तिरुपत्तूर में एक वोट की जीत विवाद: सुप्रीम कोर्ट आज टीवीके विधायक सेतुपति की याचिका पर करेगा सुनवाई

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तिरुपत्तूर में एक वोट की जीत विवाद: सुप्रीम कोर्ट आज टीवीके विधायक सेतुपति की याचिका पर करेगा सुनवाई

सारांश

तिरुपत्तूर में महज एक वोट से जीते TVK विधायक आर. श्रीनिवास सेतुपति को मद्रास हाईकोर्ट ने फ्लोर टेस्ट में भाग लेने से रोक दिया है। अब सुप्रीम कोर्ट इस अंतरिम आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर बुधवार को सुनवाई करेगा — एक पोस्टल बैलेट की गलत डिलीवरी ने पूरे चुनाव परिणाम पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

मुख्य बातें

सुप्रीम कोर्ट बुधवार को TVK विधायक आर.
श्रीनिवास सेतुपति की याचिका पर जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस विजय बिश्नोई की पीठ के समक्ष सुनवाई करेगा।
तिरुपत्तूर विधानसभा क्षेत्र में सेतुपति को 83,365 और DMK के पेरियाकरुप्पन को 83,364 वोट मिले — जीत का अंतर केवल एक मत ।
DMK नेता ने आरोप लगाया कि शिवगंगा जिले का एक पोस्टल बैलेट गलती से वेल्लोर जिले के तिरुपत्तूर क्षेत्र में भेजा गया और वहाँ अस्वीकृत कर दिया गया।
मद्रास हाईकोर्ट की अवकाश पीठ ने अंतरिम आदेश में सेतुपति को फ्लोर टेस्ट सहित विधानसभा की अहम कार्यवाहियों से रोका।
वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने CJI सूर्यकांत के समक्ष तत्काल सुनवाई का अनुरोध किया, जिसे स्वीकार किया गया।

सर्वोच्च न्यायालय (सुप्रीम कोर्ट) बुधवार को तमिलगा वेट्री कझगम (TVK) के विधायक आर. श्रीनिवास सेतुपति की याचिका पर सुनवाई करेगा, जिसमें उन्होंने मद्रास उच्च न्यायालय (हाईकोर्ट) के उस अंतरिम आदेश को चुनौती दी है जो उन्हें तमिलनाडु विधानसभा में फ्लोर टेस्ट की कार्यवाही में भाग लेने से रोकता है। यह विवाद तिरुपत्तूर विधानसभा क्षेत्र में महज एक वोट के अंतर से मिली जीत को लेकर उठा है।

मामले की पृष्ठभूमि

हालिया तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में तिरुपत्तूर विधानसभा क्षेत्र से TVK के आर. श्रीनिवास सेतुपति ने द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) के नेता और तमिलनाडु के पूर्व मंत्री के.आर. पेरियाकरुप्पन को अत्यंत कम अंतर से पराजित किया। भारत निर्वाचन आयोग (ECI) के आधिकारिक आँकड़ों के अनुसार, सेतुपति को 83,365 वोट मिले जबकि पेरियाकरुप्पन को 83,364 वोट प्राप्त हुए — अर्थात जीत का अंतर केवल एक मत रहा।

डीएमके नेता का आरोप और हाईकोर्ट की कार्यवाही

चुनाव परिणामों के बाद DMK नेता पेरियाकरुप्पन ने मतगणना प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए मद्रास हाईकोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया। उनका दावा है कि शिवगंगा जिले के तिरुपत्तूर विधानसभा क्षेत्र संख्या 185 के लिए भेजा गया एक पोस्टल बैलेट गलती से वेल्लोर जिले के तिरुपत्तूर विधानसभा क्षेत्र संख्या 50 में चला गया, और वहाँ उसे सही क्षेत्र में वापस भेजने के बजाय अस्वीकृत कर दिया गया। इस याचिका पर सुनवाई करते हुए मद्रास हाईकोर्ट की अवकाश पीठ ने अपने अंतरिम आदेश में सेतुपति को विधानसभा की महत्त्वपूर्ण प्रक्रियाओं — जिसमें फ्लोर टेस्ट भी शामिल है — में भाग लेने से रोक दिया।

सुप्रीम कोर्ट में तत्काल सुनवाई की माँग

वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने मंगलवार को भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत के समक्ष इस याचिका पर तत्काल सुनवाई का अनुरोध किया। सुप्रीम कोर्ट ने इस अनुरोध को स्वीकार करते हुए मामले को बुधवार को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने पर सहमति जताई। सुप्रीम कोर्ट की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध जानकारी के अनुसार, यह याचिका जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस विजय बिश्नोई की तीन सदस्यीय पीठ के समक्ष सूचीबद्ध की गई है।

