कमजोर वैश्विक संकेतों से प्रभावित होकर शेयर बाजार में गिरावट, सेंसेक्स 400 अंक नीचे

Click to start listening
कमजोर वैश्विक संकेतों से प्रभावित होकर शेयर बाजार में गिरावट, सेंसेक्स 400 अंक नीचे

सारांश

गुरुवार को भारतीय शेयर बाजार ने **कमजोर वैश्विक संकेतों** के कारण गिरावट का सामना किया। **सेंसेक्स** में 400 अंक की कमी आई, जिससे निवेशकों में चिंता बढ़ गई। जानें क्या है इसके पीछे का कारण और बाजार की वर्तमान स्थिति।

Key Takeaways

  • भारतीय शेयर बाजार में गिरावट आई है।
  • सेंसेक्स में 400 अंक की कमी आई।
  • ईरान और अमेरिका के बीच तनाव बढ़ा है।
  • कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि हो रही है।
  • निवेशकों को सतर्क रहने की सलाह दी जा रही है।

मुंबई, 9 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। कमजोर वैश्विक संकेतों के चलते गुरुवार को भारतीय शेयर बाजार गिरावट के साथ लाल निशान में खुला। यह गिरावट तब आई जब ईरान ने अमेरिका पर युद्धविराम समझौते का उल्लंघन करने का आरोप लगाया, जिसके परिणामस्वरूप कच्चे तेल की कीमतों में फिर से तेजी आई, जिससे निफ्टी50 और सेंसेक्स में गिरावट देखने को मिली।

इस दौरान, बीएसई सेंसेक्स पिछले दिन के बंद 77,562.90 से 243.57 अंक गिरकर 77,319.33 पर खुला, वहीं निफ्टी अपने पिछले बंद 23,997.35 से 88.3 अंक गिरकर 23,909.05 पर खुला।

हालांकि खबर लिखे जाने तक (सुबह 9.40 बजे के करीब) सेंसेक्स 444.41 अंक यानी 0.57 प्रतिशत की गिरावट के साथ 77,118.49 पर ट्रेड कर रहा था, जबकि निफ्टी50 101.45 अंक यानी 0.42 प्रतिशत गिरकर 23,895.90 पर था।

व्यापक बाजार में, निफ्टी मिडकैप इंडेक्स में 0.13 प्रतिशत और निफ्टी स्मॉलकैप इंडेक्स में मामूली 0.02 प्रतिशत की गिरावट देखने को मिली।

सेक्टरवार देखें तो निफ्टी मेटल और निफ्टी फार्मा ने बेहतर प्रदर्शन किया, जबकि निफ्टी आईटी में सबसे ज्यादा (1.17 प्रतिशत) की गिरावट दर्ज की गई। इसके अलावा, निफ्टी ऑटो, निफ्टी फाइनेंशियल, निफ्टी बैंक, निफ्टी रियल्टी में भी गिरावट देखने को मिली।

निफ्टी 50 इंडेक्स में इंफोसिस, एलएंडटी, इटरनल, जियो फाइनेंशियल सर्विसेज, एचसीएलटेक, इंडिगो और श्रीराम फाइनेंस के शेयर सबसे ज्यादा नुकसान उठाने वाले शेयरों में शामिल रहे, जबकि इसके विपरीत हिंडाल्को, मैक्सहेल्थ, एनटीपीसी, बजाज-ऑटो, बीईएल और पावरग्रिड के शेयरों में सबसे ज्यादा बढ़त देखने को मिली।

इस बीच, ब्रेंट क्रूड वायदा में सुबह के समय 3.31 प्रतिशत की तेजी आई और यह 97.89 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। वहीं, अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (डब्ल्यूटीआई) क्रूड पिछले बंद भाव से 4.2 प्रतिशत बढ़कर 98.38 डॉलर पर कारोबार कर रहा था।

गौरतलब है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने इस सप्ताह की शुरुआत में युद्धविराम की घोषणा की थी, लेकिन मध्य पूर्व में स्थिति बेहद नाजुक बनी हुई है। बुधवार को इजरायल ने लेबनान पर अब तक का सबसे भीषण हमला किया, जिसमें सैकड़ों लोग मारे गए और ईरान ने जवाबी कार्रवाई की नई धमकी दी, जिससे स्थायी तनाव कम होने की उम्मीदों पर पानी फिर गया और वैश्विक बाजारों में घबराहट बनी रही।

अनिश्चितता को और बढ़ाते हुए ईरान के प्रमुख वार्ताकार और संसद अध्यक्ष मोहम्मद बागर कलीबाफ ने संकेत दिया कि अमेरिका के साथ स्थायी शांति समझौते के उद्देश्य से वार्ता जारी रखना अब "अनुचित" हो सकता है। इसके विपरीत, व्हाइट हाउस ने कहा कि ईरान के साथ सीधी वार्ता जारी रहेगी।

इस बीच, तेहरान ने इजरायल पर युद्धविराम का उल्लंघन करने का आरोप लगाया, खाड़ी देशों पर अपने हमले जारी रखे, और सुरक्षित आवागमन के पूर्व आश्वासनों के बावजूद होर्मुज जलडमरूमध्य काफी हद तक अवरुद्ध रहा। यह वित्तीय बाजारों के लिए एक बड़ी चिंता का विषय बना हुआ है, क्योंकि यह जलमार्ग वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए एक महत्वपूर्ण मार्ग है। वहां किसी भी प्रकार की रुकावट से मुद्रास्फीति की चिंताएं फिर से बढ़ सकती हैं।

विश्लेषकों के अनुसार, व्यापारियों को सतर्क दृष्टिकोण अपनाना चाहिए, सपोर्ट स्तरों के पास 'गिरावट पर खरीदारी' की रणनीति को प्राथमिकता देनी चाहिए और उच्च स्तरों पर आक्रामक लॉन्ग पोजीशन लेने से बचना चाहिए।

Point of View

बल्कि निवेशकों की भावनाओं को भी प्रभावित करता है। इस समय, हर कोई इस गिरावट के पीछे के कारणों को समझने की कोशिश कर रहा है।
NationPress
13/04/2026

Frequently Asked Questions

शेयर बाजार में गिरावट का मुख्य कारण क्या है?
गिरावट का मुख्य कारण ईरान द्वारा अमेरिका पर युद्धविराम समझौते का उल्लंघन करने का आरोप है, जिससे कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई।
क्या निवेशकों को चिंतित होना चाहिए?
हां, इस प्रकार की गिरावट हमेशा निवेशकों के लिए चिंता का विषय होती है। सतर्क रहना और सही निर्णय लेना महत्वपूर्ण है।
कौन से सेक्टरों में गिरावट देखी गई?
निफ्टी मेटल और निफ्टी फार्मा में सुधार हुआ, जबकि निफ्टी आईटी में सबसे ज्यादा गिरावट हुई।
तेल की कीमतों में वृद्धि का बाजार पर क्या प्रभाव है?
कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि से इनफ्लेशन बढ़ सकता है, जिससे बाजार पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
निवेशकों के लिए क्या सलाह है?
विश्लेषकों का कहना है कि निवेशकों को सतर्क रहना चाहिए और सपोर्ट स्तरों पर खरीदारी की रणनीति अपनानी चाहिए।
Nation Press