कच्चे तेल की कीमतों में उछाल के कारण सेंसेक्स में भारी गिरावट; निवेशकों के 8 लाख करोड़ रुपए का नुकसान
सारांश
Key Takeaways
मुंबई, 9 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। भारतीय शेयर बाजार में सोमवार को एक बड़ी गिरावट का सामना करना पड़ा। दिन के अंत में सेंसेक्स 1,352.74 अंक या 1.71 प्रतिशत की कमी के साथ 77,566.16 पर और निफ्टी 422.40 अंक या 1.73 प्रतिशत की गिरावट के साथ 24,028.05 पर बंद हुआ।
इस गिरावट का मुख्य कारण ऑटो और बैंकिंग शेयरों में गिरावट रही। निफ्टी ऑटो 4.10 प्रतिशत, निफ्टी पीएसयू बैंक 3.97 प्रतिशत, निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल 2.81 प्रतिशत, निफ्टी प्राइवेट बैंक 2.78 प्रतिशत, निफ्टी मेटल 2.60 प्रतिशत और निफ्टी ऑयल एंड गैस 2.37 प्रतिशत की गिरावट के साथ बंद हुए। केवल निफ्टी आईटी 0.08 प्रतिशत की मामूली बढ़त के साथ समाप्त हुआ।
लार्जकैप के साथ-साथ मिडकैप और स्मॉलकैप में भी गिरावट दर्ज की गई। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 1,127.85 अंक या 1.97 प्रतिशत की कमी के साथ 56,265.50 पर और निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 366.70 अंक या 2.22 प्रतिशत की गिरावट के साथ 16,132.20 पर रहा।
बाजार में उतार-चढ़ाव दर्शाने वाले इंडिया विक्स में भी उछाल देखा गया और यह 17.50 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 23.36 पर बंद हुआ।
सेंसेक्स पैक में अल्ट्राटेक सीमेंट, मारुति सुजुकी, एसबीआई, इंडिगो, टाटा स्टील, कोटक महिंद्रा बैंक, एचडीएफसी बैंक, टाइटन, बजाज फिनसर्व जैसे कई शेयर गिरावट में रहे। वहीं, सन फार्मा, इन्फोसिस, टेक महिंद्रा और एचसीएल टेक के शेयरों में बढ़त रही।
बाजार में गिरावट के कारण बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज पर सूचीबद्ध सभी कंपनियों का मार्केट कैप 8 लाख करोड़ रुपए घटकर 441 लाख करोड़ रुपए हो गया है, जो पहले 449 लाख करोड़ रुपए था।
इस गिरावट का मुख्य कारण कच्चे तेल में वृद्धि मानी जा रही है। मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के चलते ब्रेंट क्रूड की कीमत में सोमवार को 26 प्रतिशत की वृद्धि हुई और यह 119 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया।
कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि का कारण ईराक और कुवैत जैसे देशों की ओर से आउटपुट में कमी है। इससे पहले कतर ने एलएनजी के उत्पादन में कमी का ऐलान किया था।
भारतीय बाजार में कमजोरी की एक और वजह डॉलर का मजबूत होना भी है। दुनिया की छह बड़ी मुद्राओं के मुकाबले अमेरिकी मुद्रा की मजबूती दर्शाने वाला डॉलर इंडेक्स इस वर्ष के अब तक के सबसे ऊंचे स्तर 99.70 तक पहुंच गया है। डॉलर के मजबूत होने से भारतीय रुपए में भी कमजोरी देखी गई है।