दूसरी ओर, 54,000 और 54,300 के स्तर को प्रतिरोध माना जा रहा है।

विश्लेषकों ने बताया कि इंडिया वीआईएक्स 22 के स्तर से ऊपर पहुंच गया है, जो बाजार में बढ़ते डर और आने वाले समय में अधिक उतार-चढ़ाव की संभावना का संकेत देता है।

विश्लेषकों का कहना है कि एलएनजी और एलपीजी की संभावित कमी से उत्पादन प्रभावित होने का खतरा बढ़ सकता है, जबकि सीएनजी की उपलब्धता पर दबाव पड़ने से उपभोक्ताओं की मांग के पैटर्न में बदलाव आ सकता है, विशेषकर उन शहरी क्षेत्रों में जहां सीएनजी वाहन अधिक उपयोग होते हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार, कच्चे तेल की ऊंची कीमतें महंगाई के जोखिम को बढ़ाती हैं और इससे रुपए पर भी दबाव पड़ता है, जिससे निवेशकों की धारणा कमजोर होती है।

इस बीच, भारतीय रुपया लगातार दूसरे सप्ताह कमजोर रहा और अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 92.45 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर बंद हुआ।

संपादकीय दृष्टिकोण

यह स्पष्ट है कि वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव का भारतीय शेयर बाजार पर गहरा असर पड़ा है। बाजार में निवेशकों की धारणा कमजोर हुई है, जिसका प्रभाव आने वाले समय में और भी बढ़ सकता है।
RashtraPress
13 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारतीय शेयर बाजार में गिरावट का मुख्य कारण क्या है?
भारतीय शेयर बाजार में गिरावट का मुख्य कारण पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि है।
निवेशकों को इस स्थिति में क्या करना चाहिए?
निवेशकों को अपने पोर्टफोलियो की समीक्षा करनी चाहिए और बाजार के उतार-चढ़ाव को ध्यान में रखते हुए सावधानी से निवेश निर्णय लेने चाहिए।
क्या यह गिरावट लंबे समय तक चलेगी?
यह कहना मुश्किल है, लेकिन अगर भू-राजनीतिक स्थिति में सुधार नहीं होता है, तो बाजार में अस्थिरता जारी रह सकती है।
क्या निफ्टी का समर्थन स्तर क्या है?
विशेषज्ञों के अनुसार, निफ्टी के लिए तत्काल समर्थन स्तर लगभग 23,000 के आसपास है।
रुपये की स्थिति क्या है?
भारतीय रुपया लगातार कमजोर हो रहा है और यह अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 92.45 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया है।
राष्ट्र प्रेस
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