NIT राउरकेला ने विमान लैंडिंग गियर के लिए विकसित किया उन्नत नैनोकॉम्पोजिट, 40–60% अधिक लागत-प्रभावी
सारांश
Key Takeaways
राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (NIT) राउरकेला के शोधकर्ताओं ने एक अत्याधुनिक एल्यूमिनियम-आधारित हाइब्रिड नैनोकॉम्पोजिट मैटेरियल विकसित किया है, जिसे विमान के लैंडिंग गियर में उपयोग के लिए उपयुक्त पाया गया है। यह शोध 30 अप्रैल 2026 को प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय पत्रिका मैटेरियल्स लेटर्स में प्रकाशित हुआ है। मौजूदा अल्ट्रा-हाई-स्ट्रेंथ स्टील और टाइटेनियम मिश्रधातुओं की तुलना में यह नैनोकॉम्पोजिट 40–60 प्रतिशत अधिक लागत-प्रभावी हो सकता है।
शोध की पृष्ठभूमि और चुनौती
विमान की लैंडिंग के दौरान लैंडिंग गियर को अत्यधिक घिसाव, दबाव और रनवे के संपर्क से उत्पन्न बल को सहना पड़ता है। आमतौर पर एल्यूमिनियम मिश्रधातुओं से निर्मित ये गियर हल्के तो होते हैं, किंतु अत्यधिक दबाव में इनका टिकाऊपन एक बड़ी चुनौती बनी रहती है। NIT राउरकेला के मेटलर्जिकल एंड मैटेरियल्स इंजीनियरिंग विभाग ने इसी समस्या का समाधान खोजने के लिए यह शोध आरंभ किया।
नैनोकॉम्पोजिट की संरचना और निर्माण प्रक्रिया
नैनोकॉम्पोजिट ऐसे पदार्थ होते हैं जो नैनो स्तर पर विभिन्न सामग्रियों के मिश्रण से बनते हैं — ये मानव बाल से 100,000 गुना पतले होते हैं। शोधकर्ताओं ने इस मैटेरियल को विकसित करने के लिए निम्नलिखित तकनीकों का उपयोग किया:
बेहतर दाब-सहन क्षमता के लिए कार्बन नैनोट्यूब का उपयोग किया गया। अतिरिक्त मजबूती के लिए इसे ग्रेफाइट नैनोप्लेटलेट्स से जोड़ा गया। मिश्रण को तापीय रूप से स्थिर बनाने हेतु हेक्सागोनल बोरॉन नाइट्राइड का प्रयोग किया गया। एल्यूमिनियम मैट्रिक्स में कणों के समान वितरण के लिए उच्च-आवृत्ति ध्वनि तरंगों का उपयोग किया गया। अंततः मिश्रण को उच्च दाब वाले ऑक्सीजन-रहित वातावरण में गर्म कर दबाया गया — इस विधि को स्पार्क प्लाज्मा सिंटरिंग कहते हैं — जिससे एक सघन और मजबूत नैनोकॉम्पोजिट प्राप्त हुआ।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं
शोध के प्रमुख अन्वेषक प्रो. सैयद नसीमुल आलम ने कहा,