मलेशिया में ISI का खालिस्तान मॉड्यूल बेनकाब, नारको स्मगलिंग और फंडिंग नेटवर्क पर भारतीय एजेंसियों की नज़र
सारांश
Key Takeaways
नई दिल्ली: पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी इंटर-सर्विसेज़ इंटेलिजेंस (ISI) ने कथित तौर पर मलेशिया को खालिस्तान समर्थक गतिविधियों के नए अड्डे के रूप में विकसित करने की योजना बनाई है। भारतीय खुफिया अधिकारियों के अनुसार, 30 अप्रैल 2026 को सामने आई इस जानकारी में खुलासा हुआ है कि ISI ने कनाडा और ब्रिटेन में बढ़ती निगरानी के बाद मलेशिया को एक वैकल्पिक ऑपरेशनल बेस के रूप में चुना है। इस मॉड्यूल का मुख्य उद्देश्य प्रोपेगेंडा फैलाने से अधिक भारत में नारकोटिक्स की तस्करी और फंड जुटाना बताया जा रहा है।
मलेशिया को क्यों चुना गया
अधिकारियों के अनुसार, ISI की प्राथमिकता थी कि खालिस्तान समर्थक तत्वों को भारत के भौगोलिक रूप से निकट किसी देश में तैनात किया जाए। कनाडा और यूनाइटेड किंगडम में बढ़ते कूटनीतिक दबाव और सुरक्षा एजेंसियों की सक्रियता के कारण वे देश अब ISI के लिए उपयुक्त नहीं रहे। मलेशिया में लगभग 1 लाख सिख और 100 गुरुद्वारे होने के कारण इसे एक संभावित आधार के रूप में देखा गया। हालाँकि, अधिकारियों ने यह भी बताया कि मलेशिया का सिख समुदाय अपनी संस्कृति और भाषा के संरक्षण पर केंद्रित है और पहले भी ऐसे तत्वों को नकार चुका है।
मॉड्यूल की संरचना और कार्यप्रणाली
खुफिया सूत्रों के अनुसार, यह मॉड्यूल जानबूझकर छोटे आकार का रखा गया है ताकि जाँच एजेंसियों की नज़र में न आए। इसके सदस्यों को पाकिस्तान से रिमोटली नियंत्रित किया जाएगा। फिलहाल इस मॉड्यूल को प्रदीप सिंह खालसा नामक व्यक्ति संचालित कर रहा है, जिसने कथित तौर पर कई युवाओं को कट्टरपंथी बनाकर मलेशिया भेजा है। इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) के एक अधिकारी ने कहा कि यह मॉड्यूल कनाडा या ब्रिटेन जैसी खुली भारत-विरोधी गतिविधियाँ नहीं करेगा — इसके बजाय यह चुपचाप फंड इकट्ठा करने और नारकोटिक्स तस्करी पर केंद्रित रहेगा।
नारको स्मगलिंग सबसे बड़ी चिंता
अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि प्रोपेगेंडा की तुलना में नारको स्मगलिंग कहीं अधिक गंभीर खतरा है। भारतीय एजेंसियों की बड़ी कार्रवाइयों के कारण पंजाब में ड्रग्स की तस्करी पहले से कठिन हो गई है। ड्रोन के ज़रिए नारकोटिक्स भेजने की कोशिशें पहले कामयाब रही थीं, लेकिन अब एजेंसियों की डिटेक्शन रेट काफी ऊँची हो गई है। एक अधिकारी ने बताया कि पंजाब में कई ड्रग्स नेटवर्क पकड़े जाने से फंडिंग के स्रोत भी धीरे-धीरे सिकुड़ रहे हैं। इसके अलावा, कई डोनर भी पीछे हट गए हैं क्योंकि उन्हें यह एहसास हो गया है कि यह तथाकथित आंदोलन किसी वैचारिक मकसद के लिए नहीं, बल्कि आतंक फैलाने के लिए चलाया जा रहा है।
भारत-मलेशिया सहयोग और आगे की राह
एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि उन्हें इस मॉड्यूल की बड़ी सफलता की उम्मीद नहीं है। भारत और मलेशिया के बीच मज़बूत द्विपक्षीय संबंध हैं और दोनों देश मिलकर ऐसे मॉड्यूल को निष्प्रभावी कर सकते हैं। गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब खालिस्तानी तत्वों ने मलेशिया में पैर जमाने की कोशिश की हो — पिछली कोशिशें भी वहाँ के सिख समुदाय के विरोध के कारण विफल हो चुकी हैं। भारतीय एजेंसियाँ मलेशिया में हो रहे घटनाक्रमों पर करीबी नज़र बनाए हुए हैं और नारको स्मगलिंग के रास्तों की विशेष निगरानी की जा रही है।