विधायक के अधिकारों पर असर

मद्रास हाईकोर्ट के अंतरिम आदेश के कारण सेतुपति फिलहाल तमिलनाडु विधानसभा की अहम कार्यवाहियों से बाहर हैं। गौरतलब है कि फ्लोर टेस्ट जैसी प्रक्रियाएँ सरकार के बहुमत साबित करने के लिए निर्णायक होती हैं, और ऐसे में किसी विधायक को मतदान से रोकना राजनीतिक दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील मसला बन जाता है। यह ऐसे समय में आया है जब तमिलनाडु में नई सरकार के गठन के बाद विधानसभा की प्रारंभिक कार्यवाहियाँ जारी हैं।

आगे क्या होगा

सुप्रीम कोर्ट की पीठ बुधवार को सुनवाई के दौरान यह तय करेगी कि मद्रास हाईकोर्ट के अंतरिम आदेश पर रोक लगाई जाए या नहीं। यदि सुप्रीम कोर्ट हाईकोर्ट के आदेश पर स्थगन देता है, तो सेतुपति विधानसभा कार्यवाहियों में भाग लेने के लिए स्वतंत्र हो जाएंगे। इस मामले का परिणाम न केवल एक विधायक के अधिकारों को, बल्कि चुनावी विवादों में न्यायिक हस्तक्षेप की सीमाओं को भी परिभाषित करेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

वह भारतीय चुनाव प्रशासन की उस पुरानी कमज़ोरी को उजागर करता है — जहाँ समान नाम वाले विधानसभा क्षेत्रों के बीच प्रशासनिक भ्रम के लिए कोई मज़बूत सुरक्षा तंत्र नहीं है। सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला केवल एक विधायक के भाग्य का नहीं, बल्कि इस सवाल का भी जवाब देगा कि क्या न्यायिक अंतरिम आदेश किसी निर्वाचित प्रतिनिधि को सदन की कार्यवाही से बाहर रख सकते हैं। यह मामला चुनावी लोकतंत्र और न्यायिक हस्तक्षेप के बीच की बारीक रेखा को परखेगा।
RashtraPress
13 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

TVK विधायक सेतुपति का सुप्रीम कोर्ट में मामला क्या है?
TVK विधायक आर. श्रीनिवास सेतुपति ने मद्रास हाईकोर्ट के उस अंतरिम आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है जो उन्हें तमिलनाडु विधानसभा के फ्लोर टेस्ट में भाग लेने से रोकता है। यह विवाद तिरुपत्तूर विधानसभा क्षेत्र में एक वोट से मिली उनकी जीत को लेकर है।
तिरुपत्तूर में एक वोट का विवाद कैसे शुरू हुआ?
चुनाव में सेतुपति को 83,365 और DMK के पेरियाकरुप्पन को 83,364 वोट मिले। पेरियाकरुप्पन ने आरोप लगाया कि शिवगंगा जिले का एक पोस्टल बैलेट गलती से वेल्लोर जिले के समान नाम वाले क्षेत्र में चला गया और वहाँ अस्वीकृत हो गया, जिससे परिणाम प्रभावित हुआ।
मद्रास हाईकोर्ट ने सेतुपति को फ्लोर टेस्ट से क्यों रोका?
DMK नेता पेरियाकरुप्पन की याचिका पर मद्रास हाईकोर्ट की अवकाश पीठ ने मतगणना में कथित अनियमितताओं के मद्देनज़र अंतरिम आदेश जारी करते हुए सेतुपति को विधानसभा की अहम कार्यवाहियों, जिसमें फ्लोर टेस्ट शामिल है, में भाग लेने से रोक दिया।
सुप्रीम कोर्ट में किस पीठ के समक्ष यह मामला सूचीबद्ध है?
यह याचिका जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस विजय बिश्नोई की तीन सदस्यीय पीठ के समक्ष बुधवार को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध है। वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने CJI सूर्यकांत से तत्काल सुनवाई का अनुरोध किया था।
इस मामले का तमिलनाडु विधानसभा पर क्या असर पड़ सकता है?
यदि सुप्रीम कोर्ट हाईकोर्ट के अंतरिम आदेश पर स्थगन देता है तो सेतुपति फ्लोर टेस्ट में मतदान कर सकेंगे, जो सरकार के बहुमत के लिए निर्णायक हो सकता है। एक वोट के अंतर वाली सीट पर विधायक की उपस्थिति या अनुपस्थिति राजनीतिक समीकरणों को सीधे प्रभावित करती है।
राष्ट्र प्रेस